बदहाल हो रहा पाकिस्तान, भारतीय रूपए के आधी रह गई उसकी करेंसी

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इस्लामाबाद: अपने देश से भारत को आतंकियों की सप्लाई करने वाला पाकिस्तान बदहाली के दौर से गुजर रहा है और उसकी करेंसी भारतीय रूपए के आधी हो कर रह गई है। दुश्मन पड़ोसी देश पाकिस्तान की आर्थिक चिंताएं काफी बढ़ गई हैं और उसकी अर्थव्यवस्था गोते लगा रही है, इसके साथ ही कर्ज का दबाव भी बढ़ रहा है।

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एक अमेरिकी डॉलर के मुकाबले पाकिस्तानी रुपये की कीमत अब 122 हो गई है जबकि भारत से तुलना की जाए तो वह काफी बदतर स्थिति में दिखाई पड़ता है। भारतीय रुपये की कीमत अभी 67 रुपये है, यानी भारत का एक रूपया अब पाकिस्तान के दो रुपये के बराबर हो गया है।

पाकिस्तान में होने हैं आम चुनाव, पहले ही बिगड़ गई हालत

अगले महीने ही पाकिस्तान में आम चुनाव है, ऐसे में देश की माली हालत बिगड़ना चुनावों में भी एक बड़ा मुद्दा बन सकती है। चर्चा है कि पाकिस्तान चुनाव के बाद अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) से कर्ज मांग सकता है। इससे पहले पाकिस्तान 2013 में मुद्राकोष के पास गया था।

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कार्यवाहक वित्त मंत्री शमशाद अख्तर ने कहा, ‘हमें 25 अरब डालर के अपने व्यापार घाटे के अंतर को हमारे भंडार के जरिए पाटना होगा और कोई विकल्प नहीं है। देश के केंद्रीय बैंक ने रुपये में 3.7% का अवमूल्यन किया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान के पास अब 10.3 अरब डॉलर का ही विदेशी मुद्रा भंडार है, जो पिछले साल मई में 16.4 अरब डॉलर था।

5 बिलियन डॉलर तक पहुंचने के कगार पर है कर्ज

पाकिस्तान का चीन और इसके बैंकों से इस वित्तीय वर्ष में लिया गया कर्ज करीब 5 बिलियन डॉलर तक पहुंचने के कगार पर है। पाकिस्तानी अखबार डॉन के मुताबिक, पाकिस्तान भुगतान संकट के चलते चीन से 1-2 बिलियन डॉलर (68-135 अरब रुपए) का नया लोन लेने जा रहा है। यह इस बात का संकेत है कि पाकिस्तान बीजिंग पर आर्थिक तौर पर किस कदर निर्भर हो चुका है।

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पड़ोसी देश में राजनीतिक हालत भी ठीक नहीं है। सेना और सरकार के बीच खींचतान लगातार जारी है। पाकिस्तानी रुपये की वैल्‍यू इंटरनैशनल मार्केट में लगातार गिर रही है। रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान के पास जितनी विदेशी मुद्रा है वो 10 हफ़्तों के आयात के बराबर है।  विदेशों में नौकरी कर रहे पाकिस्तानी देश में जो पैसे भेजते थे उसमें गिरावट आई है।

विश्व बैंक ने दी थी चेतावनी

इसके साथ ही पाकिस्तान का आयात बढ़ा है और चाइना पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर में लगी कंपनियों को भारी भुगतान के कारण भी विदेशी मुद्रा भंडार ख़ाली हो रहा है। चाइना पाकिस्तान कॉरिडोर 60 अरब डॉलर की महत्वाकांक्षी परियोजना है।

विश्व बैंक ने पिछले अक्तूबर में पाकिस्तान को चेतावनी दी थी कि उसे क़र्ज़ भुगतान और करेंट अकाउंट घाटे को खत्‍म करने के लिए इस साल 17 अरब डॉलर की ज़रूरत पड़ेगी। पाकिस्‍तान विदेश में बसे अपने लोगों को ज्‍यादा पैसे भेजने के लिए खास ऑफर देने की भी तैयारी कर रहा हैं उसके निर्यात में भी लगातार कमी आई हैं। पिछले साल पाकिस्तान का व्यापार घाटा 33 अरब डॉलर का रहा था।  कच्‍चे तेल की बढ़ती कीमत से पाकिस्‍तान को और ज्‍यादा आर्थ‍िक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।

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Source: Hindi Newstrack