गोरखपुर के बहादुर की कहानी आपको भी झखझोर देगी, पर इसकी खुद्दारी पर आपको भी होगा गर्व

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गोरखपुर शहर आज अपने आप में एक वैश्विक पटल पर उभरते शहर के रूप में स्थापित हो चुका है गोरखपुर वासी प्रत्येक क्षेत्र कुशल कार्य करते हुए गोरखनाथ महाराज की पावन भूमि को गौरवान्वित कर  रहे हैं।।

परंतु गोरखपुर की पावन भूमि पर एक बहादुर भी रहता है जो कड़ी मेहनत मशक्कत करने के बाद भी दो जून का भोजन बमुश्किल पा रहा है, हम बात कर रहे हैं छात्रसंघ चौराहे पर रिक्शाचालक बहादुर की जोकि बिछिया से लगभग 70 से 75 वर्ष की उम्र में छात्रसंघ चौराहे पर आता है और  वहां से राहगीरों को उनके गंतव्य स्थल तक छोड़ता है।।

बहादुर अपने बारे में बताता है कि साहब कभी ₹10 ₹20 तो कभी ₹200 तक प्रतिदिन कमा लेता हूं घर में मात्र मेरी एक बुढ़िया (पत्नी)है जो पैर से अचलस्त है, इकलौता जवान बेटा प्रेम के चक्कर में आकर जहर खा कर मर गया अब हमारा कोई सहारा नहीं है और मात्र रिक्शा चलाकर इस उम्र में किसी तरह पेट पाल रहे हैं, घुटनों में भी दर्द होता है पर क्या करें भीख मांगने से अच्छा है की मेहनत मजदूरी कर पेट पाला जाए।।।

आज भी छात्रसंघ  संघ के आसपास आप बहादुर को देख सकते हैं,और जरूर कुछ मदद कर सकते हैं।।

Source: Gorakhpur times