छत्तीसगढ़ : यहां जलप्रपात गाते हैं- आ गयी बलखा गई लहरा गई लट खोल कर

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बस्तर हो या सरगुजा। दंतेवाड़ा हो या कोरबा। छत्तीसगढ़ को आदिवासी और नकसी हिंसा की सुर्खियां देने वाले इन जिलों में ऐसा और भी बहुत कुछ है जो इस प्रदेश को विशिष्ट बना देता है। छत्तीसगढ़ के जलप्रपात यू ही नहीं गाते हैं –
सरगुजा के बदलो के साथ जो पहुची हवा
गुनगुनाती संदली सिहरन ने मुझसे यू कहा
आ गयी बलखा गयी लहरा गयी लट खोल कर
हो सके तो थाम लो बहती नदी का कारवां।

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यह वही सरगुजा है जहा से महाकवि कालिदास ने मेघो के जरिये सन्देश भेज कर साबित किया था कि उनके सन्देश अवश्य आर्द्र सिहरन से उनकी नयका को जगा देंगे। कालिदास ने इस जगह को यूओ ही नहीं चुना। आज भी सरगुजा की चर्चा आते है बहुत कुछ याद आने लगता है। जिन लोगो ने मेघदूत पढ़ा है उन्हें भला सरगुजा कैसे भूल सकता है। सरगुजा तो सच में मेघो का परिणयस्थल है। इतने मेघ यहाँ से प्रणय यात्रा पर निकलते हैं तो स्वाभाविक है कि वे अपने निशान भी देते हैं। इसी सरगुजा जिले के नलंगी नामक स्थान पर रेहन्द नदी पर स्थित है रक्सगण्डा जलप्रपात। इस जलप्रपात को देख कर विश्वास हो जाता है कि कालिदास के मेघ यूओ ही ऐतिहासिक नहीं हैं।यहां नदी का पानी ऊंचाई से गिरकर एक संकरे कुण्ड में समाता है । इस कुण्ड की गहराई बहुत अधिक है। इस कुण्ड से 100 मीटर लंबी सुरंग निकलती है। यह सुरंग जहां समाप्त होती है वहां से रंग-बिरंगा पानी निकलता रहता है। अपनी इस विचित्रता के कारण यह जलप्रपात लोगों को एक अनोखे प्राकृतिक सौंदर्य का अहसास कराता है।

चित्रकोट जलप्रपात भारत का सबसे ‘बड़ा और चौड़ा’

छत्तीसगढ़ प्रदेश में स्थित चित्रकोट जलप्रपात भारत का सबसे बड़ा और चौड़ा जलप्रपात है। इस जल प्रपात की ऊँचाई 90 फुट है।जगदलपुर से 39 किमी दूर इन्द्रावती नदी पर यह जलप्रपात बनता है। समीक्षकों ने इस प्रपात को आनन्द और आतंक का मिलाप माना है। 90 फुट ऊपर से इन्द्रावती की ओजस्विन धारा गर्जना करते हुये गिरती है। इसके बहाव में इन्द्रधनुष का मनोरम दृश्य, आल्हादकारी है। यह बस्तर संभाग का सबसे प्रमुख जलप्रपात माना जाता है। जगदलपुर से समीप होने के कारण यह एक प्रमुख पिकनिक स्पाट के रूप में भी प्रसिद्धि प्राप्त कर चुका है। अपने घोडे की नाल समान मुख के कारण इस जाल प्रपात को भारत का निआग्रा भी कहा जाता है। हालांकि छत्तीसगढ़ राज्य में और भी बहुत-से जलप्रपात हैं, किन्तु चित्रकूट जलप्रपात सभी से बड़ा है।आप्लावित रहने वाला यह जलप्रपात पौन किलोमीटर चौड़ा और 90 फीट ऊँचा है।

