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विश्विद्यालय है कि मुख्यमंत्री समारोह स्थल । जाने कैसे प्रभावित हो रहा शिक्षण कार्य ।

दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय होना तो यहां पठन पाठन परीक्षा या शिक्षण सम्बन्धी कार्य होना चाहिए लेकिन आज कल गोरखपुर विश्वविद्यालय मुख्यमंत्री समारोह स्थल के रूप में विकसित हो रहा है ।

आए दिन विश्वविद्यालय में बरात घर माफिक टेंट तम्बू गड़ा रहता है । या मजदूर जोर शोर पर टेंट गाड़ते मिल जायेंगे । और इन सब में हलकान होते है विश्वविद्यालय के छात्र क्योकि जब छात्र पढ़ने को विश्वविद्यालय आते है तो उन्हें मुख्यमंत्री प्रोटोकॉल के तहत कक्षाओं की तरफ जाने से रोका जाता है ।

ताजा मामला 1 मई का है छात्रो की परीक्षा दीक्षा भवन में दूसरी पाली में 2 बजे से थी ।और छात्र उसी अनुसार 1 घंटे पूर्व 1 बजे विश्वविद्यालय में पहुचे पर नजारा दूसरा था । क्योंकि दीक्षा भवन में मुख्यमंत्री का कार्यक्रम चल रहा था । वहां शिक्षक भर्ती नियुक्ति बाटी जा रही थी ।

और बाहर विश्वविद्यालय छात्र धूप में मूह जला रहे थे । प्रोटोकॉल का आलम ये था कि परीक्षा विभाग के शिक्षको को भी दीक्षा भवन में प्रवेश नही मिला । जाने पर जल्दी जल्दी आनन फानन में परीक्षा का सीटिंग प्लान जारी हुआ एवमं परीक्षा शुरू हुई ।

इन सब से एक ही सवाल उठता है । कि पठन पाठन के स्थल को कब तक अधिगृहित कर सरकारी कार्यक्रमो के लिये उपयोग में लाया जाएगा क्या सरकार प्रशासन की नजर में विश्वविद्यालय के इतर स्थान नही मिलता आखिर कब तक प्रोटोकॉल के आड़े विश्वविद्यालय छात्रो को हलकान किया जाएगा ये सवाल सरकार व प्रशासन गंभीरता से लेना पड़ेगा ।

Source: Gorakhpur times

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