मौत के साये में पढ़ रहे नौनिहाल

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तेज प्रताप सिंह
गोंडा : सरकार शिक्षा पर प्रति वर्ष करोड़ों रुपए खर्च कर रही है लेकिन इसके बाद भी बच्चों के शैक्षिक स्तर में सुधार नहीं हो पा रहा है। तमाम सरकारी स्कूलों की इमारतें इतनी जर्जर हो चुकी हैं कि वहां कोई भी अपने बच्चों को नहीं भेजना चाहता। तमाम सुविधाओं के दावों के बाद भी लगभग दस फीसदी छात्र पूरे साल स्कूल नहीं जाते हैं और बीच में ही पढ़ाई छोड़ देते हैं। नतीजन पिछले दस सालों में जिले में साक्षरता दर मात्र 16 फीसदी बढ़ी है और अब भी जिले में 17 लाख लोग निरक्षर हैं।

जर्जर भवन में चल रहे कई विद्यालय
नगरपालिका के पुराने चुंगी गोदाम के नाम से मशहूर परिसर में बेसिक शिक्षा विभाग के अधीन लाला लाजपत राय प्राथमिक विद्यालय, कन्या पूर्व माध्यमिक विद्यालय, प्राथमिक विद्यालय पटेल नगर और प्राथमिक विद्यालय मालवीय नगर विद्यालय के साथ ही दो आंगनबाड़ी केन्द्र भी संचालित होते हैं। लाला लाजपत राय प्राथमिक विद्यालय और कन्या पूर्व माध्यमिक विद्यालय एक बिल्डिंग में और प्राथमिक विद्यालय पटेल नगर और प्राथमिक विद्यालय मालवीय नगर दूसरी बिल्डिंग में शिफ्टों में चलते हैं।
लाला लाजपत राय प्राथमिक विद्यालय (बालक), कन्या पूर्व माध्यमिक विद्यालय की बिल्डिंग खंडहर जैसी है। यहां न तो बिजली है और न शौचालय। प्रधानाध्यापिका श्रीमती कृष्णा द्विवेदी के मुताबिक स्कूल के शौचालय निर्माण के लिए वर्ष 2001 में 10 हजार रुपए आए थे, लेकिन पड़ोसियों के ऐतराज के कारण निर्माण नहीं हो सका। इस बारे में जिलाधिकारी, उपजिलाधिकारी व अन्य अधिकारियों को कई बार पत्र लिखा गया, लेकिन नतीजा शून्य रहा।

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एक भवन में दो प्राइमरी स्कूल
कर्नलगंज के गाड़ी बाजार मोहल्ले में संचालित प्राथमिक विद्यालय, बालक व बालिका, तीन कमरों और एक बरामदे में संचालित हो रहा है। अधिकारियों का तर्क है कि स्कूल निर्माण के लिए जमीन ही नहीं मिल रही है। असलियत ये है कि एक तिहाई नगर नजूल में बसा है। दोनों स्कूलों में एक ही प्रधानाध्यापक की तैनाती है। यहां रसोई घर नहीं है। पड़ोस के एक व्यक्ति को रसोइया नियुक्त कर उसके घर पर भोजन पकाया जाता था। उसे बच्चे खाते थे, लेकिन दो वर्ष पहले रसोइये ने काम करने से मना कर दिया। इसके बाद भवन की छत पर खाना पकाया जाता है।

छतों में दरारें, गिर रहा प्लास्टर

  • पंडरी कृपाल विकासखंड के इन्दिरापुर प्राथमिक विद्यालय की छत और दरवाजे टूटे हैं। प्राथमिक विद्यालय खैरा कुम्भ नगर की दीवारें जर्जर हैं और कमरे ढहने की कगार पर हैं। छत से पानी टपकता है। शौचालय इस्तेमाल लायक नहीं है। छह माह पहले पाइपलाइन के लिए खोदे गए गड्ढे में पानी भरा रहता है।
    इटियाथोक ब्लाक में प्राथमिक विद्यालय की छतों में दरारें आ गयी हैं। टीचर इन कमरों में बच्चों को बैठाने से डरतेे हैं।
  • प्राथमिक विद्यालय रानीपुर के बरामदे से प्लास्टर गिर गया है, जिससे उसकी सरिया दिखने लगी है। यह वर्ष 1973 का बना हुआ विद्यालय है।
  • प्राथमिक विद्यालय पारासराय की छत कभी भी बैठ सकती है। एक बार तो बच्चे कमरे में बैठे थे तभी छत का प्लास्टर भरभराकर गिर गया। गनीमत यह रही कि किसी को चोट नहीं लगी। 1985 में बने इस स्कूल में आज तक कोई मरम्मत नहीं हुई है।
  • प्राथमिक विद्यालय विनोहनी की छत लटक गई है और इसके गिर जाने की आशंका है। यह भवन 1984 का बना हुआ है और यहां 86 छात्र हैं।
  • प्राथमिक विद्यालय तेलियानी कानूनगो का बरामदा एक वर्ष पूर्व धराशायी हो चुका है।
    प्राथमिक विद्यालय गजारपुर की छत से प्लास्टर गिर चुका है और सिर्फ ढांचा बचा है वह भी कब गिर जाए, पता नहीं।
  • बरडांड, मय नगर, मेहनौन, लालपुर, विशुनपुर माफी, पृथ्वी पाल गंज ग्रंट, नये गांव, कुंदेरवा, जंहदरिया, बेलभरिया सहित अन्य विद्यालयों के भी भवन जर्जर हैं।
  • इटियाथोक के खंड शिक्षा अधिकारी रामराज ने बताया कि जर्जर विद्यालयों की सूची विभाग को मरम्मत के लिए दी गयी है। अब विद्यालयों की मरम्मत और रखरखाव की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों को दे दी गई है।

