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प्रेमी के पक्ष में दिये बयान को नजरअंदाज कर अब नहीं दाखिल हो सकेंगें आरोप पत्र

लखनऊ : प्रेमी के साथ मर्जी से भागकर शादी रचाने का बयान देने के बाद भी पुलिस द्वारा विवेचना के बाद प्रेमी के खिलाफ बिना आधार आरोपपत्र दाखिल करने के पुलिसिया चलन पर इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने कड़ी नाराजगी जतायी है।
जस्टिस डी के उपाध्याय व जस्टिस डी के सिंह की बेंच ने कहा कि जब प्रेमिका बालिग है, और वह स्वयं कलम बंद बयान दे रही है कि वह प्रेमी के साथ अपनी मर्जी से शादी करने के लिए भागकर गयी थी, तो किस सबूत के आधार पर पुलिस आरेापपत्र तैयार कर देती है।
कोर्ट के संज्ञान में आने पर कि ऐसा अभियेाजन निदेशालय के अफसरेां की कानूनी राय पर हो रहा है तो केार्ट ने अभियेाजन निदेशक को ही तलब कर लिया । निदेशक ने कोर्ट के सख्त तेवर के चलते आश्वासन दिया कि आगे से ऐसा नहीं होगा और इस विषय पर जिलों में तैनात अपर निदेशकों को शिक्षित और संवेदनशील बनाया जायेगा। निदेशक ने कहा कि इसके लिये वर्कशाप और सेमिनार आयेाजित किया जायेगा और अभियेाजन निदेशालय के अधिकारियेां केा न केवल कानून के सही पहलू की जानकारी दी जायेगी अपितु उन्हें ऐसे मसलेां के सामाजिक सरेाकारों को भी समझाया जायेगा।
कोर्ट ने यह आदेश प्रेमिका के पति की ओर से उसे उसके माता पिता के कथित अवैध चंगुल से छुड़ाने की मांग को लेकर दायर एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवायी करते हुए पारित किया। उन्नाव निवासी प्रेमी का कहना था कि उसकी प्रेमिका बालिक है। उसने उससे लव मैरिज की है। परंतु प्रेमिका के मां बाप शादी से खुश नही थे जिसके चलते उन्होंने उसके खिलाफ प्राथमिकी लिखा दी कि वह उनकी पुत्री को जबरन भगा ले गया है। पुलिस ने उसकी प्रेमिका का बयान और फिर अदालत में कलम बयान दर्ज कराया जिसमें उसने उसके साथ अपनी मर्जी से जाकर शादी करने की बात कही।
प्रेमिका का कहना था कि उसकी प्रेमिका जिससे उसने शादी कर ली है उसे उसे लखनउ के वूमन शेल्टर होम में रखा गया है।  इस पर केार्ट ने पूर्व आदेश कर होम के सुपरिन्टिडेंट को उक्त महिला केा पेश करने का आदेश दिया था । हाई कोर्ट में भी प्रेमिका ने अपनी मर्जी से प्रेमी से विवाह करने की बात कही है। हांलाकि उसने कहा कि अभी वह अपनी मां के साथ जाना चाहती है जिस पर कोर्ट ने उसे वहीं से अपनी मां के साथ जाने की इजाजत दे दी थी।
सुनवायी के दौरान आया कि विवेचक ने प्रेमी के खिलाफ आरेापपत्र लगा दिया है। इस पर कोर्ट केा हैरानी हुई कि जब प्रेमिका स्वयं प्रेमी के पक्ष में बयान दे रही है तो पुलिस किस आधार पर आरोपपत्र लगा रही है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे प्रकरण आये दिन उसके सामने आ रहे है। इस पर कोर्ट के पूंछने पर सरकारी वकील ने बताया कि ऐसा  जिलों में तैनात अपर अभियेाजन अधिकारियेां की राय पर हो रहा है। कोर्ट ने इस पर नाराजगती जताते हुए अभियेाजन निदेशक को तलब किया । जब निदेशक को वास्तु स्थिति का पता चला तो उन्हेांने अफसोस जताया और कहा कि आगे से ऐसा  नही होगा।
परिस्थितियेां पर गौर कर कोर्ट ने कहा कि विवेचक इस मामलें में निचली अदालत से अग्रिम विवेचना का आदेश प्राप्त कर प्रेमिका के बयान के आधार पर विवेचना पूर्ण करें।

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Source: Hindi Newstrack

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