आखिर सावन के माह मे शिव का क्यों किया जाता है जलाभिषेक

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लाइफस्टाइल डेस्क। सावन का महीना आते ही लोग शिव की अराधना और भक्ति में लग जाते है। माना जाता है कि सावन का महीना भगवान शिव का होता है। लोग शिव को प्रसन्न करने के लिए सावन के हर सोमवार को व्रत रखते है और शिव का दूध से जलाभिषेक करते है, लेकिन इस माह में शिव के जलाभिषेक करने का पीछे का राज काफी कम लोग ही जानते है। आज हम आपको ​शिव के जलाभिषेक करने के पीछे का राज बता रहे है।

सावन के महीने में धरती पर होते है शिव
सावन का महीना वैसे तो शिव का ही माना जाता है। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि सावन के महीने में ​भगवान शिव धरती पर होते है। ​ भगवान शिव को लेकर मान्यता है कि सावन के महीने मेें शिव जी अपनी शादी के लिए अपने ससुराल कनखल आए थे। ससुराल में उनकर स्वागत, सत्कार जलाभिषेक और अर्घ्य देकर किया गया था। इसलिए माना जाता है कि हर साल सावन के महीनें में शिव जी अपने ससुराल विश्राम के लिए प्रस्थान करते है।

सावन में शिव को माना जाता है महादेव
वैसे तो शिव को देवो का देव महादेव कहा जाता है। लेकिन सावन केे महीनें में उन्हें प्रमुख रूप से पूजा जाता है। वह सावन में सबसे बडे इष्ट याानि सबसे प्रमुख भगवान में माने जाते है। ​सदियों से चली आ रही है एक मान्यता है कि सावन के महीने में भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते है और इस माह को चौमासा के नाम भी जाना जाता है । सावन का महीना साधु संत के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जाता है।

सावन के महीनें में सारे भगवान मिल कर शिव का करते है जलाभिषेक
मान्यता है कि सावन के महीनें में सारे भगवानों ने मिलकर ​भगवान शिव का जलाभिषेक किया था। इसके पीछे शिव से जुडा ​काफी चर्चित किस्सा है ,कहा जाता है कि शिव ने जब समुद्र मंथन से जो जहर पीया था, जहर की वजह से उनका पुरा गला ​नीला पड गया था​ जिस वजह से वह धरती पर नीलकंठ के नाम से भी जाने जाते है। सारे देवताओं ने शिव के शरीर में फैल रहे जहर की गर्मी को दूर करने के लिए उनका जलाभिषेक किया था।

Source: Rochak khabare