क्या कहते हैं अधिकारी
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी आर.के.वर्मा का कहना है कि वह जिले में अभी नए आए हैं। इसलिए अधिक जानकारी नहीं है। फिर भी स्कूल भवन न होने, शौचालय न होने, परिसर में कूड़ा कचरा होने की जानकारी मिलने पर कार्रवाई की जाती है। स्कूल भवन जर्जर होने की समस्या के समाधान के लिए राज्य परियोजना निदेशक को पत्र लिखकर अवगत कराया जाएगा।

11 साल से छह स्कूलों का निर्माण अधूरा
वित्तीय वर्ष 2006-07 से 2010-11 के बीच स्वीकृत किए गए छह परिषदीय स्कूलों के निर्माण की पत्रावली सर्व शिक्षा अभियान के दफ्तर से गायब हो गई है। इस कारण 11 साल बाद भी इनका निर्माण पूरा नहीं कराया जा सका है। कर्नलगंज विकासखंड की ग्राम पंचायत कूरी में वर्ष 2008-09 में पूर्व माध्यमिक विद्यालय की स्थापना के लिए विभाग ने पांच लाख 40 हजार रुपये ग्राम शिक्षा निधि खाते में भेजे थे मगर स्कूल के लिए आवंटित जमीन विवादों में फंस गई और विद्यालय का निर्माण नहीं शुरू हो सका। इसी वित्तीय वर्ष में करनैलगंज नगर क्षेत्र के उच्च प्राथमिक विद्यालय बालकराम पुरवा में अतिरिक्त कक्षा कक्ष निर्माण के लिए पैसा भेजा गया मगर इसका निर्माण प्लिंथ स्तर से आगे नहीं बढ़ सका।
वर्ष 2007-08 में बभनजोत ब्लाक के ढोढ़ऊपुर में स्वीकृत उच्च प्राथमिक विद्यालय का निर्माण व मनकापुर के उकरहवा में बनने वाले उच्च प्राथमिक विद्यालय का निर्माण लिंटर स्तर पर ही रुक गया। वर्ष 2008-09 में छपिया के बभनीखास में निर्माणाधीन उच्च प्राथमिक विद्यालय का निर्माण छत स्तर तक ही पहुंच सका। वर्ष 2010-11 में इटियाथोक के उच्च प्राथमिक विद्यालय लक्ष्मनपुर लालनगर में निर्माणाधीन अतिरिक्त कक्ष अधूरा रह गया। इन स्कूलों के निर्माण की जिम्मेदारी संभालने वाले एक शिक्षक की मौत हो गई जबकि एक शिक्षक को बर्खास्त किया गया था।

अपने पैसे से कराई साज-सज्जा
कोंडर झील के किनारे स्थित सरकारी स्कूल 1990 में बना, लेकिन बिल्डिंग में प्लास्टर नहीं किया गया। प्लास्टर कराने और पढ़ाई के संसाधन जुटाने में प्रधानाध्यापक चंद्रभान मौर्य ने अपने पास से 65 हजार रुपए खर्च किए। अभिभावकों ने स्कूल में पढ़ाई की व्यवस्था देखी तो बच्चों के दाखिला लेने की लाइन लग गई। सरकार ने बच्चों की यूनीफार्म भेजी, लेकिन उसकी क्वालिटी इतनी घटिया थी कि उन्हें लौटा दिया गया। प्रधानाध्यापक ने अपने पैसे खर्च कर बच्चों के लिए टाई और आई कार्ड का इंतजाम किया।

दस फीसदी बच्चों ने छोड़ दी पढ़ाई
जिले में साक्षरता दर को बढ़ाने के लिए तमाम योजनाएं चल रही हैं। इसके बावजूद यहां पिछले वर्षों में कुल नामांकन के सापेक्ष 9.6 प्रतिशत छात्रों ने पढ़ाई छोड़ दी। इन्हें दोबारा विद्यालय लाने के लिए शिक्षा विभाग ने प्रयास नहीं किया। सरकार के तमाम प्रयासों के बाद भी जिले की साक्षरता में कोई खास सुधार नहीं हो सका है। 2001 की जनगणना में साक्षरता दर 42.60 प्रतिशत थी। इसमें 56.90 प्रतिशत पुरुष व 27.20 प्रतिशत महिलाएं थीं। ग्रामीण क्षेत्र में 27.99, वन क्षेत्र में 14.07 व शहरी क्षेत्र में साक्षरता 63.40 प्रतिशत थी। 2011 की जनगणना में साक्षरता दर 58.71 प्रतिशत पायी गयी। इसमें पुरुष 64.41 व महिलाएं 47.09 फीसदी थीं। जिले में 16 लाख 79 हजार 994 लोग निरक्षर हैं। इसमें 10 लाख 34 हजार 181 पुरुष व 6 लाख 45 हजार 813 महिलाएं हैं। केंद्र सरकार की साक्षर भारत योजना के तहत लोक शिक्षा केंद्रों की स्थापना की गई है। एक ग्राम पंचायत में दो प्रेरकों की नियुक्ति की गई है। ये लोगों को साक्षर कर रहे हैं।

ब्लाकवार साक्षरता दर (फीसदी में)
ब्लाक साक्षरता दर
गोंडा नगर 79
कर्नलगंज 43
कर्नलगंज नगर 65
इटियाथोक 46
झंझरी 52
पंडरीपाल 46
रुपईडीह 43
हलारमऊ 46
कटराबाजार 41
मनकापुर 51
बभनजोत 45
छपिया 53
मुजेहना 44
नवाबगंज 47
नवाबगंज नगर 70
परसपुर 52
बेलसर 48
तरबगंज 49
वजीरगंज 50

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