12 किमी पैदल चलने के बावजूद एंबुलेंस तक नहीं पहुंच पाई गर्भवती, नवजात की मौत

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आंध्र प्रदेश के विजयानगरम में आठ महीने की गर्भवती पत्नी को प्रसव पीड़ा होने पर अस्पताल पहुंचाने के लिए पति को 12 किलोमीटर पैदल चलना पड़ा. लेकिन फिर भी वो समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाया  रास्ते में ही डिलीवरी हो गई, जिससे नवजात बच्चे की मौत हो गई. जबकि पत्नी की हालत गम्भीर है.
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यह घटना विजयानगरम के आदिवासी इलाके की है. दरअसल, यहां एक आठ माह की गर्भवती महिला को आकस्मित प्रसव पीड़ा प्रारम्भ हो गई. लेकिन महिला का घर पहाड़ पर होने की वजह से वहां आने-जाने की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है. यहां तक आने के लिए कोई सड़क भी नहीं बनी है.हालांकि घर से 12 किलोमीटर दूर पहाड़ के नीचे सड़क पर एंबुलेंस खड़ी थी. अब सबसे बड़ी दुविधा थी वहां तक गर्भवती को पहुंचाना.

इसके लिए महिला के पति ने एक बांस की डलिया बांधी  उसे कंधों पर लेकर पहाड़ से नीचे एंबुलेंस तक पहुंचने के लिए चल दिया. लेकिन रास्ते में ही महिला की डिलीवरी हो गई. मौके पर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने के कारण नवजात बच्चे की मौके पर ही मौत हो गई. जबकि महिला को गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाया गया.

आदिवासी इलाकों में कार्य करनेे वाले एक एनजीओ का कहना है कि गवर्नमेंट को ऐसे दुर्गम इलाकों में गर्भवती स्त्रियों के लिए न्यूट्रिशियन सेंटर बनाने की आवश्यकता है. साथ ही सातवें माह से डिलीवरी होने तक स्त्रियों को डॉक्टरों की निगरानी में रखा जाए, ताकि आगे स्थिति पैदा न हो.

Source: Purvanchal media