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अगर आप संसद में है तो चिल्लाने का फल मीठा होगा

अगर आपको एक ऐसी जॉब का Offer मिले  जिसमें आपको प्रातः काल 11 बजे Office पहुंचना हो  सिर्फ 6 बजे तक वहां रहना हो  इस दौरान आपका कार्य होगा – कार्यालय में चिल्लाना हंगामा करना  इस कार्य के लिए आपकी सैलरी होगी करीब ढाई लाख रूपये  तो क्या आप ऐसी जॉब करेंगे ज़ाहिर है आप ऐसी जॉब के लिए तुरंत हां  कह देंगे इसे संसार की सबसे सरल तनावरहित जॉब मानकर तुरंत join करना चाहेंगे

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आपके मन में ये सवाल उठ रहा होगा कि संसार में ऐसा कौन सा खुशकिस्मत इंसान है जो ये job कर रहा है ?  इस सवाल का जवाब है  भारतीय संसद के ज़्यादातर सांसद  राष्ट्र के सांसदों का वेतन आज करीब डेढ़ लाख रूपये से बढ़ाकर ढाई लाख रुपये प्रति महीना कर दिया गया है  हमारे शास्त्रों में ये बोला गया है कि मेहनत का फल मीठा होता है लेकिन सांसदो की बढ़ी हुई सैलरी को देखकर लगता है मेहनत न करने का फल भी मीठा हो सकता है

जिस तरह हमारे राष्ट्र के सांसदसंसद सत्र के दौरान कार्य करने के बजाय हंगामा करने में समय व्यतीत करते हैंउससे ये साबित होता है कि हमारे राष्ट्र के नेताओं का फोकस समस्या के निवारण से ज़्यादा  समस्या को लेकर शोर मचाने पर है

ये बात हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि सांसदों की सैलरी को दोगुना कर दिया गया हैऔर अब हर पांच वर्ष में सांसदों के वेतन में बढ़ोतरी की जाएगी  सांसदों को अपना वेतन बढ़वाने का हक है या नहींइस सवाल का DNA टेस्ट हम आगे करेंगेलेकिन उससे पहले आपकी जानकारी के लिए बताते चलें कि सांसदों के वेतन  भत्ते को देखने वाली संयुक्त समिति ने सांसदों की सैलरी में किस तरह के परिवर्तन किये हैं 

सांसदों की वर्तमान बेसिक सैलरी 50 हजार रुपये है जिसे बढ़ाकर 1 लाख रुपये प्रति महीना कर दिया गया है जबकि निर्वाचन एरिया भत्ता 45 हजार रुपये से बढ़ाकर 70 हजार रुपये प्रति महीना हो गया है सांसदों को मिलने वाले कार्यालय से जुड़े खर्च के भत्ते को 45 हजार से बढ़कर  60 हजार रूपये प्रति महीना कर दिया है फर्नीचर के लिए मिलने वाला खर्च 75 हज़ार से बढ़ाकर 1 लाख रुपये कर दिया है  सांसद को ये खर्च हर 5 वर्ष में एक बार मिलता है  इस हिसाब से सांसदों के अकाउंट में हर महीने करीब 1 लाख रूपये बढ़कर आएंगे नए बदलावों को 1 अप्रैल 2018 से लागू कर दिया जाएगा इसके अतिरिक्त पूर्व सांसदों को मिलने वाली पेंशन को 20 हज़ार रूपये से बढ़ाकर 25 हज़ार रूपये प्रति महीना कर दिया गया है

यहां सबसे बड़ा सवाल ये है कि जो सांसद  कार्य न करते हों   हंगामा करके जनहित के कार्यों को रोकते हों  उनकी सैलरी क्यों बढ़ाई जाए ? आपको जानकर हैरानी होगी कि पिछले कई सालों से हमारी संसद में कई बिल अटके हुए हैं  सांसदों के हंगामे  शोर-गुल के बीच ये बिल, संसद में पास नहीं हो पाए हैं लेकिन सैलरी बढ़वाने वाले बिल को पास करवाने में ज़रा भी वक़्त नहीं लगा इस बिल का किसी ने विरोध नहीं किया इस पर किसी ने सदन से Walk Out नहीं किया  न ही सदन के बाहर जाकर धरना प्रदर्शन किया  क्योंकि अपने बैंक अकाउंट में आता हुआ पैसा किसी को बुरा नहीं लगता वैसे आपकी जानकारी के लिए बताते चलें कि पिछली बार सांसदों की सैलरी साल 2010 में बढ़ी थी  और तब सैलरी को बिना किसी विरोध के सीधे तीन गुना कर दिया गया था

सांसदों को वेतन  भत्ते के अतिरिक्त कई दूसरी सुविधाएं भी मिलती हैं

हर सांसद को प्रतिवर्ष जल बोर्ड की तरफ से चार हज़ार किलोलीटर पानी मुफ्त मिलता है

सांसदों को प्रतिवर्ष 50 हजार यूनिट बिजली मुफ्त मिलती है

सोफा कवर  पर्दे धोने के लिए हर तीन महीने में 60 हजार रुपये बतौर Laundry Expense मिलते हैं

तीन टेलीफोन मिलते हैं  हर फोन पर प्रतिवर्ष 50 हज़ार लोकल कॉल्स फ्री होती हैं

हर सांसद अपनी पत्नी या attendant के साथ साल में 34 बार हवाई यात्रा कर सकता है 

इसके लिए उसे हवाई टिकट की मूल्य का 125 प्रतिशत भुगतान गवर्नमेंट की तरफ से किया जाता है

ट्रेन में सांसद  AC First Class में परिवार के साथ मुफ्त यात्रा कर सकता है

सांसद को सड़क मार्ग से यात्रा करने पर 16 रुपए ‍प्रति किलोमीटर के हिसाब से यात्रा भत्ता भी मिलता है 

यानी ये सिर्फ कहने की बात है कि पॉलिटिक्स आम जनता की सेवा  भलाई का कार्य होता हैअसल में सांसद होनासुविधाओं से मालामाल होने की गारंटी है   इसमें जनता के लिए कार्य करने की समय पर सारे बिल पास करवाने की कोई बाध्यता भी नहीं है 

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Source: Purvanchal media