हिंदू राष्ट्रवाद से पहुंचा भारत की धर्मनिरपेक्ष छवि को नुकसान

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हाल के दशकों में भारत में हिंदू राष्ट्रवाद एक राजनीतिक शक्ति के रूप में उभरा है और इससे देश की धर्मनिरपेक्ष छवि को नुकसान पहुंचा है। यह दावा अमेरिकी कांग्रेस की एक रिपोर्ट में किया गया है। साथ ही रिपोर्ट में देश में बहुसंख्यक द्वारा बढ़ती हिंसाओं की घटनाओं के लिए सोशल मीडिया की भूमिका को लेकर भी चेताया गया है।

इस साल अगस्त में जारी हुई कांग्रेसनल रिचर्स सर्विस (सीआरएस) की ‘इंडिया: रिलिजस फ्रीडम इश्यू’ नामक रिपोर्ट में धार्मिक रूप से प्रेरित कथित दमन और हिंसा का विशिष्ट क्षेत्रों का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि गौरक्षा के नाम पर हिंसा, धर्मांतरण का विरोध, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर लोगों को पीटना, गैर सरकारी संगठनों द्वारा चलाए जा रहे अभियानों से देश की धर्मनिरपेक्ष परंपराओं के लिए नुकसानदेह है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि धार्मिक स्वतंत्रता का देश के संविधान के तहत स्पष्ट रूप से संरक्षित है। देश की आबादी में हिंदू बहुसंख्यक हैं। हाल के दशकों में हिंदू राष्ट्रवाद भारत में एक राजनीतिक ताकत के रूप में उभरा है। हाल ही में हुई घटनाएं भारत की धर्मनिरपेक्ष छवि को नष्ट कर रही हैं और यह धार्मिक स्वतंत्रता पर नया हमला है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2014 में भाजपा की जीत के बाद से भारत में धार्मिक स्वतंत्रता के मुद्दे को खासा तवज्जो दी गई है।

टू प्लस टू वार्ता से पहले तैयार की गई रिपोर्ट

इसी महीने नई दिल्ली में हुई टू प्लस टू वार्ता से पहले दक्षिण एशियाई विशेषज्ञ एलन क्रोनस्टेड द्वारा यह रिपोर्ट अमेरिकी कांग्रेस के सदस्यों के लिए तैयार की गई।

कुछ सांसदों ने विदेश मंत्री माइक पोम्पियो से धार्मिक स्वतंत्रता के मुद्दे को भारतीय नेताओं के समक्ष उठाने की भी मांग की थी। हालांकि यह स्पष्ट किया गया है कि रिपोर्ट को स्वतंत्र विशेषज्ञों ने तैयार किया है। यह न तो अमेरिकी कांग्रेस की आधिकारिक रिपोर्ट है और न ही कांग्रेस सांसदों के दृष्टिकोण को दर्शाती है।

Source: Purvanchal media