वर्षाकाल में रक्तिम और गर्मियों में सफेद

इस जलप्रपात की विशेषता यह है कि वर्षा के दिनों में यह रक्त लालिमा लिए हुए होता है, तो गर्मियों की चाँदनी रात में यह बिल्कुल सफ़ेद दिखाई देता है।जगदलपुर से 40 कि.मी. और रायपुर से 273 कि.मी. की दूरी पर स्थित यह जलप्रपात छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा, सबसे चौड़ा और सबसे ज्यादा जल की मात्रा प्रवाहित करने वाला जलप्रपात है।इस प्रपात से इन्द्रावती नदी का जल प्रवाह लगभग 90 फुट ऊंचाई से नीचे गिरता है। सधन वृक्षों एवं विंध्य पर्वतमालाओं के मध्य स्थित इस जल प्रपात से गिरने वाली विशाल जलराशि पर्यटकों का मन मोह लेती है।

भारत का नियाग्रा है चित्रकोट

‘भारतीय नियाग्रा’ के नाम से प्रसिद्ध चित्रकूट प्रपात वैसे तो प्रत्येक मौसम में दर्शनीय है, परंतु वर्षा ऋतु में इसे देखना अधिक रोमांचकारी अनुभव होता है। वर्षा में ऊंचाई से विशाल जलराशि की गर्जना रोमांच और सिहरन पैदा कर देती है।आकार में यह झरना घोड़े की नाल के समान है और इसकी तुलना विश्व प्रसिद्ध नियाग्रा झरनों से की जाती है। वर्षा ऋतु में इन झरनों की ख़ूबसूरती अत्यधिक बढ़ जाती है।जुलाई-अक्टूबर का समय पर्यटकों के यहाँ आने के लिए उचित है।चित्रकोट जलप्रपात के आसपास घने वन विराजमान हैं, जो कि उसकी प्राकृतिक सौंदर्यता को और बढ़ा देती है।रात में इस जगह को पूरा रोशनी के साथ प्रबुद्ध किया गया है। यहाँ के झरने से गिरते पानी के सौंदर्य को पर्यटक रोशनी के साथ देख सकते हैं।अलग-अलग अवसरों पर इस जलप्रपात से कम से कम तीन और अधिकतम सात धाराएँ गिरती हैं।

छत्तीसगढ़ के प्रमुख जलप्रपात :

तमरा घूमरा झरना (जगदलपुर), तीरथगढ़ जलप्रपात (जगदलपुर), चित्राशारा जलप्रपात (जगदलपुर), थमदा घूमर जलप्रपात (बस्तर), चित्रकोट (बस्‍तर), मेंद्री घूमर जलप्रपात (जगदलपुर), बोधघाट सात धारा (दंतेवाड़ा), मलांझ कुडुम (कांकेर), चर्रे-मर्रे जलप्रपात (कांकेर), अमृतधारा (कोरिया), रमदहा (कोरिया), गवरघाट (कोरिया), अकुरी नाला (कोरिया), स्वाई वाटरफॉल (सरगुजा), केंदई वाटरफॉल (सरगुजा), राजपुरी वाटरफॉल (जशपुर), दनगिरी वाटरफॉल (जशपुर), रानीदाह वाटरफॉल (जशपुर), हादावाड़ा जल प्रपात (नारायणपुर), सरभंजा (मैनपाट), देवधारा, घटारानी, जतमई (गरियाबंद), गुल्लू फॉल (जशपुर)।

यहाँ कुछ प्रमुख जलप्रपातों के बारे में अलग अलग दृष्टि डाल लेना समीचीन लगता है। इन जलप्रपातों के कारण छत्तीसगढ़ की एक बहुत ही विशिष्ट पहचान भी बनती है। जिस छत्तीसगढ़ को केवल आदिवासी और नक्सली हिंसा के लिए सुर्खियां दी जाती हैं वह छत्तीसगढ़ जलप्रपातों का संगम स्थल भी है , यह बहुत ही काम लोग जानते हैं।

कांगेर धारा जलप्रपात :

