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BJP ने ढूंढी काट, 17 अति पिछड़ी जातियों को SC में शामिल करने की तैयारी

लखनऊ: यूपी में समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए बने गठजोड़ की काट के लिए अब बीजेपी की योगी आदित्यनाथ सरकार अनुसूचित जातियों की श्रेणी में 17 अति पिछड़ी जातियों को शामिल करने की तैयारी में है। ये 17 अति पिछड़ी जातियां राजभर, निषाद, प्रजापति, मल्लाह, कहर, कश्यप, कुम्हार, धीमर, बिंड, भर, केवट, धीवर, बाथम, मछुआ, मांझी, तुरहा और गौर हैं। राज्य सरकार ने इसका प्रस्ताव तैयार कर लिया है जिसे केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।

सपा-बसपा के गठबंधन के प्रभाव को देखते हुए बीजेपी अब अति दलित और अति पिछड़े वर्ग को साधने की कोशिशों में जुटी है। बीजेपी ने अनुसूचित जातियों को पदोन्नति में भी आरक्षण देने का वादा किया है। जातीय गोलबंदी की वजह से एसपी प्रत्याशी ने गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीट के उपचुनाव में जीत हासिल की थी। बीजेपी की नजर अब सोशल इंजिनियरिंग के जरिए दोनों पार्टियों के वोट बैंक में सेंध लगाने पर है।

बीजेपी अंकगणित को नए सिरे से पेश करने में जुटी
आरक्षण के सवाल पर सपा और बसपा, बीजेपी को घेरती आई है। गोरखपुर-फूलपुर उपचुनाव में मिली हार के बाद बीजेपी अब अगले चुनाव के लिए जातीय अंकगणित को नए सिरे से पेश करने में जुटी है। सीएम योगी आदित्यनाथ पहले ही अति पिछड़ी और अति दलित जातियों को आरक्षण दायरे में लाने के लिए विधानसभा में ऐलान कर चुके हैं लेकिन यह पहली बार नहीं है जब इस तरह का प्रस्ताव केंद्र को भेजा जा रहा हो।

बीते 18 सालों में हो चुके हैं ऐसे कई प्रयास
पिछले 18 वर्षों में इस तरह के तीन प्रयास हो चुके हैं लेकिन सभी विफल रहे। इससे पहले मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सरकार और 2007 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती भी इसी तरह का प्रस्ताव भेज चुकी हैं। यही नहीं 2001 में तत्कालीन सीएम राजनाथ सिंह के नेतृत्व में बीजेपी सरकार ने भी कुछ इसी तरह का कदम उठाया था और हुकुम सिंह कमिटी भी गठित की थी जिसके तहत अति दलित और अति पिछड़ों के लिए अलग आरक्षण की मांग की गई थी। इसे हाईकोर्ट में भी चुनौती दी गई थी।

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Source: Hindi Newstrack

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