गोरखपुर देवरिया पूर्वांचल समेत पूरा भारत मनाता है इनके गीतों को सुनकर छठ का पावन पर्व, गोरखपुर से इस महान गायिका का है गहरा लगाव:-रच रही हैं प्रतिदिन इतिहास

Viral

इनके गीतों को सुनकर ही गोरखपुर देवरिया पूर्वांचल समेत पूरा भारत मनाता है छठ का पावन पर्व, ऐसी महिला को सलाम

नवरात्रि के पावन अवसर पर मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा की जाती है , गोरखपुर टाइम्स द्वारा भी 9 उन महिलाओं की कहानियां लिख रहा है जो आज की महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत है और कहीं न कहीं एक देवी के समान समाज में उजियारा ला रही हैं।।आज हम बात कर रहे हैं लोक गायिका और प्रतिष्ठित शारदा सिन्हा जी की…

भारतीय सांस्कृतिक परम्परा के सबसे उपेक्षित भाग लोक संगीत को शास्त्रीय अभिव्यक्ति से अलंकृत कर इसे सर्वमान्य बना पुनः स्थापित करने का स्तुत्य कार्य कर भारतीय संगीत के प्रतिनिधियों की अग्रिम पंक्ति में स्वयं को स्थापित कर डॉ श्रीमती शारदा सिन्हा ने श्रोताओं के विभेदों को समाप्त कर उन्होंने जाने -अंजाने लोक संगीत की छीनी हुईं गरिमा को पुनः स्थापित किया एवं समानता प्रदान किया।
डॉ शारदा सिन्हा लगभग चार दशकों से भारतीय लोक संगीत की अस्मिता ,प्रतिष्ठा ,मूल्यों एवं संस्कृति के सुदृढ़ आधारभूमि को गढ़ने ,रचने व् आकार देने का कार्य पूरे संकल्प के साथ करती आ रही हैं ।।
डॉ सिन्हा उत्तर भारत के अपार जनसमूह एवं जनमानस द्वारा भोजपुरी ,मैथिली लोक गीतों के सबसे विश्वसनीय चेहरे के रूप में मानी व् जानी जाती हैं।।इन्होंने लोक संगीत एवं मैथिली के साथ साथ उत्तर भारत की तमाम बोलियों एवं भाषाओं जैसे , भोजपुरी ,मैथिली, मगही , अवधी ,बज्जिका ,अंगिका,नागपुरी एवं छत्तीसगढ़ी का भी बखूबी उपयोग किया है।
सन 1988 में डॉ सिन्हा ने , मॉरीशस के बीसवीं स्वतंत्रता समारोह के अवसर पर भारत के सांस्कृतिक प्रतिनिधिमंडल के रूप में भोजपुरी लोक गीतों की अविस्मरणीय प्रस्तुति दी। अन्तराष्ट्रीय स्तरों पर आयोजित भिन्न भिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का इन्होंने प्रतिनिधित्व किया है।
श्रीमती सिन्हा का जन्म बिहार के सुपौल जिला के हुलास गांव में हुआ है ।
डॉ सिन्हा बॉलीवुड की कई बहुचर्चित फिल्मों में अपनी लोक गीत गायन शैली को पहचान दिलाई है ।इनकी गायन शैली इतनी सुस्पष्ट और मधुर है कि मानो इनके कण्ठ में साक्षात सरस्वती जी का वास हो ।इसलिए इन्हें भोजपुरी की लता मंगेशकर व् स्वर कोकिला नाम से नवाजा गया है।इनके लोक संगीत व् शास्त्रीय गायन प्रतिभा के लिए अनेको बार सम्मानित भी किया गया है।1991 में इन्हें पद्मश्री से भी सम्मानित किया गयाहै।
उत्तर भारत में व्याप्त अनेक सामाजिक कुरीतियों और कुप्रथाओं के विषयो पर इन्होंने लोक गीत गाकर उन्हें उजागर करने का प्रयास किया । दूसरी ओर गीत संगीत में अश्लीलता,द्विअर्थी शब्दों के प्रयोग तथा फूहड़ता के खिलाफ आवाज उठाती रही हैं ।
सांस्कृतिक मूल्यों से भरपूर लोकविधाओ एवं भारतीय साहित्य के प्रसिद्ध कवियों द्वारा रचित गीतों को गाकर डॉ सिन्हा ने समाज को अपनी समृद्धि व् लोक परम्परा का गौरव बोध कराया है ।
डॉ सिन्हा ,”स्वच्छ भारत अभियान “में भारत संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा नवरत्नों मे भी चुनी गई और अपने गीतों के माध्यम से इन्होंने समाज को स्वच्छता के लिए जागरूक करती रही हैं ।।

गोरखपुर टाइम के संपादक सत्य चरण लकी से बात करते हुए डॉक्टर सिन्हा ने कहा कि गोरखपुर से मेरा गहरा लगाव है और यहां मैंने कई सांस्कृतिक कार्यक्रम संपन्न किए हैं संस्कृति के क्षेत्र में गोरखपुर प्रदेश का महत्वपूर्ण जिला है गोरखनाथ मंदिर के पावन धरती गोरखपुर पर जो गोरखपुर टाइम्स द्वारा कार्य हो रहे हैं वह सराहनीय है, यह एक अच्छी पहल है और मेरे लिए यह सौभाग्य की बात है कि मैं गोरखपुर टाइम्स के पाठकों से जुड़ पाई, आप निरंतर यूं ही प्रगति करते रहे ईश्वर से मैं कामना करती हूं।।।

Source: Gorakhpur times