मालदीव ने म्यांमार से तोड़े सारे कारोबारी संबंध..

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मालदीव सरकार ने भी म्यांमार में रोहिंग्या मुस्लिमों पर हो रहे अत्याचारों कि निंदा की है जिसकी वजह से मालदीव सरकार ने म्यांमार के साथ सभी व्यापार संबंधों को समाप्त करने का फैसला किया है. म्यांमार के पश्चिमी रखाइन प्रांत में बड़े पैमाने पर रहने वाली रोहिंग्या मुस्लिम जाति हैं पिछले दस दिनों में करीबन 90,000 रोहिंग्या मुस्लिम म्यांमार से पलायन कर चुके है और 400 से ज्यादा रोहिंग्या मुस्लिमों की हत्या हो चुकी हैं यह आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है.

रोहिंग्या मुस्लिम

मालदीव सरकार ने अपने जारी किए बयान में कहा कि मालदीव सरकार ने म्यांमार के साथ सभी व्यापारिक संबंधों को समाप्त करने फैसला किया है, जब तक सरकार रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ किए जा रहे अत्याचारों को रोकने के लिए उपाय नहीं करती है. पिछले कुछ समय में अल्पसंख्यक मुस्लिम जाति रोहिंग्या म्यांमार सरकार के अत्याचारों को झेल रही है संयुक्त राष्ट्र ने भी दस्तावेजों में म्यांमार में हो रहे अत्याचारों को मानवाधिकारों के खिलाफ बताया हैं.

मालदीव सरकार चाहती है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस विषय पर तेजी से एक्शन लें, जिससे कि रोहिंग्या मुस्लिमों पर हो रहे अत्याचार बंद हो. साथ ही मालदीव सरकार म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन की जांच करने के लिए संयुक्त राष्ट्र महासचिव और संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद से अनुरोध करती हैं.

म्यांमार में रहने वाले रोहिंग्या मुस्लिमों का कहना है कि कई दशकों से केवल हमारे समुदाय का उत्पीड़न होता रहा है ना ही हमें अभी तक म्यांमार की नागरिकता दी गई है हालांकि पहले भी रोहिंग्या मुस्लिमों और बहुसंख्यक बौद्ध लोगों के बीच गहरे अविश्वास के कारण रखाइन प्रांत में पहले भी खूनी संघर्ष हो चुका है.

दरअसल म्यांमार में पिछले शुक्रवार को रोहिंग्यों के उग्रवादियों ने सीमावर्ती पदों पर समन्वित हमले किए, जिसमें म्यांमार सरकार के 12 सुरक्षा अधिकारी मारे गए थे. तभी से सरकार ने सभी रोहिंग्यों को आतंकवादी घोषित कर देश से बरखास्त किया. जिसके बाद म्यांमार की सेना ने उन पर फायरिंग की, जिस फायरिंग में कई महिलाएं, बच्चे और बूढ़े भी मारे गए. म्यांमार सरकार ने सभी रोहिंग्यों को बिना समय दिए देश छोड़ने को कह दिया. अचानक से हजारों लोगों को बेघर कर दिया.

 म्यांमार रिफ्यूजियों की आप-बीती

म्यांमार रिफ्यूजी हमीदा बेगम ने बताया कि वो हमे पीट रहे थे गोली से मार रहे थे, बहुत से लोगो कि जाने भी जा रही है. उस समय हमारे पास केवल अपनी जान बचा कर भागने के आलावा कोई और दूसरा तरीका नहीं था कई महिलाओं और लड़कियों से मार-पीट रेप करने के बाद हत्या भी कर रहे हैं मेरे पति म्यांमार के एक आम मजदूर है हम किसी तरह से 2 वक़्त कि रोटी जूटा पाते थे. अब हमारे पास यहां नरहने को छत है न खाने को खाना हैं.

रिफ्यूजी मोहम्मद हारून ने बताया कि म्यांमार में बहुत से कॉम हैं लेकिन सरकार को केवल रोहिंग्यों कॉम ही नहीं पसंद हैं. रोहिंग्यों जाती म्यांमार कि अल्पसंख्यक मुस्लिम जाती हैं हम यहां पर कई सालों से रह रहे थे लेकिन एक पल में उन्होंने हमारा सब कुछ छीन लिया अगर हम अपने घरों में रहते तब वो हमारे घरों में आग लगा देते.

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Source: Purvanchal media
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