मदर्स डे: इस मां के हिम्मत व हौसले से मिल रही बेटी को पहचान, जानें इस कहानी की खासियत

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रांची: मदर्स डे पर उन सभी माओं को सलाम जिसके वजह से हम सभी का वजूद है। आज आपको मिलाते हैं रांची की रहने वाली झूमा गुप्ता से जिन्होंने अपनी बेटी मौली की खुशी के लिए अपनी जिंदगी, अपना करियर, अपनी ख्वाहिश, अपने अरमान सब कुछ लुटा दिए।

झुमा गुप्ता कहती हैं बेटी कोई बोझ नहीं है। भगवान का आशीर्वाद है। ईश्वर ने मौका दिया है सेवा करने का सो कर रही हूं।  दरअसल मौली क्लास सिक्स तक (DAV) कपिल देव में पढ़ाई पूरी की. लेकिन उसके बाद से उसकी तबीयत खराब होने लगी। बात इतनी बिगड़ी कि, वेल्लोर सीएमसी ले जाना पड़ा। मां ने शिक्षक की नौकरी त्याग दी। इलाज कराने में इतने मशगूल हो गई कि पूरा करियर ही खत्म हो गया।


मौली चलने-फिरने, खाने पीने से लाचार हो गई। बाद में उसे दीपशिखा नामक स्कूल में भर्ती कराया गया जहां आज उसकी मां झूमा गुप्ता ऐसे ही बच्चों को पढ़ाती है उन्हें जीवन जीने का गुर सिखाती हैं। मौली की मां झूमा गुप्ता कहती हैं कि, बेटी हर एक बात को अच्छे से समझती है। चेहरे को पढ़ लेती है।

सबसे खास बात यह कि मौली दीपशिखा स्कूल में एक प्रोजेक्ट पर काम कर रही है जो बेंगलुरु के एक संस्थान ने उपलब्ध कराया है। मौली की अंग्रेजी के साथ हैं हिंदी और बंगाली में अच्छी पकड़ है। लिहाजा सभी उसके पास कुछ न कुछ सीखने आते हैं बच्चे उसे मॉनिटर बुलाते हैं। आखिर में मौली की मां झुमा गुप्ता को उनकी हिम्मत, उनके हौसले के लिए सलाम।

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Source: Hindi Newstrack