बस्तर जिले में कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में स्थित इस जलप्रपात की ऊंचाई 20 फुट है। कांगेर घाटी से होकर गुजरने वाली कांगेर नदी पर स्थित है इस नदी के भैसादरहा नामक स्थान पर मगमच्छ प्राकृतिक रूप से पाए जाते हैं।

तीरथगढ़ जलप्रपात :

यह जलप्रपात जगदलपुर से 29 किमी. दूरी पर कांगेर घाटी में स्थित है । यह राज्य का सबसे ऊंचा जलप्रपात है। यह जलप्रपात 300 फुट ऊपर से पानी नीचे गिरती है। यह छत्तीसगढ़ का सबसे ऊँचा जलप्रपात है। तीरथगढ़ जलप्रपात को देखने का सबसे अच्छा समय बारिश के मौसम के साथ-साथ अक्टूबर से अपैल तक का है। पूर्ण पढ़ें

हाथीदरहा जलप्रपात :

जगदलपुर से लगभग 45 किमी की दूरी पर स्थित है। गांव के निकट मटरानाला पर ऊंचाई से गहरी खाई में गिरने वाले इस जलप्रपात की खूबसूरती दूर-दूर तक फैली खाईयां और बढ़ा देती है । इस मेंदरी धूमर जलप्रपात भी कहा जाता है।

महादेव धूमर जलप्रपात : जगदलपुर से करीब 27 कि.मी. दूरी पर स्थित ग्राम मावलीभाठा में महादेव घूमर स्थित है । इसे पुजारी पारा जलप्रपात भी कहा जाता है । यह कई शिलाखंडों से होता हुआ 15-20 फुट ऊंचाई से गहरी खाई में चला जाता है।

मंडवा जलप्रपात:

बस्तर जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 43 पर जगदलपुर से 22 किमी. दूरी पर कोलाब नदी पर गुप्तेश्वर नामक स्थान पर यह सुन्दर जलप्रपात स्थित है।

चित्रधारा जलप्रपात :

बस्तर जिले में जगदलपुर से 13 कि.मी. दूर करंजी गांव के समीप एक पहाड़ी से खंड-खंड में गिरते पानी वाला यह आकर्षक जलप्रपात है।

सप्तधारा जलप्रपात :

दन्तेवाड़ा में इंद्रावती नदी पर स्थित सप्तधारा जलप्रपात छत्तीसगढ़ का अत्यंत रमणीय पर्यटन स्थल है । यह जलप्रपात बोधघाट पहाड़ी से गिरते हुए क्रमश: बोध धारा, कपिलधारा पाण्डव धारा, कृष्णधारा शिव,धारा बाणधारा और शिवार्चन धारा नामक सात धाराओं का निर्माण करता है। सघन वन में होने के कारण सप्तधार जलप्रपात की रमणीयता और भी बढ़ जाती है।

तामड़ा जलप्रपात :

यह जलप्रपात बस्तर जिले के चित्रकोट के तीन कि.मी. पहले दक्षिण-पश्चिम दिशा में तामड़ा बहार नदी पर स्थित है यहां का पानी करीब 125 फुट की ऊंचाई से नीचे गिरता है।

रानीदरहा जलप्रपात :

यह जलप्रपात दंतेवाड़ा जिले की कोंटा तहसील में स्थित है। विकासखंड मुख्यालय छिंदगड़ से 30 कि.मी. दूरी पर शबरी पार गांव के समीप स्थित है। रानी दरहा के आसपास शबरी नदी का जल गहरा होने के कारण धसा हुआ नजर आता है।

चर्रे-मर्रे जलप्रपात :

नारायणपुर के अंतागढ़-आमाबेड़ा वनमार्ग पर पिंजारिन घाटी में यह जलप्रपात स्थित है । उत्तर पश्चिम दिशा में जलप्रपात का गिरता हुआ पानी अलग-अलग कुंडों के रूप में एकत्रित होकर दक्षिण दिशा में लंबा फासला तय कर कोटरी नदी में मिलता है ।

