इस ​मंदिर में भगवान शिव दिखाते है अपना चमत्कार

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लाइफस्टाइल डेस्क। पूरी दुनिया में भगवान शिव के कई प्रकार के मंदिर है और इन मदिंरो को लेकर लोगों की अलग अलग मान्यता भी देखने को मिलती है। लेकिन आज हम आपको भगवान शिव के एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे है जहां पर शिव​गिंल अपना आकार बदलता रहता है। अब आप सोच रहे होगें की य​ह कैसे सम्भव है कि एक ​शिवलिंग अपना आकार खूद बदले। तो आज हम आपको इस मंदिर से जूडे कुछ पुराने तथ्यों के बारें में बता रहे है।

शिव का यह चमत्कारी मंदिर ​​हरिद्वार के कनखल में स्थित है। ​आपकी जानकारी के लिए बता दे कि ​हरिद्वार के ​कनखल शिव जी का ससुराल माना जाता है और इस मदिंर का नाम तिल भांडेश्वर महादेव है। कनखल के इस मदिंर में जो शिवलिंग है वह कुछ कुछ समय में अपना आकार बदलता रहता है।  इससे जुडी मान्यता है कि अगर इस मंदिर में आप एक महीने तक रोजाना जल में तिल डालकर एक ही समय पर शिव का जलाभिषेक करे तो आपकी हर इच्छा की पूर्ति ​होगी। इससे जुडी पुरानी​ है कि शिव की पत्नि सती ने जब अपने आप को ​अग्नि कुण्ड में कूद कर अपनी जान दे दी थी। तब शिव ने अपने ससुराल यानि प्रजा​पति के घर में कदम रखने से पहले इस मदिंर के स्थान पर अपने आप को तिल के रूप में बदल दिया था। इसी कारण इस मंदिर का नाम तिल भांडेश्वर महादेव रखा गया।

सबसे बडे मंहत हंसदास महाराज ने 19 वीं शताब्दी में इस मंदिर मे आकर काफी कठिन साधना और उपसाना की थी। तब तक किसी को भी इस बात की जानकारी नहीं थी कि शिवलिंग का आकार स्वयं ही बढता है और घटता है। मंदिर के पडिंत मोतीराम अल्हड़ शिवलिंग की पुजा करने के बाद रोज शिवलिंग को जनैउ के द्धारा नापा करते थे । तब इस बात का खुलासा हुआ कि यह​​ शिवलिंग समय समय पर अपना आकार बदलता है। पडिंत मोतीराम अल्हड़ के अनुसार यह शिवलिंग कृष्ण पक्ष में शिवलिंग धीरे धीरे घटता चला जाता है और कृष्ण पक्ष में धीरे धीरे बढता है। यह मदिंर 1800 से भी ज्यादा पुराना है। लेकिन मंदिर में गर्भगृह का जीर्णोद्धार, फर्श का​ निर्माण त्रिवेणीदास महाराज द्धारा 1972 में कराया गया था। उन्होंने मदिंर की देखभाल का जिम्मा लिया और मदिंर में भवन का निर्माण कराया ।

Source: Rochak khabare