IIT पास इन 3 दोस्तों ने छोड़ा था लाखों का पैकेज, डॉक्टर्स के लिए बनाया ये एप

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लखनऊ. तीन आईआईटीयंस दोस्तों ने मिलकर ‘क्यूरोफाई’ नाम की एक कम्पनी और इसी नाम से डाक्टर्स के लिए एक खास तरह का मोबाइल एप भी बनाया है। ये एप सही सूचनाएं और जानकारी साझा कर डाक्टर्स को पेशेंट के बेहतर इलाज में हेल्प करता है। ‘क्यूरोफाई’ कम्पनी के फाउंडर निपुन गोयल ने newstrack.com से बात की और अपने एक्सपीरियेंसेज शेयर किया।

ऐसे बीता था बचपन
-निपुन(27)बताते है, मेरा जन्म 8 जनवरी 1990 को राजस्थान के हनुमान गढ़ जिले में हुआ था।
-मेरा पिता शंकरलाल किराने का होलसेल का बिजनेस करते थे। मां उर्मिला देवी हाउस वाइफ है।
-पिता बिजनेस मैंन थे। कभी कोई फैन्नेसियल प्रोब्लम नहीं आई। 12 तक की पढ़ाई हनुमान गढ़ में हुई।
-मैं 2008 में आईआईटी दिल्ली में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने चला गया।
-उसी साल मेरी पूरी फैमिली राजस्थान के झुंझुनू शहर में आकर बस गई।

 इस वजह से छोड़नी पड़ी थी जॉब
-निपुन बताते है, आईआईटी में एडमिशन लेने के बाद मेरी मुलाकात पवन गुप्ता (26) -+और मुदित विजयवर्गीय (27) से हुई।
-पवन मेरा रूममेट था। वह इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग और मुदित कैमिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा था।
-आईआईटी में हम तीनों के बीच काफी अच्छी बांडिंग हो गई थी।
– आईआईटी में पढ़ाई के दिनों में ही मेडिकल टूरिज्म में काम करना शुरू कर दिया था। 2012 में पढाई पूरी हुई।
-मैंने करीब 2 साल तक एक इन्वेस्टमेंट बैंक में जॉब की। उसके बाद जॉब छोड़ दिया। उस टाइम सलाना लाख रूपये का पैकेज था ।
-मेरा मन खुद का काम शुरू करने का था। ये बात दोस्त पवन गुप्ता और मुदित से शेयर की। वे राजी हो गये।

 इतने पैसे में शुरू किया स्टार्ट अप
-निपुन बताते है, मैंने सोशल मीडिया के एक स्टार्ट अप में भी थोड़े दिन के लिए काम किया था। मेरा शुरू से ही बिजनेस माइंड था। मैं खुद का बिजनेस करने के बारे में हमेशा सोचता था।
-मैं मेडिकल टूरिज्म में काम करने के दौरान करीब 1 हजार डाक्टर्स से मिला था।  उनसे मुलाकात करने के दौरान ये मालूम हुआ कि पेशेंट के लिए तो बहुत सारे मोबाइल है लेकिन डाक्टर्स के लिए कोई खास एप नहीं है।
-हम तीनों दोस्तों ने काफी रिसर्च करने के बाद मेडिकल टूरिज्म के फिल्ड में आगे भी काम करने का फैसला किया। मैंने 2 साल तक एक कम्पनी में जॉब किया था।
-मेरे पास पहले की कुछ सेविंग्स बची हुई थी।  मैंने अपने दोस्तों के साथ मिलकर 2015 में पांच लाख रूपये से ‘911India’ नाम से अपना स्टार्ट अप शुरू किया।

ऐसे आया ‘क्यूरोफाई’ एप बनाने का आईडिया
-निपुन बताते है, हमने अपने काम के सिलसिले में करीब 1 हजार डाक्टर्स से मुलाकात की तब पाया कि उनके लिए कोई खास एप नहीं है।
हमने सोचा कि क्यों न डाक्टर्स के लिए एक ऐसा एप बनाया जाये जिससे उनकी प्रैक्टिस को और आसान बनाया जा सके। बस वहीं से ‘क्यूरोफाई’ एप बनाने का आईडिया आया।
-शुरुआत में हमें एक मेडिकल रिप्रेन्जेटेटिव की तरह 2 से तीन घंटे तक एक एक डाक्टर के कमरे के बाहर वेट कराया जाता था। तब जाकर हमें डाक्टर से मिलने के मौक़ा मिल पाता था।
-डाक्टरों को जब हम अपने काम के बारे में बताने की कोशिश करते तब वे बेकार आईडिया मानकर हमें टाल देते थे। लेकिन हम बुरा नहीं मानते थे। दिन भर कड़ी मेहनत के बाद 2 से तीन डाक्टर ही हमसे जुड़ पाते थे।
– हमने अपनी कम्पनी की पहुंच बढ़ाने के लिए स्पेशली डाक्टर्स के लिए ‘क्यूरोफाई नाम’ से एक मोबाइल एप तैयार कराया। बाद में ‘911 India’ कम्पनी का नाम चेंज करके क्यूरोफाई कर दिया।

 ऐसे काम करता है ये एप
-निपुन बताते है, ‘क्यूरोफाई एप’ वेरीफाईड डाक्टर्स का एक नेटवर्क है। देश में डाक्टर्स की संख्या करीब दस लाख है। जिसमें से सवा दो लाख वैरीफाईड डाक्टर्स इस एप से जुड़े हुए है और इसे अपने मोबाइल में डाउनलोड कर रखा है।
-गांव में बैठा एक डाक्टर्स जिसे किसी मरीज के इलाज के सम्बन्ध में कोई जानकारी चाहिए तो वो उस मरीज के इलाज से जुड़े दस्तावेज को बाकी डाक्टर्स से शेयर कर सकता है। उससे सलाह ले सकता है।
-इसके लिए उस डाक्टर्स को मरीज की मेडिकल रिपोर्ट को एप के जरिये पोस्ट करनी होती है। रिपोर्ट को पोस्ट करने के बाद उस एप को यूज कर रहे सभी वैरीफाईड डाक्टर्स तक वो पहुंच जाती है।
-डाक्टर्स उस रिपोर्ट को देखने के बाद एक दूसरे से मरीज के केस सम्बन्धी जानकारी आपस में शेयर करते है। ये एप देश भर के डाक्टर्स को मरीज के केस और इलाज से सम्बन्धी जानकारी आपस में शेयर करने में मदद करता है।

 इतने मरीजों को मिल चुका है फायदा
निपुन बताते है, इस एप से सवा दो लाख डाक्टर्स जुड़े है। अगर इस एप के अंदर किसी डाक्टर की कोई क्वैरिज पोस्ट होती है तो अन्य डाक्टर्स उसका क्विक रिप्लाई करते है।
-इस एप की मदद से डाक्टर्स आज तक ढ़ाई लाख मरीजों को बेहतर इलाज मुहैया करा चुके है। इस एप को डाउनलोड करने वाले डाक्टर्स की संख्या बढ़ती ही जा रही है।

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Source: Hindi Newstrack