कई राष्ट्रों में हाल ही में लगाए गए हैं प्रतिंबध

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दुनिया में यूं तो स्त्रियों को पुरुषों के बराबर अधिकार दिलाने के लिए सरकारें कई तरह के कोशिश कर रही हैं. लेकिन विश्व बैंक की हाल ही में आई रिपोर्ट के मुताबिक इतने कोशिश होने के बाद भी संसारके 104 राष्ट्रों के श्रम कानूनों में स्त्रियों के साथ भेदभाव किया गया है. इन कानूनों के मुताबिक रोजगार से संबंधित कई कामों को केवल पुरुषों के लिए आरक्षित किया गया है. उन कामों को महिलाएं नहीं कर सकती हैं.
Image result for विश्व बैंक की रिपोर्ट में खुलासा, 104 राष्ट्रों के श्रम कानून में कुछ कार्य केवल पुरुषों के लिए ही आरक्षित

कजाकिस्तान में महिलाएं पशुओं से संबंधित कोई कार्य नहीं कर सकती हैं. वहीं वियतनाम में महिलाएं 50 हॉर्सपावर  उससे अधिक के ट्रक्टर नहीं चला सकतीं. कई समृद्ध राष्ट्रों में काम स्थलों पर लिंग भेदभाव को खत्म करने के सभी कोशिश किए जा रहे हैं. इसके बावजूद भी विकसित राष्ट्रोंमें ऐसे भेदभावों को पूरी तरह से समाप्त नहीं किया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक महिलाएं सभी कार्यनहीं कर सकती हैं.

विश्व बैंक में कार्यरत सारा इकबाल कहती हैं कि कई राष्ट्रों ने तो ऐसी नौकरियों की एक लिस्ट ही जारी कर दी है जिन्हें स्त्रियों के लिए खतरनाक बताया गया है. इनमें कई स्थान महिलाएं रात की ड्यूटी नहीं कर सकती हैं. कई कार्यों को स्त्रियों के लिए नैतिक रूप से अनुचित बताया गया है जैसे कजाकिस्तान में पशुओं से संबंधित कार्य किया जाना. चार राष्ट्रों में तो महिलाएं अपना बिजनेस पंजीकृत नहीं करवा सकतीं. वहीं 18 राष्ट्र तो ऐसे हैं जहां पति अपनी पत्नियों को कार्य करने से रोक सकते हैं.

ये सब करने के पीछे उद्देश्य होता है स्त्रियों (वीकर सेक्स) की सुरक्षा करना. कई कानूनों में तो स्त्रियोंको बच्चों वाली श्रेणी में डाल दिया गया है. जिनमें स्त्रियों को उन कामों को करने के लिए मना किया गया है जो शारीरिक रूप से मुश्किल हैं जैसे कि खनन, निर्माण  उत्पादन से संबंधित काम. मुंबई जैसी जगहों पर महिला दुकानदार देर रात तक दुकानें नहीं खोल सकतीं. केवल पुरुष ही खोल सकते हैं. ऐसा भी उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखकर किया गया है.

कई राष्ट्रों में हाल ही में लगाए गए हैं प्रतिंबध

महिलाओं के रात के वक्त कार्य करने की पाबंदी इंग्लैंड में औद्योगिक क्रांति के वक्त लगाई गई थी.ऐसा करने के पीछे उनका विचार था कि महिलाएं पुरुषों के मुकाबले अधिक निर्बल हैं. साथ ही वह काम के दौरान शोषण के लिए भी पुरुषों के मुकाबले निर्बल हैं. स्त्रियों की क्षमता को कम आंकते हुए पुरुषों को ही उनसे बेहतर विकल्प माना जाता रहा है.

वर्ष 1948 में अंतर्राष्ट्रीय श्रम संस्थान (आईएलओ) ने स्त्रियों को खदानों  उद्योग से संबंधित कामस्थलों में रात के वक्त कार्य करने से दूर रहने के लिए बोला था. स्पेन ने भी वर्ष 1995 तक स्त्रियों के खदान, बिजली  निर्माण काम से संबंधित कार्य करने पर लगे प्रतिबंध नहीं हटाए थे. पूर्व उपनिवेशों में स्त्रियों के कार्य करने पर प्रतिबंध आज के समय में भी लगाए जा रहे हैं जिनके पीछे का कारण वर्ष1960 की स्पेनिश नागरिक संहिता है.

कई कानूनों को तो हाल ही में लागू किया गया है. जैसे वियतनाम में स्त्रियों का 50 हॉर्सपावर या उससे अधिक में ट्रैक्टर चलाने पर प्रतिबंध. इस कानून को वर्ष 2013 में ही लागू किया गया था.लेकिन कई राष्ट्र ऐसे भी हैं जहां उदारीकरण की नीति अपनाई जा रही है. हाल ही में बुलगारिया, किरिबाती  पोलैंड ने सभी तरह के प्रतिबंधों को हटा दिया है.

वहीं कोलंबिया  कांगो ऐसे राष्ट्र हैं जिन्होंने सारे तो नहीं पर कुछ प्रतिबंधों को हटा दिया है. कई राष्ट्रों ने तो तकनीकी विकास के चलते कानूनों में बदलाव किया है. क्योंकि तकनीकी विकास से कई तरह के कार्य सुरक्षित हो गए हैं, जिस कारण स्त्रियों की खुद की सुरक्षा के लिए किसी पर निर्भरता कम हो गई है. तो कहीं अदालतों ने कानूनों को भेदभावपूर्ण बताते हुए उनमें परिवर्तन किया है.

श्रमिकों की कमी भी स्त्रियों पर लगे प्रतिबंधों को हटाने में मददगार साबित हुई है. जब बहुत से पुरुषों ने केलंबिया के मरमाटो को छोड़ दिया  बेहतर रेजगार की तलाश में दूसरी जगहों पर जाने लगे तो न चाहते हुए भी स्त्रियों को उनकी स्थान कार्य पर रखना पड़ा. स्त्रियों को पुरुषों की स्थान रखने से कानून भी टूट रहा था पर कार्य चलाने के लिए मालिकों के पास  कोई दूसरा रास्ता नहीं था.

अच्छा इसी तरह पूर्वी यूरोप के पुरुष ट्रकर्स जो यूरोपीय संघ से जुड़े थे, उन्होंने भी पश्चिमी राष्ट्रों की तरफ जाना प्रारम्भ कर दिया. जिसके बाद न चाहते हुए भी स्त्रियों को उनकी स्थान कार्य पर रखा गया. वर्ष 2011 में फिलिपींस में कॉल सेंटरों में कार्य करने के लिए स्त्रियों के रात के वक्त कार्य करने पर लगे प्रतिंबध को हटा दिया गया.

बता दें आईएलओ द्वारा स्त्रियों पर लगाए गए कुछ प्रतिबंधों को विश्व बैंक के इस अध्ययन में शामिल नहीं किया गया है. इसमें वो स्थान शामिल हैं जहां केमिकल का कार्य किया जाता है. वहां गर्भवती  स्तनपान कराने वाली स्त्रियों के कार्य करने पर प्रतिबंध लगाया गया है. ताकि उनके होने वाले बच्चे की स्वास्थ्य पर कोई बुरा असर न पड़े.

Source: Purvanchal media