गोबर का गमला, कांगनी का पास्ता व लालटेन से अंडे सेने की मशीन मिली उपहार…

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राजस्थान के उदयपुर में चल रहे ग्लोबल राजस्थान एग्रीटेक मीट (ग्राम) में कुछ विशेष चीजें भी हैं जो लोगों को अपनी ओर बहुत ज्यादा आकर्षित कर रही हैं  इनकी जानकारी लेने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ रही है. यहां राजस्थान के गोपालन विभाग ने गोबर से बना गमला प्रदशित किया है.

गोबर का गमला
गोबर की लकड़ी यानी गोकाष्ठ के बाद अब गोबर का गमला भी बहुत ज्यादा लोकप्रिय हो रहा है. जब हम कोई पौधा नर्सरी से लाते हैं तो वह प्लास्टिक की थैली में दिया जाता है  थैली हटाने में थोड़ी भी लापरवाही की जाए तो पौधे की जड़ें बेकार हो जाती हैं  मिट्टी में लगाने पर पौधा पनप नहीं पाता. इस स्थिति से बचने के लिए गोबर का गमला बहुत ज्यादा उपयोगी है. गमले को मशीन से तैयार किया जाता है. इसमें मिट्टी भरकर पौधा लगाइए  जब इस पौधे को जमीन की मिट्टी में लगाना हो तो गड्ढा कर इस गमले को ही मिट्टी में दबा दीजिए. इससे पौधा बेकार नहीं होगा  पौधे को गोबर की खाद भी मिल जाएगी. पौधा सरलता से पनप जाएगा.

अंडे सेने वाली लालटेन
लालटेन की गर्मी से अंडे सेने वाला देसी इन्क्युबेटर उदयपुर के ही रहने वाले शेरखान ग्राम में एक देसी इन्क्युबेटर लाए हैं. इसमें बिना मुर्गी एक बार में 300 अंडे सेऐ जा सकते हैं. शेरखान प्रदर्शनी में ही अंडों से चूजे निकलते दिखा रहे हैं. शेर खान का यह देसी इन्क्युबेटर सिर्फ 11 हजार का है. इसमें अंडों से चूजे निकालने के लिए वे लालटेन का प्रयोग करते हैं. अलमारी में दो या तीन जलती हुई लालटेन  नमी के लिए एक बर्तन में कुछ पानी रखा जाता है. इसके बाद अंडे रखकर अलमारी को बंद कर दिया जाता है. इस प्रक्रिया से अलमारी का तापमान 37 डिग्री के आसपास सैट हो जाता है. हर सात घंटे में इसे खोलकर देखा जाता है  अंडों पर हल्का हाथ फेरा जाता है. यह प्रक्रिया 21 दिन तक चलती है  इस अवधि में अडों से चूजे निकलने प्रारम्भ हो जाते हैं. शेरखान बताते हैं कि प्राकृतिक रूप से भी इसी तापमान  इसी अवधि में अंडों से चूजे निकलते हैं. इसके बाद इन चूजों को 28 दिन तक लैंप की रोशनी में रखा जाता है. उन्हें आहार दिया जाता है  इस तरह चूजे बड़े किए जाते हैं. शेर खान बताते हैं कि उनका मूल कार्य कबूतर पालना है  उन्होंने अपने स्तर पर ही गरीब किसानों के लिए इसे तैयार किया है. अभी इसका आकार बड़ा है, जिसे वे छोटा करने की प्रयास में जुटे हैं.

कांगनी का पास्ता 
इटेलियन व्यंजन पास्ता वैसे तो मैदे का बनता है  जंक फूड माना जाता है, लेकिन उदयपुर के महाराणा प्रताप कृषि विश्वविद्यालय के गृह विज्ञान विभाग ने पास्ता को भी पौष्टिक बना दिया है.यहां मोटे अन्न कांगनी  चूकंदर से पास्ता तैयार किया गया है. इसमें हालांकि सूजी  मैदा भी है, लेकिन कांगनी  चूकंदर के कारण इसमें कैल्शियम  आयरन आ गए हैं  मैदा का दुष्प्रभाव बहुत ज्यादा कम हो गया है. इसे तैयार करने वाली यहां सीनियर रिसर्च फेलो शिप्रा चेलावत बताती हैं कि इसका स्वाद बिलकुल सामान्य पास्ता जैसा ही है, लेकिन पोषण तत्व उससे कहीं ज्यादा है.

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Source: Purvanchal media
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गोबर का गमला, कांगनी का पास्ता व लालटेन से अंडे सेने की मशीन मिली उपहार…