पाकिस्तान से भारत आए असुमल हरपलानी की आसाराम बापू बनने की कहानी पूरी फिल्मी है

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नाबालिग बच्ची से रेप के मामले में आसाराम पर आज फैसला सुनाया जायेगा. आज जोधपुर कोर्ट आसाराम पर अपना फैसला सुनाएगी. आसाराम पर फैसला सुनाने के लिए जोधपुर सेंट्रल जेल में ही विशेष अदालत का इंतजाम किया गया है. फैसले के मद्देनजर जोधपुर में सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद की गई है. पुलिस और स्थानीय प्रशासन हर पल हालात पर पैनी नजर रख रहा है. जोधपुर में धारा 144 लागू कर दी गई है.

आसाराम की आसाराम बापू बनने की कहानी बहुत ही फ़िल्मी है. आसाराम का मूल नाम असुमल थाउमल हरपलानी है. आसाराम का परिवार मूलतः सिंध, पाकिस्तान के जाम नवाज अली तहसील का रहनेवाला था. जब देश आजाद हुआ और भारत-पाकिस्तान दो मुल्क बने तो उसी दौरान आसाराम का परिवार अहमदाबाद में आकर बस गया था. आसाराम के पिता लकड़ी और कोयले के कारोबारी थे.

आसाराम की ऑटोबायोग्राफी के मुताबिक, वो सिर्फ तीसरी क्लास तक ही पढ़ा. पिता के निधन के बाद कारोबार संभाला. हालांकि, इस काम में मन नहीं लगा. साठ के दशक में उन्होंने लीलाशाह को अपना आध्यात्मिक गुरु बनाया. बाद में लीलाशाह ने ही असुमल का नाम आसाराम रखा.

1972 में आसाराम ने अहमदाबाद से लगभग 10 किलोमीटर दूर मुटेरा कस्बे में साबरमती नदी के किनारे अपनी पहली कुटिया बनाई.इस तरह आसाराम का आध्यात्मिक प्रोजेक्ट धीरे- धीरे गुजरात के अन्य शहरों से होता हुआ देश के अलग-अलग राज्यों में फ़ैल गया. आसाराम की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार आज दुनिया भर में उनके चार करोड़ अनुयायी हैं.

आसाराम के बढ़ते भक्तों को देखते हुए राजनेताओं ने वोटबैंक के लिए संपर्क साधना शुरू कर दिया. 1990 से लेकर 2000 के दशक तक उनके भक्तों की सूची में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के साथ-साथ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लालकृष्ण आडवाणी और नितिन गडकरी जैसे दिग्गज नेता शामिल हो चुके थे. इस सूची में दिग्विजय सिंह, कमल नाथ और मोतीलाल वोरा जैसे वरिष्ठ कांग्रेसी नेता भी शामिल रहे.

साथ ही भाजपा के वर्तमान और पूर्व मुख्यमंत्रियों की एक लम्बी फ़ेहरिस्त आसाराम के ‘दर्शन’ के लिए जाती रही है. इस फ़ेहरिस्त में शिवराज सिंह चौहान, उमा भारती, रमण सिंह, प्रेम कुमार धूमल और वसुंधरा राजे के नाम शामिल हैं.

इन सबसे इतर, 2000 के दशक के शुरुआती सालों में आसाराम के ‘दर्शन’ के लिए जाने वाला सबसे महत्वपूर्ण नाम भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का है. लेकिन 2008 में आसाराम के मुटेरा आश्रम में 2 बच्चों की हत्या का मामला सामने आते ही लगभग हर राजनीतिक दल के नेताओं ने उनसे दूरी बना ली.

जानकारी के मुताबिक, आसाराम ने 15 साल की आयु में घर छोड़ दिया था. बाद में गुजरात के ही भरुच के एक आश्रम में आ गए थे. लीलाशाह नाम के स्पिरिचुअल गुरु से दीक्षा ली. दीक्षा से पहले खुद को साबित करने के लिए 40 दिन तक साधना करनी पड़ी थी.

Source: Gorakhpur times