NH-56 पर बन रहा था फोरलेन, डीएम की जांच में 200 करोड़ से ज्यादा के घोटाले की आशंका

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सुल्तानपुर: राजधानी दिल्ली से लेकर सूबे तक के सत्ता परिवर्तन में भ्रष्ट्राचार का खात्मा अहम मु्द्दों में एक था। क्या मोदी-योगी राज आने के बाद भ्रष्ट्राचार ख़त्म हो गया और भ्रष्ट्राचारी सलाखों के पीछे पहुंच गए?  हरगिज़ नहीं, भ्रष्ट्राचार की जो जड़ें कल तक फैली थी उसमें शाखें आज भी निकल रही हैं। जी हां, ये हम नहीं कह रहे बल्कि सुल्‍तानपुर के डीएम विवेक कुमार की जांच में भ्रष्ट्राचार की ताज़ा शाखें लखनऊ-वाराणसी नेशनल हाइवे पर बन रहे फोरलेन में सुल्तानपुर में ही निकल आई हैं। डीएम सुल्तानपुर द्वारा पत्रावली परीक्षण के दौरान हुई शुरुवाती जांच में 200 करोड़ से ज्यादा रुपयों का घोटाला होने की आशंका जताई जा रही है।

75 गांव हो रहे प्रभावित

गौरतलब है कि सुल्तानपुर में एनएच 56 पर बन रहे फोरलेन की लंबाई तकरीबन 65 किलोमीटर है, जिसमे कुल 75 गांव प्रभावित हो रहे हैं। इन प्रभावित गांव के करीब 10 हज़ार काश्तकारों को 1233 करोड़ रुपये मुआवजे के तौर पर दिये जाने हैं। अब तक 1137 करोड़ रुपयों का मुआवजा वितरित किया जा चुका है। डीएम विवेक कुमार के अनुसार कुछ दिनों पहले कुछ काश्तकार आर्बिटेशन का मामला उनके पास लेकर आये थे।  काश्तकारों का कहना था कि उसी गांव के कुछ लोगों को जिस हिसाब से मुआवजा दिया गया उस हिसाब से उन्हें नहीं मिल रहा है। जिस पर डीएम ने स्वयं पत्रावलियों का परिक्षण कराया। शुरुआती जांच में पता चला कि अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से उन काश्तकारों को जरुरत से ज्यादा मुआवजा दे दिया गया। डीएम ने बताया कि फोरलेन मुवावजे में वितरण को लेकर 4 श्रेणी निर्धारित की गई थी। जिसमे नेशनल हाइवे, स्टेट हाइवे, प्रांतीय मार्ग और चकमार्ग के हिसाब से मुआवजे का वितरण किया जाना था। लेकिन भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों और कर्मचारियों ने मुआवजा वितरण में ऐसी बाजीगरी किया कि जांच के दौरान डीएम भी दंग रह गये।

ये था पूरा प्रोजेक्‍ट

जिले में एनएच 56 पर कुल 5 बाईपास बनने थे, जिसमे 75 में से 38 गांव प्रभावित हो रहे थे। इन 38 गांव पर न ही कोई नेशनल हाइवे है और न ही स्टेट हाइवे। बावजूद इसके इन 38 गांव के करीब 6 हज़ार काश्तकारों को करीब 200 करोड़ से ज्यादा का भुगतान कर दिया गया। डीएम ने बताया कि इसकी पूरी जिम्मेदारी सक्षम अधिकारी की थी जिन्हें स्थलीय निरीक्षण कर तहसील से गाटा सख्या मिलाकर तब मुआवजे की  घोषणा करनी चाहिये थी। लेकिन भष्ट अधिकारियों-कर्मचारियों ने ऐसा कुछ नहीं किया। फिलहाल जिलाधिकारी ने उन ज्यादा लिये हुये करीब 6 हजार काश्तकारों से 200 करोड़ रुपयों के रिकवरी की बात कही है। साथ ही साथ डीएम ने मामले में दोषी पाये जाने वाले अधिकारियो-कर्मचारियों के खिलाफ कठोर के निर्देश दिये हैं।

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Source: Hindi Newstrack