खाड़ी के देशों में जा रहीं गाजीपुर की सब्जियां

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गाजीपुर : वर्षों से उपेक्षा का दंश झेल रहे गाजीपुर के किसानों के दिन फिर गए हैं। उनके द्वारा उत्पादित मिर्च, टमाटर, परवल सहित अन्य सब्जियों की डिमांड पड़ोसी मुल्कों सहित खाड़ी के देशों में बढ़ गई है। ऐसा र्आटीसी (इंडियन टोबैको कंपनी) कंपनी के जरिये संभव हो रहा है। कंपनी ने मिर्ची सहित अन्य सब्जियां खरीदनी शुरू भी कर दी है जिसे विदेश भेजा जा रहा है। एक अनुमान के मुताबिक जिले मुहम्मदाबाद तहसील के अंतर्गत आने वाली पाताल गंगा सब्जी मंडी में रोजाना करीब 170 टन मिर्ची का कारोबार होता है। अच्छी गुणवत्ता और अधिक समय तक टिकाऊ होने के नाते इसका व्यापार विदेशों तक संभव है। जाहिर है इसका लाभ खेती करने वाले 15 हजार से अधिक किसानों को पहुंचेगा। हालांकि बीते कुछ साल से बंगलादेश, नेपाल व म्?यांमार सहित अन्?य पड़ोसी मुल्कों में यहां से सब्जियां निर्यात की जाती रही हैं।

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पाताल गंगा सब्जी मंडी में मिर्ची, मटर, टमाटर, गोभी आदि का बड़ा बाजार लगता है। हालांकि बरसात का सीजन होने के कारण मंडी में इन दिनों सब्जियों की आवक कम हुई है। मंडी अधिकारियों के मुताबिक सब्जियों की ज्यादा आवक अक्टूबर से शुरू होती है जो जून-जुलाई तक तक रहती है। इसमें मिर्ची की मांग विदेशों से सबसे अधिक है। मिर्ची की आमद अक्टूबर मध्य से शुरू हो जाएगी जो अप्रैल तक बनी रहेगी। इस बाजार में 15 हजार से अधिक किसान अपनी सब्जी लाते हैं, सब्जियों के दाम यहां रोजाना खुलते हैं। इसके अलावा बाहर से आने वाले व्यापारियों के साथ किसान वार्ता कर सामान्य कीमत से अधिक का रेट तय करते हैं। इससे किसानों को अच्छा खासा मुनाफा भी होता है। हालांकि सही मायने में इसका लाभ व्यापारी भी खूब उठाते हैं, लेकिन किसानों को भी बाजार भाव से अधिक कीमत मिलने के कारण वे संतुष्ट रहते हैं। विदेश जाने वाले माल की कीमत किसानों को अधिक मिलती है। सब्जी लेकर मंडी आए किसान गंगाबीशुन, रामदुलारे व बालकिशन का कहना है कि कृषि आधारित इस देश में सरकार ने किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने का प्रयास किया है।

मुहम्मदाबाद क्षेत्र की विधायक अलका राय का कहना है कि सरकार का लक्ष्य वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का है। बजट में कृषि निर्यात लक्ष्य 100 बिलियन डालर तय किया गया है। इसमें पूर्वांचल का योगदान भी कम महत्वपूर्ण नहीं है। पीएम नरेद्र मोदी वाराणसी से सांसद हैं। लिहाजा पूर्वांचल के किसानों को उनसे खास अपेक्षा थी। पूर्वांचल के किसानों के लिए यह बजट एक उम्दा अवसर की तरह है। बजट में अनाज उत्पादन रिकार्ड स्तर पर पहुंचने की घोषणा से कृषि उद्योग की आस बढ़ी है। वहीं विभिन्न दुश्वारियों के बाद भी किसानों की मेहनत ने बेहतर परिणाम भी दिए हैं।

बाबतपुर एयरपोर्ट से भेजी जा रही हैं सब्जियां
वाराणसी स्थित बाबतपुर एयरपोर्ट से खाड़ी देशों में सब्जी भेजने के लिए पिछली साल ट्रायल किया गया था जो सफल रहा। सूत्रों के मुताबिक अब तक 1000 टन से अधिक सब्जियां विदेश भेजी जा चुकी हैं। सब्जियों को विदेश भेजे जाने के लिए पैदावार को लेकर किसानों को जागरूक किया जा रहा है। इसके लिए जिला कृषि विभाग द्वारा किसान जागरूकता कैंप भी लगाए जा रहे हैं जो अपने-अपने क्षेत्र के किसानों को गुणवत्ता पूर्ण सब्जियां उगाने का प्रशिक्षण दे रहे हैं। इसके साथ बीज व कीटनाशकों पर दी जाने वाली सब्सिडी की भी जानकारी दी जा रही है। कम लागत में अधिक उपज लेने के लिए वैज्ञानिक खेती के तरीके भी बताए जा रहे हैं।

