जियो इंस्टीट्यूट : सूत न कपास एमिनेन्स की आस  

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लखनऊ : मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा  विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की बंदी की मंशा और हायर एजुकेशन कमीशन की घोषणा के बाद अचानक मुकेश अंबानी के जियो इंस्टीट्यूट को देश के 6 उत्कृष्ट संस्थानों में शामिल करने के ऐलान ने सरकार के उच्च शिक्षा के नजरिये मामले पर सवाल खड़ा कर दिया है। क्योंकि अभी ये संस्थान जमीन पर कहीं नहीं है। लेकिन रिलायंस कंपनी के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने जियो विश्वविद्यालय के लिए 8 सदस्यों वाली टीम की घोषणा की। जियो इंस्टीट्यूट को उत्कृष्ट संस्थान का दर्जा मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने दिया है। यह भी कम हैरतअंगेज नहीं है कि उत्कृष्ट संस्थानों में निजी क्षेत्र के 3 संस्थानों को जगह मिल गई है।

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावेडकर ने सभी उत्कृष्ट संस्थानों को ट्विटर पर बधाई दी। लेकिन उन्हें जियो का कोई ट्विटर हैंडल ही नहीं मिला। उत्कृष्ट संस्थानों में आने वाले संस्थानों को मानव संसाधन विकास मंत्रालय विशेष फंड और स्वायत्तता देता है। यही नहीं, ऐसे संस्थानों को विदेशों से सहभागिता करने के लिए सरकार या यूजीसी की अनुमति जरुरी नहीं होगी। वो केवल विदेश मंत्रालय द्वारा प्रतिबंधित देशों से सहभागिता नहीं कर सकते।

गौरतलब है कि सरकार की समिति ने इससे अच्छे 5 उत्कृष्ट संस्थानों में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली और मुंबई आईआईएससी बेंगलुरु, मनिपाल एकेडमी को शामिल किया है। इसके बाद धरातल पर न उतरने वाले जियो इंस्टीट्यूट को पूरी तरह से दस सालों में तैयार करने का खाका खींचा गया है। पहले साल में सभी जरुरी अनुमति हासिल कर 8 सौ एकड़ में इंस्टीट्यूट बनाने का काम शुरू किया जाएगा।

2016 में जब विनय शील ओबराय मानव संसाधन मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग के सचिव थे। तब यह विश्व स्तरीय संस्थान कार्यक्रम और इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेन्स कार्यक्रम की घोषणा उस साल के बजट में हुई थी। जिसके लिए बाकायदा मानव संसाधन मंत्रालय व प्रधानमंत्री कार्यालय के बीच विमर्श भी हुआ था। आईएएस अफसर को अपनी सेवानिवृत्त के बाद किसी भी नई नौकरी के लिए कूल ऑफ चाहिए होता है। 1979 बैच के आईएएस अफसर विनय शील ओबराय फरवरी 2017 में रिटायर हुए| और मार्च 2018 में उन्होंने रिलायंस ज्वाइन किया।

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक अगस्त 2017 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने यूजीसी के इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेन्स  डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी रेगुलेशन को मंजूरी दी। जिसका लक्ष्य देश के दस सरकारी और दस निजी उच्च शिक्षण संस्थानों को विश्वस्तरीय बनाना था। क्योंकि उच्च शिक्षा में भारत बहुत नीचे है।

इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेन्स के लिए सिर्फ वही उच्च शिक्षण संस्थान आवेदन कर सकते हैं। जो ग्लोबल रैंकिंग में 500 के अन्दर आए हों या जिन्हें नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क में 50 के अन्दर जगह मिली हो। जबकि मुकेश अंबानी के सपने के मुताबिक उनका जियो इंस्टीट्यूट दस सालों के बाद 100 श्रेस्ठ विश्वविद्यालय में स्थान बनाने में सफल होगा। सिर्फ इतना ही नहीं अपनी स्थापना के 13 वें साल में वो ग्लोबल रैंकिंग में 500 के अन्दर स्थान बनाएगा। लेकिन मानव संसाधन मंत्रालय को उनकी बातों पर इतना विश्वास हुआ कि चयन समिति के अध्यक्ष एन गोपाल स्वामी कह उठे,’हमने जियो इंस्टीट्यूट को ग्रीनफील्ड में चुना है, जो नए संस्थानों के लिए होती है, उनका कोई इतिहास नहीं होता। हमने प्रपोजल देखा। चुन लिया। उनेक पास स्थान के लिए प्लान है। उन्होंने फंडिंग की है। उनके पास कैम्पस है। और इस कैटेगरी के लिए सब कुछ है।’ इसके लिए देश के 114 उच्च शिक्षा संस्थानों ने आवेदन किया था। इसमें 74 सरकारी और 40 निजी क्षेत्र के संस्थान थे। 11 केंद्रीय व 27 राज्य विश्वविद्यालय थे।

चयन समिति के अध्यक्ष पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एन गोपाल स्वामी व सदस्य यूनिवर्सिटी ऑफ हूस्टन की रेनू खटोर, मैनेजमेंट डेवलेपमेंट के प्रीतम सिंह तथा हॉवर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर तरुण खन्ना हैं। अपने बचाव के लिए सरकार ने यह रास्ता निकाला है कि जियो इंस्टीट्यूट को तीन साल के लिए लेटर ऑफ़ इंटेंट दिया जायेगा। इस दौरान वो सभी लक्ष्य पूरे कर लेंगे तो उन्हें आईओई का दर्जा मिलेगा।

 

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Source: Hindi Newstrack