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दुनिया को अब एहसास हो गया है कि कोई आतंकवादी अच्छा नहीं : रक्षा मंत्री

बीजिंग : भारतीय रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को यहां शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के सदस्यों से आतंकवाद के प्रति शून्य सहिष्णुता की नीति अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह शांतिपूर्ण समाज के लिए सबसे बड़ा खतरा है। भारतीय रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, एससीओ के रक्षा मंत्रियों की बैठक में सीतारमण ने यहां कहा कि आतंकवाद विकास की आकांक्षाओं को पटरी से उतारता है और देश व इसकी सीमा से बाहर लगातार अस्थिरता पैदा करता है।

उन्होंने सदस्य देशों से इस पर नजदीक से समन्वय बनाने का आह्वान किया। भारत एससीओ के रक्षा मंत्रियों की बैठक में पहली बार भाग ले रहा है।

एससीओ एक यूरेशियाई अंतर-सरकारी संगठन है, जिसका गठन 2001 में शंघाई में कजाकिस्तान, चीन, किर्गिस्तान, रूस व उज्बेकिस्तान द्वारा किया गया था।

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भारत के साथ पाकिस्तान को बीते साल जून में कजाकिस्तान के अस्ताना में एससीओ शिखर सम्मेलन में पूर्ण सदस्यता का दर्जा प्रदान किया गया था।

अपने भाषण में सीतारमण ने तर्क दिया कि राजनीतिक सुविधा के लिए आतंकवादी समूहों या संगठनों की अनुपस्थिति का तर्क ज्यादा समय तक बर्दाश्त नहीं होगा, चाहे यह आतंकवादी समूह या संगठन आतंकवाद का समर्थन सामग्री या किसी भी तरह से करते हो।

उन्होंने कहा कि दुनिया को अब एहसास हो गया है कि कोई आतंकवादी अच्छा नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत एससीओ के क्षेत्रीय आतंकवाद रोधी ढांचे के साथ दृढ़ता से जुड़ाव जारी रखेगा।

इस संदर्भ में उन्होंने एससीओ सदस्य देशों से स्थिर, सुरक्षित व शांतिपूर्ण अफगानिस्तान की दिशा में कार्य करने का आह्वान किया।

सीतारमण ने कहा, “एससीओ को अफगानिस्तान में आतंकवाद के खतरे की दिशा में एक समझौते से परे दृष्टिकोण अपनाना चाहिए, क्योंकि यह क्षेत्र में शांति व समृद्धि को बनाए रखने के लिए जरूरी है।”

उन्होंने कहा, “भारत अफगानिस्तान को स्थिरता हासिल करने और देश की अर्थव्यवस्था और राजनीति के पुनर्निर्माण में सहायता के लिए कुछ भी करने को बचनबद्ध है।”

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इसमें क्षमता निर्माण व अफगान राष्ट्रीय सुरक्षा बलों की क्षमताओं को बढ़ाने में सहयोग शामिल है। ऐसा करने में भारत अफगानिस्तान सरकार की निधि संबंधी आवश्यकताओं व अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के साझा उद्देश्यों के अनुसार काम करेगा।

सीतारमण ने भारत के यूरेशियाई क्षेत्र की सीमा के साथ व्यापक साझेदारी विकसित करने में भी रुचि जताई।

रक्षामंत्री ने कहा कि भारत एससीओ भागीदारों के साथ इस क्षेत्र के देशों के साथ पुराने आत्मीय संबंधों को सक्रिय व पुनर्जीवित करने का काम करेगा।

उन्होंने आर्थिक, व्यापार व सांस्कृतिक सहयोग के साथ-साथ रक्षा व सुरक्षा के आपसी लाभ के हितों पर मजबूत वार्ता व ठोस शुरुआत के साथ भविष्य की तरफ देखने बात कही।

उन्होंने कहा, “भारत एससीओ ढांचे के तहत रक्षा सहयोग से जुड़े सभी मुद्दों पर खुले दिमाग के साथ व सकारात्मक दृष्टिकोण से जुड़ेगा।”

उन्होंने कहा कि भारत ने रक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण सहयोग के लिए एससीओ के रक्षा मंत्रियों के तहत विशेषज्ञ कार्य समूह (ईडब्ल्यूजी) तंत्र की स्थापना का निर्णय लिया है।

सीतारमण ने कहा, “एससीओ ढांचे के रक्षा सहयोग के उद्देश्यों के लिए और हमारी साझा जरूरतों को अच्छे से पूरा करने के लिए ईडब्ल्यूजी तंत्र का कैसे बेहतरीन विकास किया जा सकता है, इस पर आगे चर्चा की जरूरत है।”

उन्होंने कहा, “भारत ने पहले ही रक्षा वचनबद्धता को आगे बढ़ाने के लिए ढांचे के तहत व्यावहारिक कदम उठाए हैं। यह हमारी मंत्रिस्तरीय बैठक की पहली उपस्थिति में भी दिखाई देता है और भारतीय सेना बैंड की फैनफेयर फॉर पीस मिलिट्री टैटू पर भागीदारी में भी दिखता है।”

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भारतीय रक्षामंत्री ने यह भी कहा कि उनका देश एससीओ के शांति मिशन व संयुक्त युद्धाभ्यास में भाग लेगा। युद्धाभ्यास इस साल के अंत में रूस में आयोजित हो रहा है।

आपसी सलाह व लाभ की साझेदारी के जरिए क्षेत्रीय परिवहन व संचार नेटवर्क में सुधार को महत्व देते हुए सीतारमण ने कहा कि इससे भौतिक व डिजिटल संपर्क का नेटवर्क बनाया जा सकता है, जो रूस के उत्तरी क्षेत्र से हिंद महासागर के तट तक फैला हो सकता है।

उन्होंने इस दिशा में अंतर्राष्ट्रीय उत्तर दक्षिण परिवहन गलियारे को एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

हालांकि, उन्होंने कहा कि यह भी जरूरी है कि इस तरह की शुरुआत में सभी देशों की संप्रभुता व क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाए।

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Source: Hindi Newstrack

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