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RSS के दबाव में आकर मोदी सरकार ने, नीति आयोग के उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया को दिखाई इस्तीफे की राह !

 

   “देश की सरकार चला रही भाजपा, और भाजपा को चला रहा है RSS (संघ)” !

दिल्ली : नीति आयोग के उपाध्यक्ष पद से इस्तीफे के वजहों के रूप में अरविंद पनगढ़िया ने बेशक कोलंबिया विश्वविद्यालय से अवकाश की अवधी न बढ़ने को बहाना बनाया है। लेकिन उनके इस्तीफे के पीछे मुख्य वजह संघ का दबाव माना जा रहा है। नियुक्ति के समय से ही वे भगवा विचारकों के निशाने पर रहे हैं।

पनगढ़िया के नेतृत्व में आयोग के तीन साल गुजर जाने के बावजूद जब आयोग अपनी अलग छाप छोडने में नाकाम रहा है। तो सरकार को भी संघ का दबाव मानना पडा है। सूत्र बताते हैं कि संघ के दबाव के असर में सरकार के शीर्ष स्तर ने ही पनगढ़िया को इस्तीफे की राह दिखाई है। उनके इस्तीफे के साथ ही नीति आयोग के नए उपाध्यक्ष के चयन को लेकर कवायद शुरू हो गई है। उम्मीद जताई जा रही है कि नीति आयोग का अगला उपाध्यक्ष बेशक कोई भगवाधारी न हो मगर वह संघ की अपेक्षाओं के अनुरूप होगा।

संघ की चिंता का विषय !

योजना आयोग को समाप्त कर नीति आयोग का गठन पीएम मोदी का पहला साहसिक कदम था। मगर तीन वर्ष बीत जाने के बावजूद भी नीति आयोग अपनी कोई अलग छाप छोडने में नाकाम रहा है। बल्कि उल्टा उसने कई मौकों पर केंद्र सरकार की मुश्किलें ही बढाई हैं। दवाई सस्ती करने और कॉरपोरेट फेडरलिज्म के मामले में उसकी राय सरकार के विपरित रही है। यही वजह रही कि संघ के संगठनों को खुलेआम उस नीति आयोग के खिलाफ मोर्चा खोलने को मजबूर होना पडा जिसके अध्यक्ष खुद पीएम मोदी हैं।

बताया जा रहा है कि पनगढ़िया के इस्तीफे के जरिए सरकार ने अपनी भूल सुधार की है। हालांकि सरकार के शीर्ष अधिकारियों की मानें तो पनगढ़िया ने तीन माह पहले ही पद से इस्तीफे की पेशकश कर दी थी। उनके उत्तराधिकारी की तलाश भी कर ली गई है। बावजूद उसके नाम अभी बाहर नहीं खोला जा रहा है।

मगर संघ सूत्रों का कहना है कि पनगढ़िया का इस्तीफा उसके दबाव का नतीजा है। स्वदेशी और बीएमएस सरीखे उसके संगठनों के अलावा सांसद सुब्रहमण्यम स्वामी और एस गुरूमूर्ति सरीखे भगवा विचारकों ने भी पनगढ़िया की कार्यप्रणाली के खिलाफ खुला बयान दिया था। नीति आयोग पर विदेशी कंपनियों के हितों को लाभ पहुंचाने के आरोप मढे गए थे।

PM मोदी ने ही योजना आयोग की जगह नीति आयोग का गठन करवाया था !

नीति आयोग को पीएम मोदी की पसंदीदा संस्थाओं में एक माना जाता है। 15 अगस्त, 2014 को लालकिले से अपने पहले संबोधन में पीएम मोदी ने योजना आयोग को समाप्त करके उसके स्थान पर नीति आयोग स्थापित करने की घोषणा की थी। नीति आयोग का पूरा नाम नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर ट्रान्सफॉर्मिंग इंडिया है। इस संस्था को बड़े थिंक टैंक के तौर पर माना जाता है। इस संस्था में 8 सदस्य होते हैं। आठ सदस्यीय थिंक टैंक में एक अध्यक्ष और सात सदस्य होते हैं। लेकिन लक्ष्य हासिल करने में नाकाम रहे नीति आयोग में बदलाव के लिए सरकार को मजबूर होना पडा है।

Source: Indiakinews
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RSS के दबाव में आकर मोदी सरकार ने, नीति आयोग के उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया को दिखाई इस्तीफे की राह !