गड़बड़झाला: कर्जदार किसानों के साथ बैंकों का बड़ा खेल, फंस गए 10 लाख गरीब किसान

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लखनऊ: यूपी की बीजेपी सरकार ने किसानों की कर्जमाफी के लिए 36 हजार करोड़ रुपए की राशि जारी की। 66 लाख किसानों की कर्जमाफी के लिए जारी यह धनराशि अभी पूरा खर्च नहीं हुआ है, जबकि कर्जदार किसान अभी भी कर्जदार ही बनें हैं। ऐसा बैंकों में हुए खेल की वजह से हुआ। आप भी जानें क्या है यह पूरा माजरा।

पुराना कर्ज, नया खाता
जानकारी के अनुसार, बैंकों ने कर्जदार किसानों के वे खाते जिससे कर्ज लिया गया था, उसे बंद करके उनका नया खाता खोल दिया। इतना ही नहीं किसानों के पुराने कर्ज को नए खाते पर चढ़ाकर उन्हें कर्जमाफी के लाभ से वंचित कर दिया। प्रदेश के सरकारी पोर्टल पर करीब 10 लाख किसानों की ऐसी शिकायतें दर्ज हैं, जिसके लिए सरकार ने जिला स्तर पर समिति गठित कर मामले की जांच के आदेश दिए हैं। लेकिन अब इन किसानों का कर्ज माफ़ होगा या नहीं यह समिति के निर्णय पर निर्भर करता है।

अभी बची 15 हजार करोड़ की राशि
इस तरह के दोहरे खातों की छंटनी करने के बाद भी सरकार ने माना था कि लगभग 66 लाख किसानों का कर्ज माफ किया जाएगा। इसके लिए 36 हजार करोड़ रुपए का बजट आवंटित हुआ। अब तक तीन चरणों में करीब 34 लाख किसानों का 21 हजार करोड़ रुपए का कर्ज माफ हो सका है। जबकि सरकारी आंकड़ों में मार्च तक कर्जमाफी की करीब 15 हजार करोड़ रुपए की धनराशि बची हुई है।

एनपीए के बाद भी चढ़ाया कर्ज
नियमानुसार एनपीए हो चुके कर्ज को दुबारा खाते पर नहीं चढ़ाया जाता। लेकिन बैंकों ने यहीं पर खेल किया है। सूत्रों की मानें, तो बैंकों ने एनपीए बताकर किसानों का खाता बंद किया। उसके बाद नया केसीसी खाता खोलकर उस पर पुराना कर्ज चढ़ा दिया।

विपक्ष सरकार को घेरने की तैयारी में 
विपक्ष भी अब इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी कर रहा है। जबकि बीजेपी प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने बताया, ‘किसानों की सभी समस्यायों को प्राथमिकता के तौर पर हल किया जाएगा और बैंकों की गड़बड़ी है तो उसे दूर किया जाएगा।’

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Source: Hindi Newstrack