पहली महिला वकील की याद में Google ने बनाया ये शानदार Doodle

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नई दिल्ली: गूगल ने आज डूडल के जरिए महाराष्ट्र के नासिक में जन्मी कार्नेलिया सोराबजी को याद किया कार्नेलिया सोराबजी को हिंदुस्तान की पहली महिला बैरिस्टर होने का श्रेय प्राप्त है वे वकीलहोने के साथ ही समाज सुधारक  लेखिका भी थीं कार्नेलिया सोराबजी के नाम कई उपलब्धियां हैंवे न सिर्फ हिंदुस्तान  लंदन में लॉ की प्रेक्टिस करने वाली पहली महिला थीं, बल्कि वे बॉम्बे यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट होने वाली पहली युवती, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई करने वाली पहली महिला  ब्रिटिश यूनिवर्सिटी से पढ़ाई करने वाली पहली इंडियन भी थीं

15 नवम्बर 1866 को जन्मीं कार्नेलिया 1892 में नागरिक कानून की पढ़ाई के लिए विदेश गईं 1894 में हिंदुस्तान लौटीं उस समय समाज में महिलाएं मुखर नहीं थीं  न ही स्त्रियों को वकालत का अधिकार था पर कार्नेलिया तो एक जुनून का नाम था अपनी प्रतिभा की बदौलत उन्होंने स्त्रियोंको कानूनी परामर्श देना शुरुआत किया  स्त्रियों के लिए वकालत का पेशा खोलने की माँग उठाईअंतत: 1907 के बाद कार्नेलिया को बंगाल, बिहार, उड़ीसा  असम की अदालतों में सहायक महिला एडवोकेट का पद दिया गया

एक लम्बी जद्दोजहद के बाद 1924 में स्त्रियों को वकालत से रोकने वाले कानून को शिथिल कर उनके लिए भी यह पेशा खोल दिया गया 1929 में कार्नेलिया न्यायालय की वरिष्ठ एडवोकेट के तौर पर सेवानिवृत्त हुयीं पर उसके बाद स्त्रियों में इतनी जागृति आ चुकी थी कि वे वकालत को एक पेशे के तौर पर अपनाकर अपनी आवाज मुखर करने लगी थीं यद्यपि 1954 में कार्नेलिया का देहावसान हो गया, पर आज भी उनका नाम वकालत जैसे जटिल  प्रतिष्ठित पेशे में स्त्रियों की बुनियाद है

समाज सुधार  कानूनी काम के अतिरिक्त उन्होने अनेकों पुस्तकों, लघुकथाओं एवं लेखों की रचना भी कीं उन्होंने दो आत्मकथाएं- इंडिया कॉलिंग (1934)  इंडिया रिकॉल्ड (1936) भी लिखी हैं

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Source: Purvanchal media
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