Russia में चुनाव का पहला Round 18 मार्च को

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सबसे पहले चुनाव से जुड़ी कुछ मुख्य बातें आपको बता देते हैं Russia में राष्ट्रपति पद के चुनाव का पहला Round रविवार यानी 18 मार्च को होगा जिसमें 11 करोड़ मतदाता वोट देंगे इस बार के चुनाव में व्लादिमीर पुतिन के अतिरिक्त 7 अन्य उम्मीदवार हैं दिलचस्प बात ये है, कि अगर पहले Round में किसी उम्मीदवार को पूर्ण बहुमत यानी 50 प्रतिशत से ज़्यादा Votes नहीं मिलते हैं, तो नियमों के मुताबिक, इसके अच्छा तीन हफ्तों के बाद यानी 8 अप्रैल को दूसरे Round की Voting होगी

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Russia में इससे पहले साल 1996 में ऐसी नौबत आई थी, जब राष्ट्रपति चुनने के लिए दूसरे Round की Voting हुई थी  इस बार भी ऐसा होने की आसार बहुत कम है इस बार जो इशारा मिल रहे हैं, उन्हें देखते हुए ऐसा लगता है, कि पहले Round में ही नतीजे आ जाएंगे  व्लादिमीर पुतिन, चौथी बार Russia के राष्ट्रपति बन जाएंगे अब ये देखिए कि ये क्यों  कैसे होगा ?  संसार भले ही इसे बहुत बड़ा चुनाव कह रही हो लेकिन सिक्के का दूसरा पहलू ये है, कि ये चुनाव सिर्फ एक औपचारिकता हैक्योंकि, Russia में सबको पता है, कि पुतिन ही जीतेंगे

तमाम Opinion Polls, नतीजों से पहले ही पुतिन को विजेता घोषित कर चुके हैं  ऐसा बोला जा रहा है, कि चुनावी नतीजों में उन्हें 70 फीसदी से ज़्यादा वोट मिलेंगे Russia में चुनाव का प्रबंधन बहुत ज्यादा कमज़ोर है  इसे Kremlin यानी राष्ट्रपति का ऑफिस ही Manage करता है इसीलिए ये बोला जा रहा है, कि जो 7 प्रत्याशी पुतिन के ख़िलाफ चुनाव में खड़े हुए हैं, वो राष्ट्रपति ऑफिस यानी Kremlin द्वारा उतारे गए Dummy Candidates हैं जो उम्मीदवार पुतिन को चुनौती दे सकते थे, उन्हें चुनाव लड़ने से पहले ही अयोग्य साबित किया जा चुका है

वहां के विपक्षी नेता – एलेक्सी नावाल्नी, पर वहां के Central Election Commission ने पिछले साल प्रतिबंध लगा दिया था कई Experts ये कहते हैं कि उन्हें करप्शन के आरोप में फंसाकर अयोग्य घोषित किया गया था पुतिन के विरोधी कहते हैं, कि Russia में सिर्फ दिखावे का लोकतंत्र है   2012 में वोटिंग के दो घंटे बाद पुतिन को विजेता घोषित कर दिया गया था उस वक्त ये सवाल पूछे गए थे, कि सिर्फ दो घंटे में 11 करोड़ वोटों की गिनती कैसे हो गई?  इसके अतिरिक्त 2015 में उनके विरोधी बोरिस नेम्तसोव की मर्डर कर दी गई थी  इस बार उन्हें मुक़ाबला देने वाले विपक्षी नेता को आयोग्य साबित कर दिया गया

Russia में चुनाव कराने की ज़िम्मेदारी Central Election Commission of the Russian Federation की होती है इस संस्था का गठन साल 1993 में किया गया था ध्यान देने वाली बात ये है, कि इस संस्था के सदस्यों का चयन करने ज़िम्मेदारी वहां के राष्ट्रपति, Lower House  Upper House पर होती है   ये तीनों मिलकर, पांच-पांच सदस्य चुनते हैं  इसके बाद 15 सदस्य आपस में मिलकर ये तय करते हैं, कि इस संस्था का Chairman, Deputy Chairman  Secretary कौन होगा?

