मोदी ने 14 किमी लंबी जोजिला सुरंग की नींव रखीं, सेना के लिए महत्वपूर्ण

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श्रीनगर : पीएम नरेंद्र मोदी ने शनिवार 19 मई को जम्मू-कश्मीर में लेह-लद्दाख क्षेत्र से जोड़ने वाली एशिया की सबसे लंबी टू-लेन जोजिला सुरंग परियोजना का शिलान्यास किया और लेह में बौद्ध धर्मगुरु की जन्मशती के समापन समारोह में भी शामिल हुए।

मोदी ने कहा कि मैं पहला पीएम था जिसे मंगोलिया जाने का मौका मिला। वहां के लोग भारत के बारे में नहीं जानते लेकिन लेह के आध्यात्मिक गुरु कुशक बकुला को जानते हैं।

मोदी ने कहा कि केंद्र की योजनाओं से इस क्षेत्र की अर्थ व्यवस्था को नई ताकत मिलेगी।

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जोजिला टनल प्रोजेक्ट उन्नत टेक्नोलॉजी का भी बड़ा उदाहरण है। टनल में सात कुतुबमीनार ऊंचाई वाली व्यवस्था बनाई गई है ताकि अंदर की हवा शुद्ध रह सके। सुरंग बनने के बाद जोजिला से गुजरने में लगने वाला वक्त 3.5 घंटे से घटकर सिर्फ 15 मिनट रह जाएगा। श्रीनगर-कारगिल व लेह के बीच हर मौसम की कनेक्टिविटी बनाए रखने में भी यह सुरंग बेहद अहम होगी। आमतौर पर सर्दियों के मौसम में बर्फबारी व हिमस्खलन के चलते श्रीनगर व लेह-लद्दाख के लिए कनेक्टिविटी ज्यादातर समय बाधित रहती है।

रणनीतिक तौर पर सेना के लिए यह सुरंग काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। 14.2 किमी लंबी इस सुरंग की अनुमानित लागत 6,809 करोड़ रुपए है। परियोजना को पूरा करने के लिए सात साल का लक्ष्य तय किया गया है।

परिवहन मंत्रालय के मुताबिक, “जोजिला सुरंग परियोजना की प्लानिंग एक स्मार्ट सुरंग के तौर की गई है। इसमें सुरक्षा के नए व लेटेस्ट फीचर्स हैं। सुरंग में वेंटिलेशन, विद्युत आपूर्ति, इमरजेंसी लाइटिंग, सीसीटीवी, वैरिएबल मैसेज साइन, ट्रैफिक लॉगिंग इक्विपमेंट, ओवर हाइट व्हीकल डिटेक्शन, टनल रेडियो सिस्टम जैसे फीचर्स होंगे।

इसमें पैदल राहगीरों के लिए प्रति 250 मीटर में रोड क्रॉस करने की व्यवस्था होगी। वहीं, मोटर वाहनों के लिए प्रति 750 मीटर में ले-बाई क्रॉस के पास बनाए जाएंगे। सुरंग में प्रति 125 मीटर की दूरी पर आपातकालीन टेलीफोन व फायर फाइटिंग केबिन की व्यवस्था की भी जाएगी।

नेशनल हाइवे-1ए पर श्रीनगर-लेह खंड में बालटाल और मिनामर्ग को जोड़ने वाली यह सुरंग समुद्र तल से 11,578 फीट की ऊंचाई पर स्थित है।

नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने 03 जनवरी 2018 को इस दो लेन की सुरंग परियोजना को मंजूरी दी थी।

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यह सुरंग सेना के लिए बेहद अहम बताई जा रही है। इस क्षेत्र में सर्दियों के मौसम में पारा माइनस 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। बर्फबारी व हिमस्खलन से मार्ग अक्सर बाधित रहता है। ऐसे में सेना के लिए कारगिल व बॉर्डर की अन्य सैन्य पोस्ट के लिए खाद्य-रसद सामग्री ले जाना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। सुरंग बन जाने के बाद 12 महीने आवागमन सुचारू रहेगा।

पीएम ने कहा कि लेह लद्दाख की महिलाओं में जो सामर्थ्य है वो देखने लायक है। देश की यूनिवर्सिटी को अध्ययन करना चाहिए कि ऐसे दुर्गम इलाके जो 6-7 महीने के लिए दुनिया से कट जाते हैं वहां इन परिस्थितियों में यहां की माताएं और बहनें जीवन भी चलाती हैं, अर्थव्यवस्था भी चलाती हैं, ये देश के लिए गौरव की बात है, मैं इन्हें नमन करता हूं।

उन्होंने कहा कि यहां के लोगों की इच्छा है कि मेडिकल कॉलेज होना चाहिए, आपके प्रस्ताव को गंभीरता से लूंगा।

 

 

 

 

 

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Source: Hindi Newstrack