गोरखपुर – योगी सरकार के डेढ़ साल के कार्यकाल में मर गए 4000 से ज्यादा मासूम बच्चे, देखें पूरी रिपोर्ट !

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लखनऊ, पिछले डेढ़ साल में योगी के गृह क्षेत्र गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 4 हजार से ज्यादा बच्चों की मौत हो चुकी है। यही नहीं पिछले पांच महीनों में बच्चो की मौत का आंकड़ा 900 के करीब है। योगी सरकार के दबाव के चलते बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज में होने वाली बच्चों की मौतों के आकंड़ों को बाहर आने से रोक दिया गया। पिछले साल ऑक्सीजन की कमी से सैकड़ों बच्चों की मौत के बाद से योगी सरकार की हुई फजीहत के बाद से सरकार ने हॉस्पिटल पर पूर्णतया लगाम लगा रखी है ताकि वहां पर होने वाली बच्चों की मौतों की कोई जानकारी बाहर न जाने पाए।

इंसेफेलाइटिस मासूम बच्चों की मौतों की वजह बन ही रही साथ ही बीआरडी मेडिकल काॅलेज का नियोनेटल आईसीयू नवजातों का कब्रगाह बनता जा रहा लेकिन गरीबी के आगे बेबस पूर्वांचल के बच्चों को बचाना सिर्फ राजनैतिक जुमलेबाजी तक सीमित रह गया है।

बच्चों की मौतों को 2014 के लोकसभा चुनाव और 2017 के विधानसभा चुनाव में भुनाते हुए बीजेपी ने पूर्वांचल में बम्पर वोट बटोरे और सत्ता का सुख भोग रही है। 2014 लोकसभा चुनाव के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी ने मासूमों की मौत पर चिंता जताते हुए समर्थन की अपील की थी। 2017 में भी भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने इंसेफेलाइटिस जैसी महामारी से निजात के लिए सार्थक पहल करने का आश्वासन देकर वोट लिया था।

पिछले डेढ़ साल के बीआरडी मेडिकल काॅलेज के आंकड़ों पर अगर गौर करें तो 4111 मासूम मौत के मुंह में जा चुके हैं। 2017 में कुल 3239 मासूमों की मौत हुई। इसमें 2032 नवजात थे। जबकि 1207 अन्य मासूम। एनआईसीयू में 28 दिन तक के बच्चों को स्पेशल केयर में रखा जाता है। वहीं, 2018 में पांच महीने अभी बीते हैं। जून चल रहा है। इन पांच महीनों में 872 मासूमों की जान जा चुकी है। इनमें 567 नवजात हैं। मौत के मुंह में समाए इन बच्चों में 63 इंसेफेलाइटिस से पीड़ित थे।

गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में हो रही बच्चों की मौतों को लेकर सरकार कितनी संवेदनशील इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सरकार पूर्वांचल में पीने का साफ़ पानी तक मुहैया नहीं करा पा रही है। इंसेफेलाइटिस की वजह गंदा पानी को भी माना जा रहा। कई सालों से इंसेफेलाइटिस से रोकथाम को लेकर जागरूकता अभियानों के नाम पर लाखों-करोड़ों बहा दिए जाते हैं। लेकिन गांवों में अभी भी इंडियामार्का-2 हैंडपंप खराब हालत में हैं। शुद्धपेयजल के लिए लगाए गए इन हैंडपंपों के देखभाल का अभाव है। कई तो गंदा पानी भी उगल रहे।

ये हालात तब हैं जब प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हैं जो पिछले दो दशक से गोरखपुर की सत्ता संभाल रहे हैं और सांसद रहते हुए लोकसभा के अंदर इंसेफेलाइटिस की रोकथाम के लिए कड़े कदम उठाने की बात करते थे। तब योगी आदित्यनाथ इस बात का हवाला देते थे कि केंद्र में उनकी सरकार नहीं है। अब जबकि केंद्र और प्रदेश दोनों ही जगह बीजेपी की सरकार है और सबसे बड़ी बात योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश की सत्ता की कमान संभाल रहे हैं। तब भी पूर्वांचल में मासूमों के लिए कहर आबोत हो रहे इंसेफेलाइटिस के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा पाए हैं।

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Source: Indiakinews