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कैदियों ने कुछ इस तरह से किया प्रायश्चित

जिसकी मर्डर के आरोप में कैदी कारागार में बंद हैं, उसके परिवार को अब तक अपनी कमाई
की एक तिहाई राशि यानी कुल 1.71 करोड़ रुपये देकर कैदियों ने प्रायश्चित किया है. सश्रम कारावास की सजा पा चुके ऐसे कैदियों के लिए 2014 में झारखंड विक्टिम वेलफेयर फंड रूल्स-2014 आया था.इसके बाद से ही अब तक झारखंड की जेलों में 648 बंदियों ने पसीने बहा पांच करोड़, 14 लाख, 52 हजार 682 रुपये कमाए. उनकी इस राशि का एक तिहाई भाग यानी एक करोड़, 71 लाख 50 हजार 894 रुपये पीड़ित परिवारों में बांटे जा चुके हैं.

पीड़ित परिवार को खोजने में कारागार प्रशासन को भी मशक्कत करनी पड़ी. हालांकि, कुछ अधिकारियों का कहना है कि कई ऐसे पीड़ित परिजन होते हैं, जो ऐसे बंदियों की कमाई लेना स्वीकार नहीं करते. ऐसा ही एक मामला हजारीबाग के एक चिकित्सक का आया था, जिन्होंने अपने एक परिजन के हत्यारे से मिलने वाली राशि लेने से इन्कार कर दिया था. कारागार में सश्रम कारावास की सजा काट रहे बंदियों को कारागार में कार्य के बदले पैसे भी मिलते हैं. कुशल बंदी को 144 रुपये प्रतिदिन, अद्र्धकुशल को 113 रुपये रोजाना के हिसाब से मेहनताना मिलता है. ये बंदी वहां कंबल, चादर, हस्तशिल्प की वस्तुएं बनाने के साथ ही साबुन, फाइलें, फिनायल भी भी बनाते हैं  कारागार में खेती भी करते हैं. इसके एवज में उन्हें मेहनताना मिलता है, जिसकी राशि पीड़ितों में बांटी जाती है

जिसकी मर्डर के आरोप में बंद हैं, उसके परिवार को दी कारागार में कमाई गई एक तिहाई राशि
4झारखंड विक्टिम वेलफेयर फंड रूल्स-2014 के तहत दी गई राशि

कब कितने पीड़ितों को दी राशि
2015 : लोकनायक जयप्रकाश नारायण सेंट्रल कारागार हजारीबाग -14 पीड़ितों में 1,53,522 रुपये.
सेंट्रल कारागार दुमका : नौ पीड़ितों में 1,10,312 रुपये.
सेंट्रल कारागार घाघीडीह जमशेदपुर : एक पीड़ित को 10,355 रुपये.

-केंद्रीय जेल के अधीक्षक सजायाफ्ता बंदियों के ब्योरे संबंधित जिले के जिलाधिकारी को भेजते हैं.
-जिले से पीड़िता का पता लगाया जाता है. वहां से पूरी जानकारी मिलने के बाद कारा अधीक्षक के पास रिपोर्ट आती है.
-कारा अधीक्षक रिपोर्ट को जिला अनुशंसा समिति को भेजते हैं, जिसमें जिले के डीसी-एसपी, संबंधित मुख्य प्रोबेशन पदाधिकारी और कारा अधीक्षक होते हैं.
-सभी मामलों पर विचार होता है. उस वक्त डालसा के सचिव आमंत्रित सदस्य के तौर पर मौजूद होते हैं. समीक्षा के बाद कारा अधीक्षक चेक से भुगतान करते हैं.

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Source: Purvanchal media
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