हालांकि, एक हकीकत ये भी है, कि Russia में सारी शक्तियां राष्ट्रपति के पास ही होती हैं वहां का राष्ट्रपति ही पीएम को नियुक्त करता है, इसके अतिरिक्त राष्ट्रपति की मंज़ूरी पर ही वहां की संसद, राजनीतिक दलों को पहचान देती है इसका मतलब ये है कि Russia का लोकतंत्र, एक तरह से जुगाड़ वाला लोकतंत्र है उदाहरण के तौर पर अमेरिका में दो राजनीतिक दलों वाली व्यवस्था है लेकिन गवर्नमेंट के कामकाज में विपक्ष का पूरी तरह हस्तक्षेप होता है जबकि, दूसरी तरफ Russia में राष्ट्रपति ही सबकुछ है राष्ट्र की राजनीतिक पार्टियों  विपक्ष पर उसका पूरा नियंत्रण होता है इसीलिए बोला जाता है, कि वहां पर Managed Democracy है

पुतिन साल 2000 से ही कभी राष्ट्रपति तो कभी पीएम के रूप में सत्ता में बने हुए हैं सन 2000 2004 में वो राष्ट्रपति बने   वहां पर कोई भी नेता लगातार दो बार से ज्यादा राष्ट्रपति नहीं रह सकता इसलिए साल 2008 में अपने सहयोगी दिमित्री मेदवेदेव को राष्ट्रपति बनाकर वो खुद पीएम बन गए   इसके बाद 2012 में पुतिन एक बार फिर राष्ट्रपति बने  उन्होंने राष्ट्रपति का कार्यकाल 4 साल से बढ़ाकर 6 साल कर दिया करीब 3 लाख करोड़ रुपए की संपत्ति वाले व्लादिमीर पुतिन, अब चौथी बार चुनावी मैदान में हैं दिलचस्प बात ये भी है, कि इस बार वो अपनी पार्टी United Russia की तरफ से प्रत्याशी नहीं हैं

बल्कि इस बार उन्होंने एक निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने का निर्णय किया है   इसके पीछे ये वजह बताई जा रही है, कि पुतिन, खुद को पार्टी से भी बड़ा दिखाना चाहते हैं Russia में व्लादिमीर पुतिन की छवि किसी हीरो जैसी है  लोग उन्हें एक मज़बूत नेता मानते हैं वहां का मीडिया लंबे समय से  उन्हें एक दबंग नेता के रूप में प्रचारित कर रहा है   इसके अतिरिक्तअमेरिका द्वारा Russia पर लगाए गए प्रतिबंध  अमेरिकी चुनाव में कथित तौर पर Russia के हस्तक्षेप की ख़बरों ने भी व्लादिमीर पुतिन को पहले के मुकाबले बहुत मज़बूत कर दिया है

अब इस चुनाव को हिंदुस्तान  संसार के नज़रिए से Decode करते हैं Experts के मुताबिक, मौजूदा स्थिति में पुतिन का ताकतवर होना, पश्चिमी राष्ट्रों के लिए  हिंदुस्तान के लिए अच्छी ख़बर नहीं है क्योंकि Russia  चाइना की नज़दीकियां बढ़ती जा रही हैं इन दोनों ही राष्ट्रों का एजेंडा पश्चिमी राष्ट्रों  अमेरिका का विरोध करना है इसके अलावा, Russia  पाक के संबंध भी मज़बूत हुए हैं पुतिन के मजबूत होने से Russia  पश्चिमी राष्ट्रों के बीच विवाद की स्थिति पैदा हो सकती है

Russia, अमेरिका से बराबरी करना चाहता है यही वजह है, कि वो यूक्रेन से लेकर सीरिया तक, लगभग हर जगह, अमेरिका को चुनौती दे रहा है इसके अतिरिक्त इन दिनों ब्रिटेन से भी उसके संबंध तनावपूर्ण हो गए हैं शी जिनपिंग की ही तरह, व्लादिमीर पुतिन भी आजीवन सत्ता में बने रहना चाहते हैं  उन्होंने सत्ता के इस अमृत का इंतज़ाम कर लिया है ये एक नया  ख़तरनाक ट्रेंड है

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Source: Purvanchal media