Viral

क्यों मनाते है छठ महापर्व,जानिए क्या है रहस्य,कैसे होती है आपकी…

क्यों मनाते हैं छठ महापर्व
==========================

भारत की विविध संस्कृति का एक अहम अंग यहां के पर्व हैं. भारत में ऐसे कई छठ पर्व हैं जो बेहद कठिन माने जाते हैं और इन्हीं पर्वों में से एक है छठ पर्व. छठ को सिर्फ पर्व नहीं महापर्व कहा जाता है.
चार दिनों तक चलने वाले इस पर्व में व्रती को लगभग तीन दिन का व्रत रखना होता है जिसमें से दो दिन तो निर्जली व्रत रखा जाता है. आइए आज के इस अंक में जानें छठ के बारे में कुछ विशेष बातें और छठ व्रत कथा.

क्या है छठ? :-

छठ पर्व और षष्ठी का अपभ्रंश है. कार्तिक मास की अमावस्या को दीवाली मनाने के तुरंत बाद मनाए जाने वाले इस चार दिवसीय व्रत की सबसे कठिन है और महत्वपूर्ण रात्रि कार्तिक शुक्ल षष्ठी की होती है. इसी कारण इस व्रत का नामकरण छठ व्रत हो गया.
छठ पर्व वर्ष में दो बार मनाया जाता है. पहली बार चैत्र में और दूसरी बार कार्तिक में. चैत्र शुक्लपक्ष षष्ठी पर मनाए जाने वाले छठ पर्व को चैती छठ व कार्तिक शुक्लपक्ष षष्ठी पर मनाए जाने वाले पर्व को कार्तिकी छठ कहा जाता है.

छठ व्रत कथा :-

मार्कण्डेय पुराण में इस बात का उल्लेख मिलता है कि सृष्टि की अधिष्ठात्री प्रकृति देवी ने अपने आप को छह भागों में विभाजित किया है और इनके छठे अंश को सर्वश्रेष्ठ मातृ देवी के रूप में जाना जाता है, जो ब्रह्मा की मानस पुत्री और बच्चों की रक्षा करने वाली देवी हैं. कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी को इन्हीं देवी की पूजा की जाती है.
शिशु के जन्म के छह दिनों के बाद भी इन्हीं देवी की पूजा करके बच्चे के स्वस्थ, सफल और दीर्घ आयु की प्रार्थना की जाती है. पुराणों में इन्हीं देवी का नाम कात्यायनी मिलता है, जिनकी नवरात्र की षष्ठी तिथि को पूजा की जाती है.
छठ व्रत की परंपरा सदियों से चली आ रही है. यह परंपरा कैसे शुरू हुई, इस संदर्भ में एक कथा का उल्लेख पुराणों में मिलता है. इसके अनुसार प्रियव्रत नामक एक राजा की कोई संतान नहीं थी. संतान प्राप्ति के लिए महर्षि कश्यप ने उन्हे पुत्रयेष्टि यज्ञ करने का परामर्श दिया. यज्ञ के फलस्वरूप महारानी ने एक पुत्र को जन्म दिया, किंतु वह शिशु मृत था.
इस समाचार से पूरे नगर में शोक व्याप्त हो गया. तभी एक आश्चर्यजनक घटना घटी. आकाश से एक ज्योतिर्मय विमान धरती पर उतरा और उसमें बैठी देवी ने कहा, ‘मैं षष्ठी देवी और विश्व के समस्त बालकों की रक्षिका हूं.’ इतना कहकर देवी ने शिशु के मृत शरीर का स्पर्श किया, जिससे वह बालक जीवित हो उठा. इसके बाद से ही राजा ने अपने राज्य में यह त्योहार मनाने की घोषणा कर दी.

दूसरी छठ व्रत कथा

पौराणिक मान्यता के अनुसार कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी के सूर्यास्त और सप्तमी के सूर्योदय के मध्य वेदमाता गायत्री का जन्म हुआ था. प्रकृति के षष्ठ अंश से उत्पन्न षष्ठी माता बालकों की रक्षा करने वाले विष्णु भगवान द्वारा रची माया हैं. बालक के जन्म के छठे दिन छठी मैया की पूजा-अर्चना की जाती है, जिससे बच्चे के ग्रह-गोचर शांत हो जाएं और जिंदगी मे किसी प्रकार का कष्ट नहीं आए. अत: इस तिथि को षष्ठी देवी का व्रत होने लगा.

छठ पर्व से जुडी ख़ास बातें :-

कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष के चतुर्थी से सप्तमी तिथि तक चलने वालाे चार दिन के पर्व छठ को मन्नतों का पर्व भी कहा जाता है. इसके महत्व का इसी बात से अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि इसमें किसी गलती के लिए कोई जगह नहीं होती. इसलिए शुद्धता और सफाई के साथ तन और मन से भी इस पर्व में जबरदस्त शुद्धता का ख्याल रखा जाता है. आइए जानें, इस व्रत की खास बातें…

चार दिनों तक चलने वाले इस पावन पर्व पर व्रती को लगातार उपवास करना होता है. व्रत रखने वाली महिला को ‘परवैतिन’ कहा जाता है.

छठ के पर्व में व्रती को भोजन के साथ ही बिस्तर पर सोने का भी त्याग करना पड़ता है.

छठ पर्व में व्रती का एक अलग कमरे में फर्श पर एक कंबल या चादर में सोना इस परंपरा का एक हिस्सा है.

छठ पूजा में व्रती बिना सिलाई किए हुए कपड़े पहनते हैं जब कि इस त्योहार में शामिल होने वाले सभी लोग नए कपड़े पहनते हैं.

छठ पूजा के दौरान महिलाएं साड़ी और पुरुष धोती पहनकर पूजा करते है.

अगर छठ का व्रत एक बार शुरू कर दिया जाए तो छठ पर्व को सालों साल तब तक करना होता है, जब तक कि घर परिवार की अगली पीढ़ी की कोई विवाहित महिला इसे करना न शुरू कर दे.

छठ पूजा से पहले या इस दौरान अगर घर में किसी की मृत्यु हो जाए तो यह पर्व नहीं मनाया जाता है.

Source: Gorakhpur times
Click link to read original post
क्यों मनाते है छठ महापर्व,जानिए क्या है रहस्य,कैसे होती है आपकी…