500 में से एक भी फाइट नहीं हारा था ये पहलवान, कहलाता था रुस्तम-ए-हिंद

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लखनऊ: पंजाब के अमृतसर जिले में जन्मे दारा सिंह की आज पुण्यतिथि है। उन्होंने अपने समय के बड़े-बड़े पहलवानों को अखाड़े की धूल चटाई थी। रुस्तम-ए-हिन्द दारा सिंह को रेसलिंग के इतिहास में कई मुकाबलों के लिए याद किया जाता रहेगा लेकिन एक ऐसा भी मुकाबला था जिसने इस खेल के इतिहास में ऐसी मिसाल बना दी जो कभी भूली नहीं जा सकती।

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50 के दशक में एक मुकाबले में दारा सिंह ने अपने से कहीं ज्यादा वजनी ऑस्ट्रेलिया के किंग कांग को पहले तो रिंग में पटखनी दी और फिर उन्हें उठाकर रिंग के बाहर ही फेंक दिया। आपको बता दें तब दारा सिंह का वजन 130 किलो था जबकि किंग कांग 200 किलो के थे।

ऐसे बने वर्ल्ड चैंपियन

  • 1947 में दारा सिंह ने ‘भारतीय स्टाइल’ की कुश्ती में मलेशियाई चैंपियन त्रिलोक सिंह को हराकर कुआलालंपुर में मलेशियाई कुश्ती चैम्पियनशिप जीती।
  • पांच साल तक फ्री स्टाइल रेसलिंग में दुनिया भर के पहलवानों को चित्त करने के बाद दारा सिंह भारत आकर 1954 में भारतीय कुश्ती चैंपियन बने।
  • इसके बाद उन्होंने कॉमनवेल्थ देशों का दौरा किया और विश्व चैंपियन किंग कॉन्ग को भी धूल चटा दी।
  • दारा सिंह की लोकप्रियता को देख कनाडा के विश्व चैंपियन जार्ज गार्डीयांका और न्यूजीलैंड के जॉन डिसिल्वा ने 1959 में कोलकाता में कॉमनवेल्थ कुश्ती चैंपियनशिप में उन्हें खुली चुनौती दे डाली।
  • यहां भी दारा सिंह ने दोनों पहलवानों को हराकर विश्व चैंपियनशिप का ख़िताब हासिल किया।
  • अमेरिका के विश्व चैंपियन लाऊ थेज को 29 मई 1968 को पराजित कर फ्रीस्टाइल कुश्ती के विश्व चैंपियन बन गए।

500 से ज्यादा पहलवानों को हराया

  • 1983 में कुश्ती से रिटायरमेंट लेने वाले दारा सिंह ने 500 से ज़्यादा पहलवानों को हराया और ख़ास बात ये कि ज्यादातर पहलवानों को दारा सिंह ने उन्हीं के देश में जाकर चित किया।
  • 1966 में दारा सिंह को रुस्तम-ए-पंजाब और 1978 में रुस्तम-ए-हिंद के ख़िताब से नवाजा गया।

कभी नहीं हारे थे दारा सिंह

  • दारा सिंह ने करीब 36 साल तक अखाड़े में पसीना बहाया और अब तक लड़ी कुल 500 कुश्तियों में से दारा सिंह एक भी नहीं हारे, जिसकी बदौलत उनका नाम ऑब्जरवर न्यूजलेटर हॉल ऑफ फेम में दर्ज है।
  • दारा सिंह की कुश्ती के दीवानों में भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू समेत कई दूसरे प्रधानमंत्री भी शामिल थे।

बचपन से ही था पहलवानी के दीवाने

  • बचपन से ही पहलवानी के दीवाने रहे दारा सिंह का पूरा नाम ‘दारा सिंह रंधावा’ है।
  • ‘सूरत सिंह रंधावा’ और ‘बलवंत कौर’ के बेटे दारा सिंह का जन्म 19 नवंबर 1928 को जाट-सिख परिवार में हुआ था। दारा सिंह को बचपन से ही पहलवानी का शौक़ था।
  • अपनी किशोर अवस्था में दारा सिंह दूध व मक्खन के साथ 100 बादाम रोज खाकर कई घंटे कसरत व व्यायाम में गुजारा करते थे।

2012 में हुआ था निधन

  • दारासिंह को 7 जुलाई 2012 को दिल का दौरा पड़ गया था। जिसके बाद उन्हें मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अस्पताल में भर्ती कराया गया। लेकिन सघन चिकित्सा के बावजूद लाभ न होता देख चिकित्सकों ने भी हाथ खड़े कर दिए थे।
  • तब उनके परिजनों के आग्रह पर अस्पताल से उन्हे छुट्टी दी गई और जिसके बाद उनको मुंबई स्थित अपने निवास पर लाया गया। जहां उन्होने 12 जुलाई 2012 की सुबह अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर सुनकर सारा देश स्तब्ध हो गया।

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Source: Hindi Newstrack