कविता: कवि तो कहेगा, जब जब सूरज को देखेगा

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जब जब सूरज को देखेगा

उसके उगने की बात कहेगा

समुद्र के गर्भ से शनै: शनै:

ऊपर उठने की

नरम गुलाबी रंगत से बदल कर

गर्म अग्नि में बदलने की

पूरे आकाश को लांघ कर

धीरे धीरे नीचे उतरने की

और पुन: समुद्र की गोद में विलीन होने

की बातें विस्तार से कहेगा

उसके शब्द इतने जीवंत होंगे

कि कल सूरज रहे न रहे

उसका मिजाज उसका रुप और पृथ्वी पर

शासन करने का तरीका उसका

अंकित रहेगा समय के पन्नों पर

उसके उदय से उजाला और

अस्त से अंधेरा होता है।

उसके अस्तित्व से ही जीवन है

जीवन में गति है

सब कुछ अक्षरों में बाँच देगा

पीढिय़ाँ जाने समझें और कविता में साक्षात्

देख लें उसका स्वरूप

इसलिए कहेगा

कवि तो कहेगा.. ..

शशिबाला

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