इस शिवमंदिर में टूटा था औरंगजेब का घमंड, ‘ततैयों’ ने दी थी सजा, शिवलिंग से फूटी थी धारा

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हरदोई: मल्लावां-कन्नौज मार्ग पर 4 किमी दूर दक्षिण में देवराज इंद्र स्थापित सुनासीर नाथ मंदिर आज भी मुगल बादशाह औरंगजेब द्वारा की गई बर्बरता की कहानी बयां कर रहा है। मुगल बादशाह फौज जब स्वर्ण जड़ित सुनासीर नाथ मंदिर को लूटने पहुंचा तो गौरीखेड़ा के क्षत्रियों का उसे सामना करना पड़ा, जिसमें सैकड़ों जानें चली गईं। बादशाह ने सैनिकों को शिवलिंग चीरने का आदेश दिया। उसके बाद सैनिक आरे से शिवलिंग काटने लगे, इस पर शिवलिंग से दूध की धार फूट पड़ी। वहां पर बर्रैया व ततैयों ने सैनिकों पर हमला बोल दिया। यह देख सैनिकों को वहां से भागना पड़ा था।newstrack.com आज आपको सुनासीर नाथ मंदिर की अनटोल्ड स्टोरी बता रहा है।

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देवराज इंद्र ने की थी इस मंदिर की स्थापना

बाबा सुनासीर नाथ आदि काल से लोगों की आस्था का केंद्र रहा है। इस मंदिर की स्थापना स्वयं देवराज इंद्र ने की थी। आदि काल से ही ये मंदिर लाखों लोगों की आस्था का केंद्र रहा है। इस मंदिर में जुड़ी कई प्रचलित मान्यताएं भी है। सावन में श्रद्धालू दूर दराज से इस मंदिर में आते हैं। लोगों का मानना है कि इस मंदिर में भगवान शंकर के दर्शन मात्र से भक्तों के सभी कष्ट दूर हो जाते है।

16वीं शताब्दी में औरंगजेब ने मंदिर पर बोला था धावा

बताया जाता है कि 16वीं शताब्दी में मुगल आक्रांता औरंगजेब अपनी फौज व तलवारों की दम पर देश भर के मंदिरों व देव स्थानों को ध्वस्त करते हुए गंगा की तराई में आ पहुंचा। यहां आने पर औरंगजेब की स्वर्णजड़ित इस मंदिर पर नियत खराब हो गई। औरंगजेब लूटने के बाद इसे तबाह करने का मन बना बैठा। इतिहासकार बताते हैं इसके भनक लगते ही गौराखेड़ा के शूरवीरों ने मुगलसेना के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। भयंकर युद्ध हुआ, दोनों ओर से सैकड़ों सैनिक मारे गए, लेकिन युद्ध कौशल से अनभिज्ञ व संसाधनों के अभाव में गौरखेड़ा के शूरवीर ज्यादा देर तक सेना के सामने नहीं टिक सके। इसके बाद मनमानी पर उतारू औरंगजेब के इशारे पर सेना ने मंदिर में लूटपाट शुरू कर दी।

शिवलिंग से फूट पड़ी दूध की धारा

सैनिकों ने सबसे पहले मंदिर में लगा दो क्विंटल के सोने का कलश उतरवा लिया। फर्श में लगी सोने की गिन्नियां व सोने के घंटे लूट लिए। सैनिकों ने औरंगजेब के आदेश पर मंदिर का भवन ध्वस्त कर दिया। बताया जाता है कि इसके बाद सैनिक शिवलिंग खोदने लगे। काफी प्रयास के बाद भी सैनिक इसमें सफल नहीं हुए तो बादशाह ने सैनिकों को शिवलिंग चीरने का आदेश दिया। बादशाह के आदेश पर सैनिक आरे से शिवलिंग काटने लगे, इस पर शिवलिंग से दूध की धार फूट पड़ी। यह देख सैनिकों ने आरा चलाना बंद कर दिया।

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बर्रैया और ततैयों ने की थी शिवलिंग की रक्षा

इस बीच अचानक वहां लाखों की संख्या में प्रकट हुईं बर्रैया व ततैयों ने औरंगजेब की सेना पर हमला बोल दिया। जिस पर सैनिक वहां से भाग खड़े हुए। बर्रैयों व ततैयों ने शुक्लापुर गांव तक सेना का पीछा कर उन्हें खदेड़ दिया। शिवलिंग पर आरे का निशान आज भी देखा जा सकता है। मंदिर कमेटी व श्रद्धालुओं ने आस्था के प्रतीक बाबा सुनासीर नाथ मंदिर को भव्य रूप देना शुरू कर दिया है।

श्रद्धालुओं ने दिया था मंदिर को नया रूप

औरंगजेब व उसकी सेना द्वारा किए गए हमले में मंदिर का भवन पूरी तरह से क्षतिग्रस्त कर दिया गया था। बताया कि जाता है कि काफी अरसा पूर्व क्षेत्र भगवंतनगर में रहने वाले एक एक मिश्रा परिवार ने मंदिर के भवन का निर्माण करवाया था और उसे नया स्वरूप दिया गया था। मंदिर समिति के अध्यक्ष सत्यनरायण सेठ ने बताया कि मंदिर के पास लगभग 70 बीघा जमीन है। इसमें से एक बड़े हिस्से पर भू -माफियाओं ने कब्जा कर रखा है। बताया कि दोबारा उस जमीन को कब्जे में लेकर मंदिर को भव्य रूप देने का प्रयास किया जा रहा है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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