INTERVIEW: ‘अक्षय पात्र’ के GM ने कहा- 55% बच्‍चे ही खा रहे मिड-डे-मील

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लखनऊ: बच्‍चों को फ्री एजुकेशन के साथ-साथ उनके न्‍यूट्रीशन का इंतजाम करने वाली सरकारी मिड-डे-मील योजना को प्रदेश में सपोर्ट कर रही संस्‍था अक्षय पात्र अब अपने स्‍वरूप को बढ़ाने जा रही है। अपनी क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ अक्षयपात्र प्रदेश के आधा दर्जन अन्‍य जिलों में अपने पैर जमाने जा रही है।

हालांकि, राजधानी में औसतन मात्र 55 प्रतिशत बच्‍चों को ही इस सेवा से लाभ मिल पा रहा है। इस संबंध में अक्षयपात्र के जनरल मैनेजर ऑपरेशंस सुनील कुमार मेहता ने newstrack.com से खास बातचीत की।

रिपोर्टर: आपकी संस्‍था कितने स्‍कूलों और बच्‍चों को अपनी सेवा प्रदान कर रही है?

सुनील मेहता:
अक्षय पात्र संस्‍था देश के 12 राज्‍यों के 13,839 स्‍कूलों में 1.6 मिलियन बच्‍चों को मिड डे मील पहुंचाने का काम कर रही है। लखनऊ की बात करें तो 1,276 स्‍कूलों में 1 लाख बच्‍चों को अक्षयपात्र के जरिए मिड-डे-मील दिया जा रहा है। आगे इसकी क्षमता को बढ़ाते हुए एक लाख 27 हजार बच्‍चों को एमडीएम पहुंचाने की व्‍यवस्‍था की जा रही है। इसके लिए संस्‍था 5 करोड़ का अतिरिक्‍त निवेश करने जा रही है।

रिपोर्टर: मिड डे मील को कई बच्‍चे खाने से मना कर देते हैं, ऐसे में हर रोज कितना खाना बर्बाद हो रहा है?

सुनील मेहता: हम इस मामले में लकी हैं। हमारा कोई खाना बर्बाद नहीं होता है। हमें बच्‍चों की अटेंडेंस का ट्रेंड पता है। उसी हिसाब से खाना बनवाते हैं। जैसे अगस्‍त, सितंबर, अक्‍टूबर और नवंबर में अटेंडेंस सही रहती है। नवंबर से अटेंडेस कम होने लगती है। फिर मार्च में परीक्षाओं के दौरान 75 से 80 प्रतिशत अटेंडेंस रहती है। पूरे एकेडमिक ईयर के औसत की बात करें तो औसतन 55 प्रतिशत अटेंडेंस के हिसाब से खाना बनता है। यह वो अटेंडेंस है, जितने बच्‍चे खाना खाते हैं। हो सकता है कुछ बच्‍चे घर से लाकर खाते हों।

रिपोर्टर: मिड डे मील में प्रोटीन और न्‍यूट्रीशन की क्‍या स्थिति रहती है?

सुनील मेहता: मिड डे मील प्रोटीन युक्‍त भोजन है। इसमें हमने एक नया प्रयोग किया है। हमने भोजन बनाने के दौरान माइको न्‍यूट्रियंट्स को भोजन में मिलाना शुरू किया है। इससे बच्‍चों को अच्‍छा पोषण मिलता है। जैसे फोर्टिफाइड राइस( जिसमें बी कांप्‍लेक्‍स अच्‍छे से मिला होता है), फोर्टिफाइड तेल, आयरन युक्‍त नमक का प्रयोग किया जाता है। मेन्‍यू के अनुसार खाना प्रोवाइड करवाया जाता है। इसमें सोमवार को रोटी, सोया के साथ मिक्‍स वेज, मंगलवार को सब्‍जी चावल, बुधवार को खीर पुलाव, गुरुवार को रोटी सब्‍जी, शक्रवार को खीर पुलाव और शनिवार को राजमा- चावल या दाल- चावल दिया जाता है। सोमवार को फल देते हैं। गर्म दूध देना संभव नहीं है, इसलिए उसकी पूर्ति खीर के माध्‍यम से कर देते हैं।

रिपोर्टर: किस समय खाना तैयार हो जाता है और कितने लोग इस काम में लगते हैं?

सुनील मेहता:
हमारे यहां 220 कर्मचारी मिलकर भोजन तैयार करते हैं। इसमें 190 मेल और 30 फीमेल कर्मचारी हैं। हम सुबह साढे पांच बजे से भोजन तैयार करना शुरू कर देते हैं। 10 हजार बच्‍चों का चावल 15 मिनट में और पचास हजार बच्‍चों की रोटी 2 घंटे में तैयार कर लेते हैं। पांच ब्‍लाकों में 64 गाड़ियों के माध्‍यम से भोजन डिलीवर किया जाता है। पहली गाड़ी सुबह साढे सात बजे निकल जाती है। इसके बाद हर स्‍कूल में 9 बजे तक हर हाल में भोजन पहुंच जाता है।

रिपोर्टर: आपको सरकार कितना सहयोग करती है?

सुनील मेहता: सरकार से हमें 5 रुपए कंवर्जन कॉस्ट मिलती है। अगर खर्च की बात करें तो प्रति छात्र 9 रुपए के आस-पास खर्च आता है। इसलिए 4 रुपए की अतिरिक्‍त लागत हम खुद ही लगाते हैं। इसके अलावा कई ऐसे लोग हैं जो हमारी वेबसाइट पर डोनेशन देते हैं। 950 रुपए में आप बच्‍चे को 220 स्‍कूल डेज का भोजन करा सकते हैं। अगर कोई डोनेशन देता है तो हम उसके नाम से 220 वर्किंग डे भोजन कराते हैं। सरकार हर स्‍तर पर सहयोग कर रही है। उम्‍मीद है कि हम नौनिहालों को और बढ़िया सर्विस दे पाएंगे।

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Source: Hindi Newstrack