अजब-गजब: यहां लगती है हनुमान जी की ओपीडी– News18 Hindi

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हमारे देश में आस्था के भी अजीब रंग हैं. लोगों की मान्यता देखकर मुंह से बस एक ही बात निकली है OMG! अजब-गजब है मेरा इंडिया. आस्था से जुड़ी कुछ ऐसी ही कहानी है मध्य प्रदेश के कटनी जिले के एक मंदिर की.

जी हां, ये ऐसा अनोखे मंदिर है, जहां राम का मंत्र फूंक कर, भक्ति की जड़ी-बूटी से भक्तों की टूटी हड्डियों को जोड़ा जाता है. इस मंदिर की मान्यता ऐसी है कि प्रदेश ही नहीं देश के अलग-अलग हिस्सों से संकट मोचक हनुमान मंदिर में टूटे हुए पैरों से आते हैं और ठीक होकर अपने पैरों पर वापस लौट जाते हैं.

कटनी जिले के छोटे से गांव मोहास के इस संकट मोचन हनुमान मंदिर के परिसर में यूं तो रोज ही भक्तों की आवाजाही लगी रहती है लेकिन मंगलवार और शनिवार के दिन भक्तों की अच्छी भीड़ लगती है. मंगलवार और शनिवार को यहां लगती है हनुमान जी की ओपीडी, जिसमें प्रदेश और देश के अलग अलग हिस्सों से भक्त अपनी टूटी हड्डी जुड़वाने के लिए हनुमान जी के दरबार में जुटते हैं.

इन दोनों दिनों में मंदिर परिसर में जहां देखिए टूटी हड्डियों का दर्द लिए लोगों की लंबी कतारों में लगे दिखाई देते हैं. इस मंदिर में टूटी हड्डियों का ईलाज सरमन लाल पटेल नामक पंडा करते हैं. वे अपने हाथों से भक्तों को दवा खिलाते हैं. लेकिन दवा के साथ-साथ ये मान्यता है कि उनकी दवा का असर उन्हीं लोगों पर होता है, जो राम नाम का जाप तन और मन से जाप करते हैं. यानी बूटी की डोज से ज्यादा जरूरी है भक्ति की खुद की आस्था और विश्वास.

इसी वजह से भक्तों को बूटी खाने से पहले दालान में बैठकर घंटो राम का नाम जपना पड़ता है. जानकारी के मुताबिक यहां बहुत पहले हनुमान जी की एक छोटी सी मढ़िया हुआ करती थी, उस समय से भक्त अपनी टूटी हड्डियों का ईलाज करवाने यहां आते थे और मंदिर के पंडे ही इन्हें बूटी दिया करते थे.

धीरे-धीरे समय के साथ जब इस मंदिर के चमत्कार के किस्से कटनी से बाहर फैलने लगे तो भक्तों ने मंढिया की जगह मंदिर बनवाया और आस्था के इसी विस्तार के साथ भक्तों की भीड़ भी बढ़ती चली गई.

हालांकि मेडिकल साइंस के मुताबिक भक्तों को यहां दी जाने वाली बूटी असल में आयुर्वेदिक जड़ी है. इसके साथ ही आस्था से जुड़े मनोविज्ञान के कारण भक्त खुद को स्वस्थ महसूस करते हैं. इसमें दो राय नहीं कि इस तरह के प्रयोग को अंध-विश्वास के दायरे में खड़ा किया जा सकता है, लेकिन भक्तों की भीड़, उनकी आस्था और विश्वास के कारण अनोखा रंग भी देते हैं.

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Source: Gorakhpur times