त्योहारों में न पालें जुआ खेलने की लत वरना होगा ऐसा हाल कि…

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तुषार सिंघल (बदला हुआ नाम) ने चार करोड़ रुपये जुए में गंवा दिए। उसे इंटरनेट पर ऑनलाइन गेमिंग जोन में पैसे लगाने की लत थी, यह एक ऐसा ऑनलाइन मंच है, जहां हारने वाले और जीतने वाले के पक्ष में रुपयों का लेनदेन भी ऑनलाइन ही होता है।

तुषार के अभिभावकों को इस बात की भनक तक नहीं थी कि 30 साल का उनका बेटा अपने लैपटॉप पर दिन भर क्या करता है। उन्हें अपने बेटे की जुए की लत के बारे में जितना कुछ भी मालूम था, वह बस इतना था कि वह दीवाली के अवसर पर वह थोड़ा बहुत पत्ते खेल लेता है।

तुषार के पिता ने अब उसे दिल्ली में एक जुए की लत छुड़ाने वाली संस्था में भर्ती किया है। उन्होंने कहा, “हमें तो पता भी नहीं था कि जुए की लत इतनी भयंकर भी हो सकती है।”

तुषार का इलाज कर रहे मनोरोग चिकित्सक गौरव गुप्ता कहते हैं, “किसी भी बात की लत के तार चाहे वह जुआ ही हो, दिमाग से जुड़े होते हैं। किसी आदमी की लत को छुड़ाने के लिए पेशेवर हस्तक्षेप की आवश्यकता पड़ती है।”

गुप्ता ने आईएएनएस को बताया, “उपचार के शुरुआती दिनों में तुषार चिकित्सा केंद्र में ही कंप्यूटर का उपयोग करने के लिए हमारी अनुमति लेता था और सिर्फ एक घंटे के लिए कंप्यूटर का प्रयोग करता था। थोड़े दिनों में हमने महसूस किया कि उसमें फिर से जुए वाले वेबसाइटों पर समय बिताने की तीव्र इच्छा जागृत होने लगी है।”

गुप्ता ने कहा, “बहुत से मामलों में हमने देखा है कि मरीज दिवाली जैसे अवसरों पर तीन पत्ती जैसे सामान्य ताश के खेल से शुरुआत करता है और धीरे धीरे उसे क्रिकेट में सट्टेबाजी जैसी बुरी और भयंकर लत लग जाती है।”

डॉ. गौरव गुप्ता दक्षिणी दिल्ली के महरौली और मंडी में तुलसी हेल्थ केयर सेंटर में लत छुड़ाने वाली दल के प्रमुख हैं।

Source: pURVANCHAL MEDIA