दुनियाभर में खुल जाएं गुरुकुल-विदेशी प्रतिनिधिमंडल

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साल में करीब दो हजार लोग सिर्फ वेद अध्ययन  शोध के लिए हिंदुस्तान आते हैं. विश्व के कई राष्ट्र ऐसे हैं, जो इंडियन एजुकेशन पद्घति के मूल में शामिल गुरुकुल को अपने यहां स्थापित करना चाहते हैं, मगर आचार्यो की कमी के कारण ऐसा नहीं कर पा रहे. उज्जैन में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय गुरुकुल सम्मेलन में शिरकत करने आए नेपाल, भूटान, म्यांमार  थाईलैंड के डेलीगेशन ने बोला है कि हिंदुस्तान गवर्नमेंट अगर थोड़ी मदद कर दे तो पूरे विश्व में गुरुकुल खुल सकते हैं.

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विदेशी प्रतिनिधिमंडल ने इंडियन गुरुकुल परंपरा  विदेशी गुरुकुल परंपरा की तुलनात्मक बातें साझा की. बोला कि अनादिकाल से इंडियन एजुकेशन पद्घति गुरुकुलों के कारण विश्वविख्यात रही है. वेद-ग्रंथ, स्वावलंबन  अनुशासन की एजुकेशन देने में हिंदुस्तान का आज भी कोई सानी नहीं है.यहां की वैदिक परंपरा  एजुकेशन अद्भुत है. हिंदुस्तान गवर्नमेंट अगर हमें थोड़ा योगदान कर दे तो उनके राष्ट्र में भी उम्दा योगानुकुल गुरुकुल खुल जाएंगे. अगर ऐसा हो गया तो उनके बच्चे अपने ही राष्ट्र में 16 विद्याओं का ज्ञान प्राप्त कर अपना सर्वागिण विकास कर पाएंगे.

किस राष्ट्र में क्या है गुरुकुल की स्थिति

नेपाल : सभी गुरुकुल नि:शुल्क

नेपाल से 85 लोगों का डेलीगेशन आया है. उनमें शामिल समरमाथा प्रज्ञापीठ के चेयरमैन सुशीलचंद्र ऑफिसर बताते हैं कि नेपाल में एकेडमिक  नॉन एकेडमिक करीब 200 गुरुकुल हैं. सभी नि:शुल्क चलते हैं. वहां आचार्यो को गवर्नमेंट की ओर से वेतन मिलता है. हमारी अपेक्षा है कि हिंदुस्तानगवर्नमेंट शिल्पकला  वास्तुकला अध्यापन के लिए हमें योगदान करे.

भूटान : आचार्यो की कमी है, गुरुकुल भी गिनती के

भूटान से सात सदस्यीय डेलीगेशन आया है. सदस्य उदयनारायण भटराई ने बोला कि हम इंडियनगुरुकुल एजुकेशन पद्धति से प्रेरित हैं. भूटान में वेदाचार्यो की कमी है. यही कारण है कि गुरुकुल भी चार-छह ही हैं. उनमें भी सिर्फ प्रारंभिक एजुकेशन प्राप्त करने तक का बंदोबस्त हैं. वेद-ग्रंथों के अध्ययन के लिए हमारे लोग हिंदुस्तान आते हैं. हमारे यहां भी गुरुकुल खुले इसके लिए हिंदुस्तानगवर्नमेंट के योगदान की अपेक्षा है.

म्यांमार : एजुकेशन पूरी होने के बाद करते हैं धर्म का प्रचार

म्यांमार से छह लोगों का डेलीगेशन आया है. उनमें शामिल 50 साल पुराने रामेश्वर संस्कृत महाविद्यालय के संचालक डॉ विष्णुवल्लभानंद ने बताया म्यांमार में संस्कृत, वेद, वेद व्याकरण, वेदांत, ज्योतिषद, सांख्य दर्शन, योग आदि का अध्यापन कराया जाता है. गुरकुल से निकलने के बाद विद्यार्थी धर्म का प्रचार करते हैं. कई बैंकॉक या हिंदुस्तान आकर बस गए हैं.

थाईलैंड : गुरुकुल नहीं, दो माह शिविर लगाकर दी जाती है वेद-ग्रंथ की शिक्षा

थाइलैंड से पांच लोगों का डेलीगेशन आया है. उनमें शामिल पं श्रीनारायण पांडे ने बताया थाईलैंड में इंडियन एजुकेशन पद्घति से ओतप्रोत गुरुकुल तो नहीं है, मगर संस्कृत सेवा मंडल वेदों की एजुकेशन युवा पीढ़ी को देता है. वर्ष में सिर्फ ग्रीष्मकाल में दो माह बैंकॉक में नेपाली  हिंदू धर्मग्रंथ की एजुकेशन प्रदान की जाती है.

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Source: Purvanchal media