मलजकुण्डलम जलप्रपात :

यह जल प्रपात कांकेर जिला मुख्यालय से दक्षिण-पश्चिम में 17 कि.मी. की दूरी पर दूधनदी पर स्थित है। यहां पहाड़ी पर स्थित एक कुंड से नीचे गिरती जलधारा अलौकिक दृश्य पैदा करती है। साफ-सुथरा जल नीचे गिरते समय दूधिया धारा का अहसास कराता है।

खुरसेल जलप्रपात :

नारायणपुर जिले में स्थित खुरसेल घाटी अंग्रेजों के जमाने से अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्घ रहा है । यहां गुड़ाबेड़ा से करीब 9 कि.मी. की दूरी पर स्थित खुरसेल जलप्रपात में करीब 400 फुट की ऊंचाई से गिरते हुए कई खण्डों में कुण्डों का निर्माण करता हुआ। यहां एक ओर वृहत आकार के शिलाखण्डों की सुदरता है तो दूसरी ओर तेज चट्टानी ढाल से नीचे गिरता पानी ।

मल्गेर इंदुल जलप्रपात :

यह जलप्रपात दंतेवाड़ा के कोंटा तहसिल में स्थित है । बैलाडीला पहाडिय़ों से निकलने वाली मल्गेर नदी पर स्थित इस पर्वतीय जलप्रपात का प्राकृतिक सौंदर्य अद्भुत है।

बोग्तुम जलप्रपात:

दंतेवाड़ा जिले में भोपालपटनम् के निकट पोड़सपल्ली गांव की पहाडिय़ों मेंस्थित है।

पुलपाड़ इंदुल जलप्रपात :

बैलाडीला से पहले दंतेवाड़ा जिला मुख्यालय से सुकमा मार्ग पर नकुलनार के निकट पुलपाड़ गांव में स्थित झरना को पुलपाड़ इंदुल के नाम से जाना जाता है । यहां पहाडिय़ों से गिरती कई धाराओं में बंटी जलराशि जलप्रपात के सौंदर्य को कई गुना बढ़ा देती है ।

केंदई जलप्रपात:

कोरबा जिले के साल के घने वन प्रदेश से घिरे केन्दई गांव में यह जल प्रपात स्थित है यहां एक पहाड़ी नदी करीब 200 फुट की ऊंचाई से नीचे गिरकर इस जलप्रपाच का निर्माण करती है। इस जलप्रपात को पास में स्थित विशाल शिलाखंड से इस जलप्रपात को देखना एक अलग ही अनुभव प्रदान करता है।

कोठली जलप्रपात :

अंबिकापुर के विख्यात दर्शनीय स्थल डीपाडीह से 15 कि.मी. दूर उत्तरीदिशा में यह जलप्रपात स्थित है । कन्हार नदी में स्थित कोठली जलप्रपात अपने प्राकृतिक सौंदर्य के कारण बरबस ही अपनी ओर ध्यान खींच लेता है ।

अमृतधारा जलप्रपात:

कोरिया जिले के मनेन्द्रगढ़ तहसील में यह मनोहारी जलप्रपात स्थित है। यहां कोरिया की पहाडिय़ों से निकलने वाली हसदो नदी अमृतधारा जलप्रपात का निर्माण करती है। इस जलप्रपात का पानी स्वास्थ्य की दृष्टि से लाभदायी होने के कारण इस जलप्रपात का अपना महत्व है।

रानीदाह जलप्रपात :

यह जलप्रपात जशपुर जिला मुख्यालय से 15 कि.मी. की दूी पर स्थित है। इस जलप्रपात के समीप प्रसिद्घ महाकालेश्वर मंदिर और ऐतिहासिक स्थल पंचमैया होने के कारण इसका धार्मिक महत्व भी है । रानीदाह जलप्रपात जून से फरवरी तक चालू रहता है।

राजपुरी जलप्रपात :

