दिल्ली में देसी गऊ के गोबर और मूत्र के महत्व का दिया ज्ञान

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दिल्ली । विशेषर नेगी

देश की राजधानी दिल्ली के रोहिणी स्थित वैदिक गौशाला में पंचगब्य प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। जिस में देश के विभिन्न हिस्सों से आए गौ सेवा एवम प्राकृतिक खेती से जुड़े लोगो ने हिस्सा लिया। प्रशिक्षण का मूल विषय स्वस्थ, निरोग समाज निर्माण के साथ भारतीय पारम्परिक नस्ल की गउओं के महत्व एवम उपयोगिता पर बारीकी से जानकारी देना था। ताकि गौ पालन से न केवल मनुष्य स्वस्थ रहता है बल्कि समाज को भी जैविक एवम गुणकारी आहार उपलब्ध करा सके । इस दौरान गौ मूत्र, गोबर व दूध से बनाये जा रहे औषधीय गुणों से युक्त उत्पादों को बनाने की विधि भी बताई गई, लेकिन नशामुक्ति चूर्ण निर्माण कर उस के प्रभावी गुणों से सभी प्रशिक्षणार्थी प्रभावित हुए। ,गौशाला के अंजली मलिक, पूनम कौशिक, नीलम वर्मा आदि की टीम गौनायल यानी फ्लोर क्लीनर, गौ अर्क,भस्म, बर्तन धोने का साबुन, चुना, औषधीय उपले,वैदिक चूर्ण यानी नशामुक्ति चूर्ण, पंचगव्य दन्तमंजन, केश तेल,गौमय त्रिफला,पंच गव्य उबटन, अमृतधारा, ज्वर नाशक चूर्ण व हर्बल चाय बनाने की विधि बताई। उन्होंने देशी गाय के मूत्र और गोबर् में कितने बीमारी नाशक तत्व पाए जाते है विस्तार से बताया।

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