गोरखपुर समेत कुशीनगर और मगहर रचने जा रहे हैं इतिहास आप भी जरूर इसमें सम्मिलित हो,जुड़िए अपनी सांस्कृतिक विरासत से

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‘कुशीनगर से मगहर ‘एक सांस्कृतिक यात्रा

पूर्वांचल की मिट्टी से जुड़ी दो विभूतियां बुद्ध और कबीर की शिक्षाओं की आज पूरे विश्व को जरूरत है। प्रेम , समरसता पर आधारित उनकी बातों को फिर से स्मरण करने के लिए कुशीनगर , मगहर , गोरखपुर में ‘ बुद्ध से कबीर ‘ यात्रा का आयोजन 5, 6, 7 अप्रैल को एस एम आर ट्रस्ट द्वारा किया जा रहा है। इसमें देश के हर जगह के लोगों के साथ स्थानीय लोग भी शिरकत करेंगे। इस यात्रा के संदर्भ में और जानकारी श्री विनोद कुमार मल्ल जी ने हमारे संवाददाता को दी। विनोद कुमार मल्ल जी आई पी एस हैं। वर्तमान में गुजरात में पोस्टेड हैं। गोरखपुर होमटाउन होने के नाते पूर्वांचल की संस्कृति से उन्हें विशेष लगाव है। यह यात्रा उसी सांस्कृतिक मोह की परिणिति है।

ये कौन आयोजित कर रहा और क्यों महसूस हुआ कि इस तरह की यात्रा की जरूरत है ?
आप जानते हैं कि भारत वर्ष अनंत काल से एक शांतिप्रिय देश रहा है सब लोग भाईचारे, प्रेम और बंधुत्व के साथ एक दूसरे की इज्जत करते हुए साथ में रहते हैं ।लेकिन आज के हालात में कभी-कभी लगता है कि हम उस रास्ते से भटक गए हैं। समाज में आज जातिवाद, संप्रदायवाद ,हिंसा और नकारात्मकता कहीं-न-कहीं दिखती रहती है और ऐसे में बुद्ध और कबीर के विचारों और उनकी सोच से अधिक प्रभावशाली कोई भी चीज समाज के लिए प्रासंगिक नहीं हो सकती । इस यात्रा का आयोजन एस एम आर ट्रस्ट ने किया है जो कि गोरखपुर और आसपास के इलाकों में कार्यरत है और इससे पहले वे लोग कई सारे सामाजिक सुधार के काम करते आए हैं।

पूर्वांचल के एक बड़े प्रतीक बाबा गोरखनाथ भी हैं आपने अपनी यात्रा में उन्हें क्यों नही जोड़ा ?
जहां तक पूर्वांचल का सवाल है यहां पर अपार ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर भरी पड़ी है ।लेकिन हो यह रहा है कि हम अपनी महान परंपरा को छोड़कर दुनिया भर में ढूंढ रहे हैं और जो अपनी धरोहर है उसको हम भूलते जा रहे हैं। इस परिपेक्ष्य में हमने सबसे पहले बुद्ध और कबीर को लिया। भविष्य में और महान हस्तियों को हम समाज के साथ जोड़कर उनके विचारों को आगे बढ़ाने की कोशिश करेंगे। विशेषकर बुद्ध का जहां तक सवाल है आप जानते हैं बुद्ध का दर्शन दुनिया भर में पालन किया जाता है उनकी उदारवादी सोच ने दुनिया भर में प्रभाव पैदा किया है। इसका मतलब कतई नहीं है कि दूसरे जो महापुरुष रहे हैं वे हमारे मानसिक धरातल पर नहीं है। हम भविष्य में कहीं न कहीं किसी न किसी स्तर पर उनसे जरूर जुड़ेंगे।।

आपकी यात्रा में किस तरह के लोग शामिल हो रहे हैं ?
इस यात्रा में समाज के हर वर्ग के लोग जुड़ रहे हैं ।सभी जातियों और संप्रदायों के लोग, भारतवर्ष के अलग-अलग हिस्सों से लोग यात्रा में शामिल होने आ रहे हैं। बहुत सारे लोग हैं जो नहीं आ पा रहे हैं लेकिन जिन्होंने जुड़ने की इच्छा व्यक्त की है ।इस प्रयास को एक ऐतिहासिक प्रयास के रूप में सर्वत्र भारत में देखा जा रहा है।।
क्या महज एक यात्रा से आपको लगता है आपका उद्देश्य पूरा हो जाएगा या आगे कुछ और इस तरह का जारी रखने का इरादा है?
जहां तक उद्देश्य के पूरा होने का सवाल है मेरा यह मानना है कि हमारा यह पहला प्रयास है। आज समाज के सामने गरीबी, बेरोजगारी, वर्ग विग्रह, जात पात , संप्रदायवाद और सामाजिक ध्रुवीकरण की समस्याये हैं। उन सारी समस्याओं का एक बार में कोई हल ढूंढ पाना मुश्किल है ।जरूरत इस बात की है कि हम अपनी शक्ति पहचाने, हमारे समाज में सदियों से जो उदारवादी सोच रही है उसे पहचान कर सबके साथ जुड़े। सबके प्रयास से और सबको जोड़कर प्रेम और भाईचारे के साथ हम समाज को आगे बढ़ायें। इससे समाज में जो नकारात्मकता है उसको हम कम कर पाएंगे। यह प्रयास हमें आगे भी करते रहना पड़ेगा जिससे हम अपने समाज में विविधतावाद, बहु-सांस्कृतिक वाद और भाई चारे के साथ हम भारत को मजबूत बना सकें।

Source: Gorakhpur times