गोरखपुर को मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य किया पूर्व मेयर ने, लोगों के लिए रही सदैव तत्पर

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भारत वर्ष के सामाजिक, राजनैतिक ऐतिहासिक व धार्मिक विषयों के अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि जब जब नारी ने सकारात्मक निर्णय ले कर प्रगति के मार्ग को प्रशस्त करने का निर्णय लिया है, तब तब प्रगति, विकास, संघर्ष व मार्गदर्शन के नए नए आयाम लगातार स्थापित हुए है। पुरूष प्रधान राजनीति के इस दौर में एक महिला पूर्व महापौर ने विकास के नए आयाम खड़े कर प्रमाणित किया है कि महिलाओं भी अपनी योग्यता, क्षमता व प्रतिभा के बल पर राजनीति में उच्च निर्णय लेने में पूर्णतया सक्षम है। जिसका स्पष्ट उदाहरण उत्तर प्रदेश के गोरखपुर महानगर की पूर्व महापौर डॉ0 सत्या पाण्डेय के रूप में जनसम्मुख है। महिला मेयर के रूप में महानगर के चतुर्दिक विकास के सभी सम्भावनाओं पर डॉ0 सत्या पाण्डेय के बहुमुखी प्रयास का परिणाम आज गोरखपुर महानगर में स्पष्ट दिखाई दे रहा है। नगर सफाई व्यवस्था, सड़कों एवं पार्को का शुद्धिकरण और नगर निगम से जुड़े जन-सारोकार के सभी मुद्दों पर उनके त्वरित सकारात्मक निर्णय लेने एवंज न समस्याओं का निराकरण, निःसन्देह रूप से जनभावनाओं को मेयर से सीधे सम्बद्ध कर लिया है।

निर्वाचित होने के बाद से ही अपने समस्त दायित्वों को जनता के लिए निश्चित कर देना और उसी के अनुसार जनता के बीच में लगातार सर्वसुलभ रहना एवं जनता के समादर में कार्य करना, यह उनकी विलक्षण प्रतिभा का ही प्रमाण है। गोरखपुर महानगर के लोग ही नहीं अपितु पूरे पूर्वाचल के लोग इनके पास लगातार अपनी समस्या और पीड़ा लेकर पहुंचते है, परन्तु बिना किसी भेद भाव के वे अपने स्तर से उनका निराकरण करने का भरपूर प्रयत्न करती है। एक कड़क प्रशासक की तरह सुबह नौ बजे से देर रात तक लगातार महानगर के प्रत्येक वार्डो का सघन दौरा और समस्याओं के समाधान तथा कार्यो की प्रगति की समीक्षा करना इनकी आदत में शुमार है। गोरखपुर नगर निगम की स्थापना से आज तक यदि देखा जाये, तो पूर्व महापौर के द्वारा की जा रही विकास की गति अन्य महापौरों के कार्यकालों से कई गुना बेहतर है।

विगत पाँच वर्षो के कार्यकाल के दौरान महापौर ने पार्षदों एवं नगर निगम के अधिकारियों/कर्मचारियों के सहयोग से महानगर की तस्वीर बदलने का खासा प्रयास किया है। बीच-बीच में कुछ दैवीय आपदाओं व गतिरोधों के कारण कुछ कार्यो में बाधा उत्पन्न हुई, फिर भी अपने लगातार प्रयासों से महानगर की सड़कों, नाले, पथ-प्रकाश, पेयजल व्यवस्था, ड्रेनेज, नलकूपों की स्थापना/मरम्मत, ओवरहेड टैंक, सीवर सिस्टम, मेलों एवं त्योहारों में स्वचालित शौचालय व अस्थाई प्रकाश व्यवस्था के साथ संक्रामक रोगों से महानगर ही नहीं, अपितु जिले भर से आये मरीजों के पूर्ण चिकित्सकीय उपचार के साथ ही नगर निगम के बजट में भारी वृद्धि करते हुए महानगर के सभी क्षेत्रों में अनेकों विकास के कार्य कराये गये है। महापौर की एक अति महत्वकांछी योजना के अंतर्गत महानगर वासियों को यातायात के जाम की समस्या से निजात दिलाने के लिए सड़कों का चौड़ीकरण, डिवाइडरों की मरम्मत, पटरियों के चौड़ीकरण करते हुए उनके सुदंरीकरण के साथ ही चौराहों पर हाईमास्ट व सिग्नल व्यवस्था एवं महानगर में सी. सी. टी. वी. कैमरे लगवाने का कार्य भी तीव्र प्रगति पर है। जिससे महिलाओं की सुरक्षा के साथ नागरिकों व व्यपारियों के साथ घटने वाली दुर्घटनाओं एवं लूटपाट के रोकथाम व अराजक तत्वों की धरपकड़ मेें बहुत उपयोगी साबित होगा।

महापौर द्वारा केन्द्र व प्रदेश सरकार से निरंतर संपर्क व पत्राचार करते हुए नदी के घाटों

को वाराणसी के नदियों एवं घाटों की भॉति पक्का घाट बनाकर महानगर को पर्यटन के केन्द्र के रूप में विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। राप्ती नदी पुल के पास विद्युत गैसा अधारित आधुनिक शवदाह गृह तथा अंडर ग्राउड़ पार्किग व्यवस्था व बंसतपुर सराय को कुटीर उद्योग, रोजगार व उसके पुरातन धरोहर को कायम रखते हुए उसे पूर्ण विकसित एवं नया स्वरूप देने का पूर्ण प्रयास महापौर द्वारा किया जा रहा है। महापौर के प्रयासों का ही परिणाम है कि महानगर को दो-दो फोरलेन की सौगात मिल पाया है तथा मेडिकल कालेज रोड का चौड़ीकरण भी महापौर के तीव्र प्रयासों का ही परिणाम है। अपने व्यक्तित्व व कृतित्व से महानगर की कर्मभूमि में विकास के नए-नए आयामों की संरचना कर के महापौर ने अपनी प्रतिभा, योग्यता व क्षमता से देश में ही नहीं अपितु विदेशों में भी अपनी कार्यक्षमता का लोहा मनवाया है, जिसके कारण इन्हें विगत 14 मार्च, 2015 को नई दिल्ली में राष्ट्रीय विश्वकर्मा अवार्ड व27 अप्रैल, 2015 को पुनः नई दिल्ली में प्रतिष्ठित राष्ट्रीय लीजेंड लीडरशिप अवार्ड प्राप्त हुआ।

महापौर गोरखपुर की एक अति महत्कांछी योजना पर यदि राज्य व केन्द्र सरकार का पूर्ण सहयोग रहा, तो गोरखपुर महानगर के हृदय में स्थित रामगढ़ ताल के चारों तरफ जाली व हाईमास्ट लैंप लगवाकर उसे पर्यटन के हब के रूप में विकसित करवाने की योजना है, जिसमें रामगढ़ताल में एक आइलैंड बनवा कर उस पर भगवान बुद्ध की प्रतिमा लगवाने का भी प्रस्ताव शामिल है।

Source: Gorakhpur times