सपा-बसपा के बीच सीटों की सहमति बनी, 2019 के लिए “कांग्रेस” यूपी के विपक्षी महागठबंधन से बाहर !

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लखनऊ : देश में होने वाले आगामी आम चुनावों के लिए राजनीतिक बिसातें अभी से बिछनी शुरू हो गयी हैं, वहीँ देश की राजनीति में बड़ा कद रखने वाले प्रदेश यूपी में सबकी निगाहें टिकी हुई है। यूपी के अंदर हाल ही में 4 उपचुनावों में सपा-बसपा गठबंधन की जीत ने भाजपा जैसी सत्तासीन पार्टियों को चिंता में ड़ाल दिया हैं। वहीँ यूपी में सपा-बसपा ने अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों की मांग पर विचार करते हुए महागठबंधन के लिए एक बड़ा फैसला किया है, जिससे दोनों पार्टियों के कार्यकर्ताओं और समर्थकों में ख़ुशी है।

बता दें कि सपा-बसपा के कार्यकर्ताओं और समर्थकों की मांग थी कि 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस से कोई समझौता ना किया जाए, वहीँ खबर है कि विपक्षी महागठबंधन से कांग्रेस अब बाहर रह सकती है। माना यह जा रहा है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी 35 और बहुजन समाज पार्टी 38 सीटों पर लड़ सकती हैं। बाकी सीटें सपा के साथ चल रही रालोद,पीस पार्टी और निषाद पार्टी जैसे छोटे-छोटे सहयोगी दलों के लिए छोड़ी जाएंगी।

अखिलेश यादव ने फिर दिखाया अपना बड़ा दिल, छोटे दलों के लिए दी अपनी सीटों की कुर्बानी !

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी मैनपुरी में अपने भाषण में इस समझौते की रूपरेखा के संकेत देते हुए कहा था कि बसपा से समझौता करने के लिए वे दो-तीन सीटों का त्याग करने के लिए भी तैयार हैं। सपा के सूत्रों के अनुसार, ऐसे में 3 सीटें राष्ट्रीय लोक दल 1 सीट पीस पार्टी और 1 सीट निषाद पार्टी को दी जा सकती हैं। हालाँकि उत्तर प्रदेश में बन रही विपक्षी एकता में कांग्रेस को यूं तो गठबंधन से बाहर रखा गया है, लेकिन माना ये जा रहा है कि राहुल गांधी की अमेठी लोकसभा सीट और सोनिया गांधी की रायबरेली सीट पर विपक्ष अपना उम्मीदवार नहीं उतारेगा।

दरअसल, राज्य में कांग्रेस अपना आधार खो चुकी है। फूलपुर और गोरखपुर के लोकसभा उपचुनावों में अकेले लड़कर कांग्रेस के उम्मीदवारों को महज 19,353 और 18,858 वोट ही मिले। सपा और बसपा नेताओं का मानना है कि कांग्रेस के पास अब कोई आधार वोट नहीं बचा है। यूपी विधानसभा चुनाव में सपा-कांग्रेस गठबंधन में यही देखने को मिला कि कांग्रेस प्रत्याशी को तो सपा का वोट ट्रांसफर हो गया, पर सपा प्रत्याशी को कांग्रेस को वोट नहीं ट्रांसफर हो पाया था और कांग्रेस का बचा-खुचा बेस वोट भी भाजपा के खाते में चला गया था।

यदि कांग्रेस विपक्षी गठबंधन में शामिल हो जाती है तो फिर से कांग्रेस का बेस वोट भाजपा में चला जाएगा । इसीलिए सपा-बसपा को लगता है कि कांग्रेस को साथ लिए बिना लड़ने से ही उन्हें ज्यादा फायदा है। पिछले लोकसभा चुनाव में विपक्षी दलों के अलग-अलग लड़ने की वजह से भाजपा को सहयोगियों के साथ राज्य की 80 में से 73 सीटें मिली थीं जबकि सपा को पांच और कांग्रेस को दो सीटों पर ही जीत मिली थी, बसपा के खाते में एक भी सीट नहीं आई थी।

Source: Indiakinews