गवर्नमेंट ने पेट्रोल-डीजल को जीएसटी में लाने पर दिया ये बड़ा बयान

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बिहार के उपमुख्यमंत्री  परिषद के सदस्य सुशील मोदी ने पेट्रोल-डीजल को GST के दायरे में लाने को लेकर बड़ा बयान दिया है उन्होंने बताया कि काउंसिल पेट्रोलियम उत्पादों को GSTके तहत लाने पर तभी विचार करेगी, जब राजस्व का मासिक लक्ष्य एक लाख करोड़ रुपये से अधिक हो जाएगा

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उन्होंने बोला कि शुरुआती महीनों में राजस्व में कमी आ सकती है, क्योंकि वस्तुओं पर कर की दरें घटाई गई है, लेकिन अनुपालन में सुधार के कारण लंबे समय में इसमें तेजी आएगी

मोदी ने बोला कि नया कर ढांचा संपूर्ण GST तभी बनेगा, जब इसके तहत पेट्रोलियम पदार्थो, स्टैंप इलेक्ट्रिसिटी शुल्क को लाया जाए उन्होंने बोला कि जिस सफलता के साथ GST को लागू किया गया है, तीन साल के बाद किसी भी राज्य को मुआवजे की आवश्यकता नहीं होगी

उन्होंने कहा, ‘जब आप कर की दरें घटाते हैं तो अगले तीन-चार महीनों के लिए राजस्व में कमी आ जाती है  मॉनसून के मौसम में बिक्री घट जाती है, इसलिए कर कम जमा होता है जब कर की दरें कम होती है तो लोग भी कर जमा करने में आनाकानी नहीं करते ‘

आम लोगों को राहत देते हुए GST परिषद ने अपनी पिछली मीटिंग में 50 से अधिक सामानों पर कर की दर को कम कर दिया था, जिसमें रेफ्रिजेटर्स, वाशिंग मशीन  छोटे टेलीविजन शामिल थे, जिन पर कर की दर को 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया

मोदी ने इंस्टीट्यूट ऑफ चाटर्ड एकाउंट्स ऑफ इंडिया के अप्रत्यक्ष कर समिति द्वारा आयोजित एक प्रोग्राम से इतर कहा, ‘हमारा लक्ष्य हर महीने एक लाख करोड़ रुपये का कर इकट्ठा करना है ‘

उन्होंने कहा, ‘कोई भी राज्य पेट्रोलियम पर कर घटाना नहीं चाहता, क्योंकि वे इससे अपने राजस्व का 40 प्रतिशत हासिल करते हैं यहां तक कि अगर इन पदार्थों को GST के तहत लाया भी गया, तो भी राज्यों को इन पर अलग से शुल्क वसूलने की छूट होगी ‘

सुशील मोदी ने बोला कि GST परिषद बुरे पदार्थों को छोड़कर कुछ अन्य सामानों पर भी 28 प्रतिशतसे कर घटाकर 18 प्रतिशत करने पर विचार कर रही है

Source: Purvanchal media