गणेश चतुर्थी के दिन भूलकर भी ना करे चंद्रमा के दर्शन, वरना लग सकता है झूठा आरोप

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इंटरनेट डेस्क। गणेश चतुर्थी की रात भूलकर भी चंद्रमा के दर्शन नहीं करने चाहिए। वरना आपके ऊपर झूठे आरोप लग सकते है। एक बार श्री कृष्ण ने भी चंद्रमा का दर्शन कर लिया था जिससे उन पर भी चोरी का झूठा आरोप लगा था। यह बात नारद ऋषि ने श्रीकृष्ण को बताई थी। इसके बाद फिर कृष्ण भगवान ने गणेश जी की पूजा की और उस आरोप से मुक्ति पाई। शास्त्रों के अनुसार भाद्रपद के शुक्लपक्ष की चतुर्थी पर चंद्रमा को दिए गए गणेश जी के श्राप के कारण ऐसा होता है, परन्तु गलती से चंद्रमा देख लेने पर पुराणों में आरोप से मुक्ति के लिए मंत्र भी बताया गया है। जिसका जाप करने से चंद्र दर्शन का दोष नहीं लगता है।

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मंत्र –

सिंह: प्रसेन मण्वधीत्सिंहो जाम्बवता हत:।

सुकुमार मा रोदीस्तव ह्येष: स्यमन्तक:।।

इस मंत्र के जाप से कलंक नहीं लगता है। जो व्यक्ति झूठे आरोप में फंस जाए, वह इस मंत्र को जाप कर आरोप से छुटकारा पा सकते है। अगर मंत्र न पढ़ा जाए तो गणेश जी की पूजा और व्रत करने से इसका दोष नहीं लगता है।

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जानिए श्रीगणेश ने क्यों दिया था चंद्रमा को श्राप

पुराणों के अनुसार, ऐसी मान्यता है कि गणेश चतुर्थी के दिन चांद बेहद खूबसूरत दिखाई आता है। इस दिन गणेश भगवान ने चांद को यह श्राप दिया कि जो भी इस दिन चांद का दीदार करेगा उसे कलंक लगेगा। गणेश पुराण के मुताबिक एक बार भगवान श्री कृष्ण ने भी शुक्ल पक्ष की चतुर्थी के दिन आसमान में दिखाई आ रहे खूबसूरत चांद को देख लिया और फिर कुछ ही दिनों बाद उन पर हत्या का झूठा आरोप लगा। श्रीकृष्ण को बाद में नारद मुनि ने ये बताया कि ये कलंक उन पर इसलिए लगा है क्योंकि उन्होंने चतुर्थी के दिन चाँद देख लिया था।

कथा के मुताबिक गणेश जी के सूंड वाले मुख को देखकर एक बार चांद को हंसी आ गई। इससे गणेश जी बहुत नाराज़ हो गये और उन्होंने चांद से कहा कि, तुम्हे अपनी खूबसूरती पर बहुत घमंड है आज मैं तुम्हे श्राप देता हूँ कि आज के दिन तुम्हें जो भी देखेगा उसे कलंक लगेगा। तब से लेकर आज तक गणेश चतुर्थी के दिन चाँद को देखने से मना किया जाता है। गणेश जी के श्राप से चन्द्रमा को अपनी गलती का एहसास हुआ और वे दुखी मन के साथ घर में जाकर छिपकर बैठ गये। बाद में जाकर सभी देवताओं ने चन्द्रमा को मनाया और उन्हें समझाया कि वे मोदक और पकवान बनाकर गणेश जी की पूजा अर्चना करें, जिससे वह खुश हो जाएंगे। बाद में चन्द्रमा में ऐसा ही किया तब जाकर भगवन गणेश खुश तो हुए लेकिन उन्होंने कहा कि श्राप पूरी तरह खत्म नहीं होगा जिससे आने वाली पीढ़ियों को ये याद रहे कि किसी के रुप रंग को देखकर हंसी नहीं उड़ना चाहिए।

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Source: Rochak khabare