किसानों को मिला व्यापक बाजार
पूर्वांचल के किसानों को बाजार देने में रेलवे भी अहम भूमिका निभा रहा है। सरकार की मंशा रेलवे के माध्यम से उत्पाद को देश के अन्य हिस्सों मे भेजने की पूर्व से ही थी। रेलवे ने बनारस में राजातालाब और गाजीपुर जिले में इसका जिम्मा संभाला है जहां कार्गो निर्माण होने से किसानों के उत्पाद को देश भर में सस्ते दर पर कम समय में ही पहुंचाने की कवायद पहले से ही चल रही है। किसानों का कहना है कि पहले गाजीपुर से सीमित रेलगाडिय़ां ही चलती थीं। साथ ही भंडारण की भी कोई व्यवस्था नहीं थी, लेकिन अब बदले हालात में गाजीपुर को अंतरराष्ट्रीय स्तर की पहचान मिलने लगी है। यहां से देश के विभिन्न हिस्सों में ट्रेनें जाती हैं। इसकी वजह से किसानों की सब्जियां भी अन्य प्रदेशों की मडियों तक पहुंच रही हैं, जिसका सीधा लाभ किसानों को मिल रहा है।

गाजीपुर के आलू का कोई जोड़ नहीं
पूर्वांचल से जुड़े सोनभद्र व मीरजापुर जहां टमाटर की खेती के लिए जाना जाता है, वहीं गाजीपुर के आलू का कोई जोड़ नही। बलिया, वाराणसी, जौनपुर, मऊ व आजमगढ़ भी सब्जी उत्पादन में अव्वल रहा है। इसके अतिरिक्त सिंचाई की योजनाओं पर बेहतर बजट से खेतों की प्यास बुझाने की मंशा पूर्वांचल के लिए संजीवनी साबित हो सकती है। जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि पूर्वांचल में सब्जियों के बेहतर उत्पादन के लिए भारतीय सब्जी अनुसधान केंद्र शाहजहांपुर में शोध कार्यों को भी सरकार ने बढ़ावा दिया है जिसका सीधा लाभ किसानों को मिल सकेगा। इससे उनकी उपज भी बढ़ेगी और आर्थिक स्थिति भी सुधरेगी।

किसानों को हो रहा फायदा
पूर्वांचल में आलू, मटर, टमाटर, गोभी, पत्ता गोभी, सेम, धनिया, मूली के अलावा जायद की सब्जी करैला, लौकी, तोरी, कद्दू आदि प्रमुख रूप से पैदा की जाती है। वाराणसी में खुले कार्गो सेंटर के माध्यम से इस साल वाराणसी और गाजीपुर से मटर और मिर्च का निर्यात किया जा रहा है। अन्य जनपदों से भी मटर और मिर्च के अलावा गोभी, पत्तागोभी व टमाटर सहित कई अन्य सब्जियों का निर्यात करने के लिए दिल्ली व मुंबई के निर्यातक गाजीपुर पहुंच रहे हैं, जिसका सीधा लाभ किसानों को मिल रहा है।

लगभग सभी सरकारों ने गाजीपुर की उपेक्षा की है,लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। गाजीपुर को विकास के पथ पर लाने के लिए बहुत कुछ किया गया है और काफी कुछ किया जाना बाकी है। यहां के किसानों व व्यापारियों को मजबूत बनाने और युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करने के साथ ही रेल, सड़क, बिजली व पानी व्यवस्था भी सुधारनी है। इस दिशा में केंद्र व राज्य सरकारें काम कर रही हैं। आने वाले दिनों में पूर्वांचल के सभी जिलों में काम की गति दिखेगी।
मनोज सिन्हा, सांसद व रेल राज्यमंत्री

 

मुहम्मदाबाद विधानसभा क्षेत्र के किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने के लिए उनके फल व सब्जियों के उत्पादों के निर्यात की उचित व्यवस्था करना ही हमारा लक्ष्य है। अगर किसान खुशहाल हैं तो देश की खुशहाल है। मंडी की भी अच्छी व्यवस्था की जा रही है ताकि किसानों को अपनी फसल चाहे वह सब्जी हो या अनाज, बेचने में कोई परेशानी न हो।
अलका राय, विधायक मुहम्मदाबाद

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