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यूनिवर्सिटी में प्रदर्शन करना अभिव्यक्ति की आजादी

रामजस कॉलेज के बाहर छात्रों द्वारा की गई नारेबाजी और प्रदर्शन को लेकर लगाई गई याचिका पर सुनवाई करते हुए तीस हजारी कोर्ट ने कहा कि रामजस कॉलेज मामले में विरोध प्रदर्शन के पीछे और भी वजह हो सकती है. प्रदर्शन से ये साफ नहीं होता है कि छात्रों की मंशा दंगा-फसाद करने की थी. कोर्ट ने यह टिप्पणी रामजस कॉलेज मे देश विरोधी नारे लगाने से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान की.

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यूनिवर्सिटी में इकट्टा होकर प्रदर्शन करना अभिव्यक्ति की आजादी के तहत किया गया काम भी हो सकता है. इससे यह मतलब कैसे निकाला जा सकता है कि छात्र वहां दंगा फसाद करने के लिए ही जमा हुए थे? याचिकाकर्ता की तरफ से तर्क दिया गया कि इतनी बड़ी संख्या में रामजस कॉलेज के बाहर वामपंथी छात्रों का एकत्र होना सोची समझी घटना थी, जिसका मकसद दंगा फसाद करना था.

पुलिस ने माना नहीं हुआ दंगा फसाद

पुलिस ने भी अपनी रिपोर्ट में यह बात मानी है कि वहां दंगा फसाद हुआ था, लेकिन देश विरोधी नारे लगे थे. मामले में पुलिस ने पूरी लापरवाही बरती है और अभी तक जांच नहीं की गई. पुलिस ने सिर्फ 22 फरवरी की घटना पर एफआईआर दर्ज की है, लेकिन 21 फरवरी को लगे देश विरोधी नारे और फसाद को दरकिनार कर दिया. इस पर कोर्ट ने कहा कि जांच में समय लगता है और इस मामले में गहन जांच की जरूरत है.

पुलिस ने जुटाए 30 रॉ फुटेज

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने इस मामले में करीब 30 रॉ फुटेज जुटाए हैं और उनकी जांच की जा रही है. साथ ही पुलिस अपनी एटीआर और 22 तारीख को दर्ज हुई एफआईआर के आधार पर आरोपों की जांच कर रही हैं. इसके अतिरिक्त 21 तारीख के मामले की भी पड़ताल की जाएगी. कोर्ट ने दोनों पक्षों को सात अक्टूबर को पेश होकर मामले में विस्तृत चर्चा करने का मौका दिया है.

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Source: Purvanchal media
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यूनिवर्सिटी में प्रदर्शन करना अभिव्यक्ति की आजादी