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सेना के विरूद्ध FIR पर भड़के सुब्रमण्‍यम स्‍वामी

श्रीनगर: शोपियां में दो नागरिकों की मौत के मामले में सेना के विरूद्ध एफआईआर के मसले पर भाजपा नेता सुब्रमण्‍यम स्‍वामी ने सख्‍त नाराजगी जताई है। उन्‍होंने बोला कि राज्‍य की महबूबा मुफ्ती की गवर्नमेंट ये एफआईआर वापस ले नहीं तो उनकी गवर्नमेंट गिरा दी जाएगी। उन्‍होंने यह भी बोला कि हम अभी तक इस गवर्नमेंट को क्‍यों चला रहे हैं? ये बात हमारी समझ में नहीं आ रही हैImage result for भाजपा नेता सुब्रमण्‍यम स्‍वामी

इस बीच जम्मू व कश्मीर की CM महबूबा मुफ्ती ने सोमवार को बोला कि शोपियां में गोलीबारी में शामिल सेना की एक यूनिट के विरूद्ध पुलिस की प्राथमिकी को तार्किक अंत तक ले जाया जाएगा जिसमें दो नागरिकों की मौत हो गई थी। महबूबा ने ऐसा कहकर अपनी सहयोगी पार्टी बीजेपी को झटका दिया है जिसने मर्डर का मामला वापस लेने की मांग की थी।

पुलिस कार्रवाई का बचाव करती दिखीं महबूबा मुफ्ती
महबूबा मुफ्ती ने विधानसभा में यह बात हंगामे के बीच पुलिस कार्रवाई का बचाव करते हुए कही। महबूबा ने गोलीबारी की घटना व बीजेपी विधायक आर एस पठानिया की प्राथमिकी तत्काल वापस लेने की मांग को लेकर विधानसभा में हंगामे के बीच यह बात कही। पठानिया ने यद्यपि बोला कि उनकी पार्टी मजिस्ट्रेट जांच का समर्थन करती है ताकि कानून अपना कार्य कर सके।

अधिकारियों ने बताया कि प्राथमिकी सेना की गढ़वाल यूनिट के विरूद्ध रनबीर दंड संहिता की धारा 302 व 307 के तहत दर्ज की गई है। प्राथमिकी में सेना के एक मेजर का भी उल्लेख है जिसने शनिवार को घटना के समय सैन्य कर्मियों का नेतृत्व किया था। शोपियां के गनोवपोरा गांव में पथराव कर रही भीड़ पर सैन्य कर्मियों की गोलीबारी में दो नागरिक मारे गए थे। इस घटना के बाद CM ने घटना की जांच का आदेश दे दिया था।

और क्या बोला महबूबा ने?
मुफ्ती ने बोला कि वह नहीं मानतीं कि पुलिस की कार्रवाई से सेना का मनोबल कम होगा। महबूबा ने घटना को राजनीतिक प्रक्रिया के लिए एक ‘‘झटका’’ बताते हुए बोला कि उन्होंने इसके बारे में रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण से बात की है जिन्होंने मामले में महत्वपूर्ण कार्रवाई करने को बोला है। उन्होंने कहा, ‘‘यदि किसी सैन्य ऑफिसर ने कोई गलती की है, एक प्राथमिकी दर्ज की गई है व यह गवर्नमेंट का कर्तव्य है कि उसे तार्किक अंत तक पहुंचाएं। ’’

महबूबा ने कहा, ‘‘हम सेना व अन्य सुरक्षा बलों से कह रहे हैं कि वे अत्यंत संयम बरतें लेकिन यह भी तथ्य है कि पहले जब कोई मुठभेड़ होती थी या यहां तक कि कोई फर्जी मुठभेड़ भी होती थी, गांव खाली हो जाते थे लेकिन अब जब कोई मुठभेड़ प्रारम्भ होती है तो सैकड़ों लोग सुरक्षा बलों पर पथराव में लिप्त हो जाते हैं। ’’

बीजेपी ने की प्राथमिकी वापस लेने की मांग
वहीं पठानिया ने सैन्य कर्मियों के विरूद्ध दर्ज प्राथमिकी को वापस लेने की मांग करते हुए बोला कि मामले में मजिस्ट्रेट जांच का आदेश पहले ही दे दिया गया है व कानून को अपना कार्य करने देना चाहिए। प्रदेश बीजेपी प्रवक्ता वीरेंद्र गुप्ता ने एक बयान में सेना के विरूद्ध ऐसे में प्राथमिकी दर्ज करने को ‘‘दुर्भाग्यपूर्ण’’ बताया जबकि पथराव करने वालों के विरूद्ध ने तो कोई प्राथमिकी दर्ज की गई है न ही कोई जांच का आदेश दिया गया है। उन्होंने बोला कि ऐसा कुछ भी नहीं किया जाना चाहिए जिससे सुरक्षा बलों का मनोबल कम हो। नेशनल कान्फ्रेंस के कार्यकारी अध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने मजिस्ट्रेट जांच का आदेश देने के साथ ही सैन्य कर्मियों के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज करने पर सवाल उठाते हुए बोला कि गुमराह करने वाले इशारा दिए जा रहे हैं।

सेना के पक्ष पर भी गौर किया जाएगा : डीजीपी
जम्मू व कश्मीर पुलिस प्रमुख एस पी वैद ने बोला कि शोपियां मामले में प्राथमिकी दर्ज करना जांच की शुरूआत है व सेना के पक्ष पर भी गौर किया जाएगा। एक संवाददाता सम्मेलन में यह पूछे जाने पर कि क्या सेना का पक्ष भी जांच में शामिल होगा, डीजीपी वैद ने कहा,‘‘ सेना का पक्ष, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान व अपने लोगों को खोने वाले लोगों के बयान भी इसमें शामिल होंगे। ’’ वैद ने कहा, ‘‘ हम सभी तथ्यों व मामले के जमीनी सबूतों को देखेंगे व सेना से पूछताछ की जाएगी। ’’ यद्यपि एक रक्षा प्रवक्ता ने बोला कि सैनिकों ने तब गोलीबारी की जब एक भीड़ ने एक जूनियर कमिशन आफिसर की पीटने व उसकी राइफल छीनने का कोशिश किया।

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Source: Purvanchal media