तकनीक से होगी उपभोक्ता अदालतों की निगरानी

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उपभोक्ताओं से जुड़े लंबित मामलों का तेजी से निपटारा करने के लिए केंद्र सरकार उपभोक्ता अदालतों में ढांचागत सुधार के साथ निगरानी व्यवस्था लागू करने की तैयारी में है। उपभोक्ता मंत्रालय ने सीसीटीवी कैमरे स्थापित कराने के साथ ही ढांचागत सुधार की रूपरेखा तैयार कर ली है। जिला उपभोक्ता फोरम और राज्य आयोग में व्यापक पैमाने पर उपभोक्ताओं के मामले लंबित हैं और हर साल करीब छह हजार नए मामले इस फेहरिस्त में शामिल हो जाते हैं।

केंद्रीय मंत्रालय ने लंबित उपभोक्ता मामलों के त्वरित निपटारे के लिए उपभोक्ता अदालतों में नियुक्ति से जुड़े नए नियम जारी किए थे। इन नियमों के बाद अब सरकार उपभोक्ता संबंधी मामलों के लगातार बढ़ने की हकीकत का पता लगाने के लिए कदम उठाने जा रही है। देशभर में उपभोक्ता संबंधी करीब पौने पांच लाख मुकदमे निपटारे की बाट जोह रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने बड़े पैमाने पर लंबित उपभोक्ता मामलों के मद्देनजर केंद्र सरकार को इस मामले में समुचित कदम उठाने को कहा था। सर्वोच्च अदालत के निर्देशों के अनुपालन के लिए मंत्रालय ने संसाधन और निगरानी की रूपरेखा तैयार कर ली है।

रूपरेखा को सैद्धांतिक मंजूरी मिली
मंत्रालय द्वारा तैयार की गई रूपरेखा को सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई है। इसके तहत, उपभोक्ता अदालतों और राज्य आयोग में सीसीटीवी लगाई जाएगी। एक निजी कंपनी को यह कार्य जल्द आवंटित भी कर दिया जाएगा। इसके अलावा, संसाधनों की अव्यवस्था के साथ फोरम के भवन की हालत और कर्मचारियों की संख्या की भी समीक्षा की गई है।

लंबित न हों 500 से अधिक मामले

नए नियमों में कहा गया है कि जिला फोरम में सालभर में 500 से ज्यादा शिकायतें लंबित नहीं होनी चाहिए या तीन साल में दायर हुई कुल शिकायतों में औसतन 500 से ज्यादा मामले लंबित नहीं रहें। जिलों में नियुक्ति पार्ट टाइम आधार पर की जाएगी, जबकि सदस्यों की नियुक्ति स्थायी और अस्थायी आधार पर की जा सकेगी। खास बात यह है कि पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया सेवानिवृत्ति से छह माह पहले अनिवार्य तौर पर शुरू की जाएगी।

जिला स्तर फोरम में 400 पद खाली 
देशभर में जिला स्तर फोरम में करीब 400 पद खाली पड़े हैं। इन्हें भरने के लिए सरकार ने हाईकोर्ट की सहमति पर जिला जज को फोरम की जिम्मेदारी सौंपने और राज्य आयोग में हाईकोर्ट के जज की भूमिका निभाने के नियम जारी किए थे। उन्हें आयोग की जिम्मेदारी का अतिरिक्त भार दिया जाएगा या स्वतंत्र रूप से नियुक्ति की जाएगी, यह फैसला हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की सहमति के साथ लिया जाएगा।

गौरतलब है कि पूर्व मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर ने पिछले साल देश की उपभोक्ता अदालतों के रवैये पर सवाल खड़ा किया था। इसकी वजह जिला फोरम से लेकर राष्ट्रीय फोरम तक 4.65 से ज्यादा मामले लंबित होना था। इनमें से 3.9 लाख मामले जिलों में लंबित हैं। पूरे देश में जिला स्तर उपभोक्ता संबंधी 500 अदालतें हैं।

Source: Purvanchal media