मंदिर में ईश्वर की तरह ही पूजा जाता हैं यह सैनिक

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जब भी देशहित की बात आती है, तब हमारे सैनिक इनमे सबसे आगे रहते हैं सीमा पर हमारी रक्षा के लिए हमेशा तैयार खड़े रहने वाले हमारे सैनिक राष्ट्र के लिए ही जीते हैं  राष्ट्र के लिए ही मरते हैऐसे ही एक सैनिक थे बाबा हरभजन सिंह बाबा हरभजन सिंह बाकी सैनिकों से बिलकुल अलग हैप्रायः आपने देखा होगा कि शहीद सैनिकों की एक समाधि तैयार की जाती है लेकिन आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि बाबा हरभजन सिंह का एक मंदिर बना हुआ है  यह दूर-दूर से लोग उनकी पूजा  दर्शन के लिए आते हैं

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भगवान की तरह पूजे जाने वाले बाबा हरभजन सिंह का जन्म आज ही के दिन वर्ष 1927 में पंजाब में हुआ था 27 साल की अल्प आयु में ही उनकी मौत हो गई थी हालांकि बोला जाता है कि मरने के बाद भी आज भी वे अपनी ड्यूटी निभाते है बता दे कि चार अक्टूबर 1968 को खच्चरों का काफिला ले जाते समय नाथुला के समीप उनका पैर फिसल गया  घाटी में गिरने से उनकी मौत हो गई पानी के तेज बहाव के चलते उनका मृत शरीर नहीं मिला

कहा जाता है कि इसके बाद बाबा हरभजन सिंह अपने साथी सैनिक के सपने में आए थे  उसे अपने बॉडी के बारे में बताया  खोजबीन के तीन दिन बाद उनका बॉडी इंडियन सेना को उसी स्थान मिलाबोला यह भी जाता है कि उन्होंने स्वयं के समाधि बनाने की ख़्वाहिश भी जाहिर की थी इसके बाद सिक्किम में उनका एक मंदिर तैयार किया गया जहां आज दूर-दूर से लोग उनके दर्शन के लिए आते हैं इंडियन सेना के ऐसे वीर सैनिक को न्यूज़ट्रैक परिवार की ओर से उनकी जयंती पर शत-शत नमन

Source: Purvanchal media