जशपुर जिले के बगीचा विकासखंड मुख्यालय से तीन कि.मी. की दूरी पर यह जलप्रपात स्थित है । यह बारहमासी जलप्रपात है, इसलिए गरमी के दिनों में इसकी सुंदरता बरकरार रहती है । परंतु बारिश के सीजन में इसका प्राकृतिक सौंदर्य और भी निखर जाता है।

दमेरा जलप्रपात :

जशपुर जिले से आठ किमी. की दूरी पर स्थित श्री नाला पर स्थित है दमेरा जलप्रपात । नैसर्गिक खूबसूरती वाले इस जलप्रपात को निहारने का सबसे अच्छा समय जुलाई से दिसंबर तक है।

कुन्दरू घाघ:

सरगुजा जिले की स्थानीय बोली में जलप्रपात को घाघी कहा जाता है। पिंगला नदी जो तामोर पिंगला अभयारण्य के हृदय स्थल से प्रवाहित होती है, इसमें कुदरू घाघ एक मध्य ऊँचाईका सुन्दर जल प्रपात रमकोला से 10 कि.मी.की दूरी पर घने वन के मध्य में स्थित है। यह जल प्रपात दोनों ओर से घने जंगलों से घिरा हुआ है। यह स्थल पारिवारिक वन भोज के लिए मनमोहक, दर्शनीय एवं सुरक्षित सुगम पहुंच योग्य है।

गोडेना जलप्रपात :

बीजापुर जिले में पामेड़ अभयारण्य के अंतर्गत यह जलप्रपात कर्रलाझर से 8 कि.मी. की दूरी पर स्थित है।

नीलकंठ जलप्रपात बसेरा :

यह जलप्रपात गुरूघासीदास राष्ट्रीय उद्यान के अंतर्गत सघन वन से घिरा हुआ है यहां लगभग 100 फुट की ऊँचाई से पानी नीचे गिरता है । यहां स्थित विशाल शिवलिंग भी आकर्षण का प्रमुख केन्द्र है।

पवई जलप्रपात :

सरगुजा जिलें में सेमरसोत अभयारण्य में यह जलप्रपात चनान नदी पर स्थित है । यह जलप्रपात लगभग 100 फुट से भी ज्यादा ऊँचाई से गिरता है। बलरामपुर से जमुआटांड तक वाहन से जाया जा सकता है।

बेनगंगा जलप्रपात :

सुरगुजा जिले में बेनगंगा नदी पर कुसमी के निकट स्थित है।

भेड़िया पत्थर जलप्रपात :

सुरगुजा जिले में कुसमी चान्दो मार्ग पर 30 कि.मी. की दूरी पर ईदरी ग्राम से 3 कि.मी. दूर जंगल के बीच भेडिय़ा नाला में यह जलप्रपात स्थित है। इसकी ऊंचाई करीब 200 फिट है। पूर्ण पढ़ें

रानी दहरा :

कबीरधाम जिला मुख्यालय से जबलपुर मार्ग पर करीब 35 कि.मी. दूरी पर स्थित है। यह क्षेत्र भोरमदेव के अंतर्गत आता है। रानीदहरा मैकल पर्वत के आगोस में स्थित है। तीनों ओर पहाड़ों से घिरे इस स्थान पर करीब 90 फुट की ऊंचाई पर स्थित है। रियासतकाल में यह स्थल राजपरिवार के लोगों का प्रमुख मनोरंजन स्थल हुआ करता था।

सेदम जलप्रपात / राम झरना :

यह झरना अंबिकापुर-रायगढ़ मार्ग पर अंबिकापुर से 45 कि.मी. की दूरी पर सेदम नामक गांव से 2 कि.मी. की दूरी पर पहाडिय़ों के बीच स्थित है इसे राम झरना के नाम से भी जाना जाता है। यहां स्थित शिव मंदिर में प्रत्येक वर्ष शिवरात्रि पर मेला लगता है।

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