एक साधारण व्यक्तित्व ने अपनी लगन और मेहनत से गोरखपुर को दिए करोड़ो, आज की नारी के लिए हैं आदर्श

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महिला अगर घर को मन्दिर बना सकती है तो वही महिला समाज के कुप्रथाओं और परम्पराओ से ऊपर उठ कर सामाजिक ढाँचे को सुव्यवस्थित रूप में परिवर्तित कर हमारे समाज को नई दशा और दिशा प्रदान कर सकती है। जहाँ कुछ दशक पहले हमारे समाज में स्थिति बहुत ज्यादा अच्छी नही थी वह अपने घर और गृहस्थी तक ही सीमित रही ।वही आज हमारे समाज में महिलाओं को लेकर एक परिप्रेक्ष्य प्रदर्शित होता है आज पुरुष और महिला एक साथ आगे बढ़ रहे हैं ।समाज के नजरिये और सोच में भी महिलाओं को लेकर बदलाव आया है । कवियों लेखकों की कविताओं ,कहानियों और उपन्यासों में उपेक्षित ,दुखियारी आदि रूप में वर्णित की गई महिलाएं आज के परिप्रेक्ष्य में एक अपनी अलग पहचान बनाने को ततपर और क्रियाशील हैं।।
हम बात कर रहे हैं एक ऐसी ही महिला की जो महिला सशक्तिकरण की पर्याय हैं।जो सामाजिक सक्रियता ,क्रियाशीलता व् कार्य कुशलता की उत्कृष्ट उदाहरण स्वरूप निर्दिष्ट हैं ।जी हां हम बात कर रहे है उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले की पूर्व मेयर डॉ सत्या पाण्डेय जी की । इनका जन्म और इनकी शिक्षा -दीक्षा गोरखपुर से ही परिपूर्ण हुई है। इनकी पारिवारिक पृष्टभूमि भी कुछ ऐसा ही रहा है जो इन्हें कुछ अलग करने की प्रेरणा देता रहा है।इनके बड़े पिता- स्व० परशुराम तिवारी जी जोकि आर ०एस०एस० विभाग प्रचारक ,देवरिया से जुड़े थे। डॉ सत्या पांडेयशुरू से ही समाज सेवी रही है इन्होंने 1978 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की सदस्यता ग्रहण की व् वर्ष 1980 में भाजपा की सदस्य बनी । अपने शहर में महिलाओं के स्वावलम्बन हेतु कई अभियान भी चलाया ।इन्होंने क्षेत्रिय महिलाओं के साथ मिलकर शराब बंदी का अभियान भी चलाया जिसमे इन्हें सफलता भी मिली ।बाल मजदूरी पर रोक लगाने के साथ साथ बाल मजदूरी व् भिक्षा मांगने जैसे कुरीतियों पर शासन प्रशासन की मदद से इनपर अंकुश लगाने का सराहनीय कार्य किया ।
क्षेत्रीय प्रभारी( महिला मोर्चा) , पूर्व काउंसलर महिला थाना ,पूर्व अध्यक्ष महिला सर्वोदय मण्डल , गोरखपुर प्रेस क्लब ,गोरखपुर की संरक्षक तथा उत्तर प्रदेश संयोजिका ,उत्तर प्रदेश अपराध निरोधक समिति ,वर्तमान में प्रदेश कार्य समिति सदस्य एवं महिला मोर्चा ,सदस्य, उत्तर प्रदेश जैसी उपलब्धियां हासिल की है।।
डॉ सत्या जी ने अपने कार्य काल में नगर निगम सदन के निर्माण कार्य हेतु 5.00 करोड़ के लागत का प्रस्ताव सदन से पारित कराया ।नदी संरक्षण के अंतर्गत रामगढ़ ताल व् राप्ती नदी में शहर गन्दे पानी जोकि नालों के माध्यम से नदियों में जाते थे के लिए सीवर ट्रीटमेंट प्लांट व् नदियों का सौंदर्य करण करवाया।नगर निगम गोरखपुर में नगरवासियों को सुविधा मुहैय्या कराने के लिए ऑनलाइन व्यवस्था के साथ ही कंप्यूटराइज्ड बिल आदि जारी कराई तथा महानगर के विभिन्न चौराहों का चौड़ीकरण व् सुंदरीकरण कराते हुए महानगर में को भी दुरस्त किया ।जल जमाव से निजात पाने एवं महानगरों के गंदे पानी आसानी से निस्तारित करने हेतु 109 बड़े नालों का निर्माण कार्य पूर्ण किया और जल जमाव की समस्या से निजात दिलाया ।
स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत महानगर के विभिन्न वार्डो में रैली का आयोजन कर एवं मानव श्रृंखला बनाकर कर नगरवासियों को सफाई आदि के सम्बन्ध में जागरूक किया ।
डॉ सत्या जी अपनी घर गृहस्थी के साथ साथ एक साहसी ,कर्मठशील व् दूरद्रष्टा होने के साथ ही समाज से इनका संवेदनात्मक जुड़ाव भी है जो इन्हें सबसे अलग करता है । सुसंस्कृत नागरिक की भांति आप सामाजिक ,राजनितिक व् पारिवारिक पक्षो में सामंजस्य बनाते हुए निरन्तर आगोन्मुख हैं । और समझदारी, जिम्मेदारी ,ईमानदारी व् बहादुरी के साथ अपने कर्तव्यों का पालन कर रही हैं ।।।नवरात्र के शुभ अवसर पर ऐसी महिला को सलाम।

Source: Gorakhpur times