आखिर क्यों? गांधीजी ने कराई थी माचवे की शादी!

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इंटरनेट डेस्क: हिन्दी एवं मराठी के प्रख्यात लेखक एवं तारसप्तक के यशस्वी कवि प्रभाकर माचवे की शादी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने अपने आश्रम की एक अनाथ लडकी से कराई थी और साहित्य अकादमी में देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरु ने आजादी के बाद उन्हें नौकरी दी थी। उनका साहित्य अकादमी से बीस साल नौकरी करने के बाद मोहभंग हो गया।

आपको बता दे की वे उसके कटु आलोचक हो गए थे जबकि इस संस्थान को बनाने में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी। 26 दिसंबर 1917 में मध्यप्रदेश के ग्वालियर में जन्मे एवं 130 पुस्तकों के लेखक माचवे की शादी में गांधी जी ने खुद अपने हाथ से सूत कातकर माला पहनाई थी और कस्तूरबा गांधी ने अपने हाथ से सूत कातकर एक साडी उनकी पत्नी को उपहार में दी थी।

गांधी जी के कहने पर माचवे ने आजीवन खादी पहनने का संकल्प व्यक्त किया था जिसे उन्होंने मृत्यु पर्यंत निभाया था।प्रकांड विद्वान माचवे हिन्दी मराठी और अंग्रेजी के चलता फिरता विश्वकोश थे और खुद में संस्था थे। 8 नवम्बर 1940 में उनकी शादी गांधी जी ने अपने आश्रम सेवाग्राम में कराई थी।

कुल 54 पैसे इस शादी में खर्च हुए थे और खान अब्दुल गफ्फार खान, सरोजिनी नायडू, मौलाना आजाद राजकुमारी अमृत कौर, महादेव देसाई और डॉ़ कृपलानी जैसे लोग इसमें मौजूद थे। अपने हाथ से बनी साड़ी कस्तूरबा ने उपहार में दी थी। कहा जाता है कि अपने जीवन काल में उन्होंने दो लोगों को ही उनकी शादी में ऐसी साडी उपहार में दी थी जिनमें एक इंदिरा गांधी थीं।

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Source: Rochak khabare
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